Edited By Radhika,Updated: 07 Mar, 2026 06:29 PM

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शनिवार को आरोप लगाया कि एसआईआर के बाद मतदाता सूचियों से मतदाताओं के नाम हटाने का उद्देश्य राज्य को विभाजित करना है। राज्य में मतदाता सूची से कथित रूप से मनमाने तरीके से लोगों के नाम हटाए जाने के विरोध में...
नेशनल डेस्क: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शनिवार को आरोप लगाया कि एसआईआर के बाद मतदाता सूचियों से मतदाताओं के नाम हटाने का उद्देश्य राज्य को विभाजित करना है। राज्य में मतदाता सूची से कथित रूप से मनमाने तरीके से लोगों के नाम हटाए जाने के विरोध में प्रदर्शन कर रहीं ममता बनर्जी ने इस दौरान प्रदर्शन स्थल पर मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए भाजपा पर बांग्ला भाषी लोगों को उनके मतदान के अधिकार से वंचित करने का आरोप लगाया। मुख्यमंत्री ने लगातार दूसरे दिन शनिवार को भी अपना विरोध प्रदर्शन जारी रखा। इससे पहले वह रात में यहीं धरना स्थल पर रुकी थीं। बनर्जी ने प्रदर्शन स्थल पर आरोप लगाया, ''उनका (निर्वाचन आयोग और भाजपा का) इरादा बंगाल को बांटना है।
भाजपा बंगाल को विभाजित करके वोट छीनने की साजिश रच रही है। वे (भाजपा नेता) अन्य राज्यों में बांग्ला भाषी लोगों को परेशान कर रहे हैं और पश्चिम बंगाल के लोगों को उनके मतदान के अधिकार से वंचित करने की साजिश रच रहे हैं।'' मुख्यमंत्री ने दावा किया कि एक दिन पहले उन्होंने एक ट्वीट में देखा था कि बंगाल और बिहार को विभाजित करके एक केंद्र शासित प्रदेश बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा, "अगर उनमें हिम्मत है तो बंगाल को हाथ लगाकर दिखाएं। यह उनकी साजिश है। उन्होंने बिहार में झारखंड बनाकर ऐसा किया था, और अब वे फिर से ऐसा करने की कोशिश कर रहे हैं।" विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बाद मतदाता सूची से लाखों नाम कथित तौर पर हटाए जाने पर निर्वाचन आयोग की आलोचना करते हुए बनर्जी ने कहा कि दीनहाटा जैसे एक ही विधानसभा क्षेत्र से 36,000 नाम हटा दिए गए। उन्होंने अपने निर्वाचन क्षेत्र भबानीपुर की कई महिलाओं से मंच पर आकर अपने दस्तावेज दिखाने को कहा। बनर्जी ने कहा, ''मेरे अपने निर्वाचन क्षेत्र में 60,000 वोट हटा दिए गए हैं। मैं आपको पूरी मतदाता सूची हटाने की चुनौती देती हूँ।''
निर्वाचन आयोग पर ''मतों की लूट'' का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा, ''क्या वे देश के नागरिक नहीं हैं? क्या उन्हें वोट देने का अधिकार नहीं है?'' उन्होंने कहा, "आप बंगाल को बांटना चाहते हैं, लेकिन पहले एप्स्टीन से निपटिए। याद रखिए, आप हम पर जितना हमला करेंगे, जवाबी कार्रवाई उतनी ही जोरदार होगी।" बनर्जी ने यह बात एप्स्टीन फाइल विवाद का जिक्र करते हुए कही, लेकिन उन्होंने इस संबंध विस्तार से कुछ नहीं कहा। उन्होंने कहा, "हम बंगाल में सभी धर्मों का सम्मान करते हैं और समाज में सभी को जाति, पंथ या धर्म के भेदभाव के बिना समान मानते हैं। और याद रखें कि बांग्ला भाषा को स्वतंत्रता से बहुत पहले ही मान्यता मिल चुकी थी। मेरे पास 10 रुपये का एक पुराना नोट है जिस पर राशि बांग्ला भाषा में लिखी हुई है।"

तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस (8 मार्च) के अवसर पर, मतदाता सूची से महिलाओं के नाम हटाने और एलपीजी की कीमतों में वृद्धि के विरोध में हजारों महिलाएं रविवार को शहर की सड़कों पर उतरेंगी तथा प्रदर्शनकारी काले कपड़े पहनेंगे। उन्होंने कहा, ''भाजपा को सावधान हो जाना चाहिए। वोट मिटाकर तुम बंगाल को विभाजित नहीं कर सकते। और अगर तुमने हद पार की, तो तुम्हारी दिल्ली सरकार गिर जाएगी।'' बनर्जी ने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा कभी भी समान अधिकारों और महिला सशक्तीकरण के अपने चुनावी वादों को पूरा नहीं करती, जबकि तृणमूल कांग्रेस के नेतृत्व वाली बंगाल सरकार इन वादों को अक्षरशः और भावना के साथ पूरा करती है। उन्होंने कहा, "बंगाल एकमात्र ऐसा राज्य है जहां संसद में 37 प्रतिशत निर्वाचित महिला प्रतिनिधि हैं, और वे महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण की बात करते हैं! पंचायतों और नगर निकायों में तो महिलाओं के लिए पहले से ही 50 प्रतिशत आरक्षण है। हमारे यहां मातृत्व अवकाश भी है। कामकाजी महिलाओं को लगभग 735 दिन का अवकाश मिलता है। वे (भाजपा नेता) चुनाव से पहले मतदाताओं को सिर्फ 10,000 रुपये देते हैं और फिर चुनाव के बाद बुलडोजर लेकर आ जाते हैं।''

बनर्जी ने शुक्रवार को मध्य कोलकाता में प्रदर्शन शुरू किया था, जिसमें उन्होंने निर्वाचन आयोग पर आगामी विधानसभा चुनाव से पहले ''बंगाल के मतदाताओं को मताधिकार से वंचित करने'' के लिए भाजपा के साथ साजिश रचने का आरोप लगाया था। यह प्रदर्शन विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची में संशोधन को लेकर बढ़ते राजनीतिक तनाव के बीच निर्वाचन आयोग की पूर्ण पीठ के पश्चिम बंगाल दौरे से कुछ दिन पहले हो रहा है। निर्वाचन आयोग द्वारा 28 फरवरी को जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पिछले साल नवंबर में एसआईआर प्रक्रिया शुरू होने के बाद से लगभग 63.66 लाख लोगों यानी लगभग 8.3 प्रतिशत मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं, जिससे मतदाता आधार लगभग 7.66 करोड़ से घटकर 7.04 करोड़ से थोड़ा अधिक रह गया है। इसके अलावा, 60.06 लाख से अधिक मतदाताओं को ''न्यायिक जांच के अधीन'' श्रेणी में रखा गया है, जिसका अर्थ है कि आने वाले हफ्तों में कानूनी जांच के माध्यम से उनकी पात्रता निर्धारित की जाएगी।