इस देश में ‘सोने’ से भी महंगा हुआ खीरा! युद्ध का असर अब रसोई तक पहुंचा

Edited By Updated: 18 Feb, 2026 05:41 PM

cucumbers in russia are more expensive than gold has the impact of war reached

रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध के बीच अब रूस के सामने एक नई और हैरान करने वाली समस्या खड़ी हो गई है। जहां एक तरफ दुनिया भर में सोने-चांदी की कीमतों को लेकर हलचल है, वहीं रूस में खीरे की कीमतों में अचानक आई भारी बढ़ोतरी ने आम लोगों की मुश्किलें...

नेशनल डेस्क : रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध के बीच अब रूस के सामने एक नई और हैरान करने वाली समस्या खड़ी हो गई है। जहां एक तरफ दुनिया भर में सोने-चांदी की कीमतों को लेकर हलचल है, वहीं रूस में खीरे की कीमतों में अचानक आई भारी बढ़ोतरी ने आम लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। सोशल मीडिया पर लोग मजाकिया अंदाज में खीरे को “नया सोना” कह रहे हैं। महंगी सब्जियों की तस्वीरें शेयर की जा रही हैं और डार्क ह्यूमर के जरिए इसकी तुलना लग्जरी सामान से की जा रही है।

दिसंबर से दोगुनी हुई कीमत

ब्रिटिश अखबार The Independent की एक रिपोर्ट के मुताबिक, रूस में खीरे की कीमत दिसंबर से दोगुनी हो चुकी है।

  • कीमत लगभग 300 रूबल (करीब 356 रुपये) प्रति किलो तक पहुंच गई है।
  • कुछ जगहों पर खीरे इससे भी दो या तीन गुना ज्यादा दाम पर बिक रहे हैं।

इस अचानक बढ़ोतरी ने आम लोगों को हैरान कर दिया है।

मीट के बराबर पहुंची कीमत

Forbes Russia की रिपोर्ट के अनुसार, फरवरी की शुरुआत तक खीरे की कीमत मीट के बराबर हो गई है। कई सुपरमार्केट में खीरे के दाम: मीट जितने, केले जैसे आयातित फलों के बराबर या उनसे भी ज्यादा हो गए हैं। यह मुद्दा अब बाजार से निकलकर राजनीति तक पहुंच चुका है।

सरकार पर विपक्ष का हमला

Sergey Mironov, जो A Just Russia पार्टी के नेता हैं, उन्होंने सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने सरकार के उस बयान की आलोचना की जिसमें कीमतों में बढ़ोतरी को सिर्फ “मौसमी कारण” बताया गया था। मिरोनाव ने कहा कि अगर लोगों को बुनियादी खाने की चीजें खरीदने में भी परेशानी हो रही है, तो यह स्वीकार्य नहीं है।

आखिर क्यों बढ़े खीरे के दाम?

युद्धकालीन महंगाई : रूस की अर्थव्यवस्था का झुकाव सैन्य खर्च की ओर बढ़ गया है। इससे गैर-सैन्य क्षेत्रों में उत्पादन और सप्लाई पर असर पड़ा है, जिसके कारण रोजमर्रा की चीजों के दाम तेजी से बढ़े हैं।मजदूरों की कमी : पहले भारी सब्सिडी देकर ग्रीनहाउस उद्योग को बढ़ावा दिया गया था। लेकिन युद्ध और सैन्य भर्ती (ड्राफ्टिंग) के कारण लेबर की भारी कमी हो गई है। इससे उत्पादन प्रभावित हुआ है।
टैक्स में बढ़ोतरी : 1 जनवरी 2026 से वैल्यू-एडेड टैक्स (VAT) 20% से बढ़ाकर 22% कर दिया गया है। इससे उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतों पर अतिरिक्त दबाव पड़ा है।
सर्दियों का असर : रूस का कृषि मंत्रालय इसे सर्दियों के मौसमी उतार-चढ़ाव से जोड़ रहा है। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा कीमतों में बढ़ोतरी सामान्य मौसमी बदलाव से कहीं ज्यादा है।

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