Edited By Tanuja,Updated: 02 Mar, 2026 12:08 PM

इजरायली सेना ने बेरूत सहित लेबनान में बड़े हवाई हमले किए, जिनमें 31 लोगों की मौत और 149 घायल हुए। यह कार्रवाई हिज़्बुल्लाह के रॉकेट-ड्रोन हमलों के बाद हुई, जो Ali Khamenei की हत्या के जवाब में किए गए थे। हालात से बड़े क्षेत्रीय युद्ध का खतरा बढ़ गया...
International Desk: ईरान, सीरिया व लेबनान एक साथ तीन मोर्चों पर जंग लड़ रही इजरायली सेना ने सोमवार तड़के घोषणा की कि लेबनान भर में Hezbollah के ठिकानों पर “सटीक हमले” शुरू किए हैं। राजधानी बेरूत के दक्षिणी उपनगर, जो हिज़्बुल्लाह का गढ़ माने जाते हैं, वहां जोरदार धमाके सुने गए। लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, शुरुआती आंकड़ों में 31 लोगों की मौत और 149 घायल हुए हैं। कई इमारतें क्षतिग्रस्त हुईं और व्यापक दहशत फैल गई।इजरायली सेना की प्रवक्ता एला वावेया ने दक्षिण और पूर्वी लेबनान के लगभग 50 कस्बों और गांवों के निवासियों को तत्काल घर खाली कर कम से कम 1000 मीटर दूर खुले इलाकों में जाने की चेतावनी दी। एएफपी के पत्रकारों ने देखा कि लोग कारों में गद्दे और जरूरी सामान बांधकर भाग रहे थे। इसे “बड़े पैमाने पर विस्थापन” बताया गया है।
हिज़्बुल्लाह ने इजरायल पर रॉकेट और ड्रोन हमलों की जिम्मेदारी लेते हुए कहा कि यह कार्रवाई Ali Khamenei की कथित हत्या के जवाब में की गई है, जो सप्ताहांत में अमेरिका-इजरायल के हमलों में मारे गए थे। संगठन ने कहा कि यह “लेबनान और उसके लोगों की रक्षा” के लिए भी जरूरी था। हालांकि इजरायल ने कहा कि दागे गए प्रोजेक्टाइल खुले क्षेत्रों में गिरे और कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ। लेबनान के प्रधानमंत्री नवाफ सलाम ने रॉकेट हमलों को “गैर-जिम्मेदाराना” करार दिया और कहा कि इससे देश की सुरक्षा खतरे में पड़ती है और इजरायल को हमले जारी रखने का बहाना मिलता है। राष्ट्रपति जोसेफ औन ने भी चेतावनी दी कि लेबनान को क्षेत्रीय संघर्ष का मैदान नहीं बनने देना चाहिए।
सीज़फायर के बाद सबसे बड़ा टकराव
नवंबर 2024 के युद्धविराम समझौते के बाद यह पहली बार है जब हिज़्बुल्लाह ने खुले तौर पर इजरायल पर हमला करने का दावा किया है। 2023 में गाजा युद्ध के बाद दोनों पक्षों के बीच एक साल से अधिक समय तक संघर्ष चला था। इजरायली सेना प्रमुख एयाल जामिर ने कहा कि “हिज़्बुल्लाह ने अभियान शुरू किया है और किसी भी बढ़ोतरी की पूरी जिम्मेदारी उसी की है।” स्थिति तेजी से बदल रही है और पूरे क्षेत्र में तनाव चरम पर है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह टकराव बढ़ा, तो मध्य पूर्व में व्यापक युद्ध का खतरा पैदा हो सकता है।