पर्यटकों के लिए आकर्षण बना हुआ है शिल्प कला उद्यान

Edited By Updated: 29 Nov, 2022 08:52 PM

craft garden has become an attraction for tourists

भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने धर्मक्षेत्र कुरुक्षेत्र की ऐतिहासिक, पौराणिक एवं धार्मिक धरा पर स्थित पवित्र तीर्थ स्थल ब्रह्मसरोवर के तट पर आयोजित अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव में मंत्रोच्चारण के बीच पूजा-अर्चना की व ब्रह्मसरोवर में नारियल का...

चण्डीगढ़, 29 नवंबर - (अर्चना सेठी) भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने धर्मक्षेत्र कुरुक्षेत्र की ऐतिहासिक, पौराणिक एवं धार्मिक धरा पर स्थित पवित्र तीर्थ स्थल ब्रह्मसरोवर के तट पर आयोजित अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव में मंत्रोच्चारण के बीच पूजा-अर्चना की व ब्रह्मसरोवर में नारियल का विसर्जन किया। ब्रह्मसरोवर के पुरुषोत्तमपुरा बाग घाट पर आयोजित इस कार्यक्रम में कात्यायनी मंदिर के पीठाध्यक्ष पंडित बलराम गौतम के साथ पंडित सोमनाथ शर्मा, पंडित रुद्र गौतम, पंडित गोपाल कृष्ण, पंडित अनिल व पंडित शुभम ने मंत्रोच्चारण व स्वस्तिवाचन से राष्ट्रपति की दीर्घायु की कामना की।

 

 इसके बाद उन्होंने पुरुषोत्तमपुरा बाग पर स्थित भगवान श्री कृष्ण के विशाल रथ की प्रतिमा के नजदीक आयोजित हवन-यज्ञ में पवित्र धार्मिक ग्रंथ गीता पर पुष्प अर्पित किए व हवन-यज्ञ में पूर्णाहुति दी। हरियाणा के राज्यपाल  बंडारू दतात्रेय व हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल मौजूद रहे।आजादी के अमृत महोत्सव वर्ष को समर्पित देवभूमि कुरुक्षेत्र के पुरुषोतमपुरा बाग में बनाया गया गीता मूर्ति शिल्प उद्यान का आज राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू ने उद्घाटन किया।

 

 उद्यान में आजादी के 75वें अमृत महोत्सव मॉडल, गीता एवं भारतीय संस्कृति के अनेक महत्वपूर्ण पहलुओं को दर्शाने का प्रयास किया गया है। मूर्तियों को हरियाणा राज्य के साथ-साथ उड़ीसा, तेलंगाना, राजस्थान और असम के 21 शिल्पकारों ने दिन-रात का अथक प्रयास करने के उपरांत 21 मूर्तियों को तैयार किया गया है। काले संगमरमर से बनी पांच से 12 टन वजन वाली ये मूर्तियां कलाकारों ने एक ही चट्टान के टुकड़ों को तराश कर तैयार की है। सभी मूर्तियां महाभारत से संबंधित विषयों को लेकर तैयार की गई है। इनमें आजादी का अमृत महोत्सव और गीता को भी दर्शाया गया है। होनहार कला शिल्पियों के साथ हृदय कौशल के नेतृत्व में बनाए गए खूबसूरत मूर्ति शिल्पियों तथा कला एवं सांस्कृतिक कार्य विभाग के प्रयास सराहनीय है।

 

 मूर्तियां 75वें आजादी के अमृत महोत्सव का स्थायी गवाह बन गई है। इस अतुलनीय कार्य से राज्य में लुप्त होती आधुनिक मूर्तिकला के साथ-साथ राज्य के युवा कलाकारों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक विशेष पहचान मिली है। सदियों तक जिंदा रहने वाली यह आधुनिक अदभुत कला राज्य का गौरव एवं मान-सम्मान बढ़ाने का काम कर रही है। यह उद्यान रात्रि के समय में और भी खूबसूरत व मनमोहक दिखाई दे रहा है। इन मूर्तियों के साथ-साथ रंग-बिरंगी लाइटे भी लगाई गई है, महोत्सव के दौरान मूर्ति कला उद्यान को देखने वाले पर्यटक इसका भरपूर आनंद उठा रहे है।

 

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