JNU ने महिला स्टूडेंट्स के यौन उत्पीड़न के आरोपों में दोषी पाए जाने के बाद कांग्रेस सांसद और प्रोफेसर को नौकरी से निकाला

Edited By Updated: 09 Oct, 2026 04:31 PM

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जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) ने छात्राओं के साथ यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों में दोषी पाए जाने के बाद अपने प्रोफेसर और इनर मणिपुर  से कांग्रेस के लोकसभा सांसद, डॉ. अंगोमछ बिमोल अकोइजाम को नौकरी से बर्खास्त कर दिया है। यूनिवर्सिटी की इंटरनल कमेटी...

नई दिल्ली:  जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) ने 9 अक्टूबर को जारी एक आधिकारिक आदेश में, यौन उत्पीड़न के आरोपों की जांच के बाद प्रोफेसर अंगोमचा बिमोल अकोइजम को तत्काल प्रभाव से नौकरी से बर्खास्त कर दिया है।

आदेश में कहा गया है कि यूनिवर्सिटी की इंटरनल कमेटी (IC) ने जांच में मिली जानकारी के आधार पर अकोइजम के खिलाफ कड़ी सजा की सिफारिश की थी। आदेश में कहा गया, "उचित प्रक्रिया का पालन करने, सभी उपलब्ध तथ्यों पर विचार करने और इंटरनल कमेटी (IC) की रिपोर्ट के अनुसार, प्रोफेसर अंगोमचा बिमोल अकोइजम को यूनिवर्सिटी की सेवा से बर्खास्त करने की सजा दी जाती है।"

स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज में 'सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ सोशल सिस्टम्स' से जुड़े इस प्रोफेसर पर JNU की 11 छात्राओं ने यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था। आदेश के अनुसार, इंटरनल कमेटी ने आरोपों की जांच की और यूनिवर्सिटी के सेवा नियमों के तहत कड़ी सजा की सिफारिश की। इसमें UGC रेफरेंस नंबर F.91-1/2013 (TFGS)/10(1) और सेंट्रल सिविल सर्विसेज (क्लासिफिकेशन, कंट्रोल एंड अपील) रूल्स के नियम 11(ix) का हवाला दिया गया।

इसमें कहा गया है कि यूनिवर्सिटी द्वारा कमेटी की रिपोर्ट और उपलब्ध तथ्यों पर विचार करने के बाद बर्खास्तगी का आदेश जारी किया गया। यह घटनाक्रम छात्राओं द्वारा लगाए गए उन आरोपों के बाद हुआ है जिनमें कहा गया था कि यूनिवर्सिटी प्रशासन ने प्रोफेसर के खिलाफ उनकी शिकायत पर उचित कार्रवाई नहीं की थी। उनका दावा था कि यह शिकायत मई 2026 में वाइस-चांसलर को सौंपी गई थी।

16 सितंबर को, दिल्ली महिला आयोग (DCW) ने आरोपों से जुड़े सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो का स्वतः संज्ञान लिया। आयोग ने JNU प्रशासन से तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी थी, जिसमें यह जानकारी भी शामिल थी कि क्या शिकायत को इंटरनल कंप्लेंट्स कमेटी को भेजा गया था और इस मामले में क्या कार्रवाई की गई।DCW ने यूनिवर्सिटी को तीन दिनों के भीतर 'की गई कार्रवाई की रिपोर्ट' (Action Taken Report) सौंपने का निर्देश भी दिया था। आयोग ने जोर दिया कि यौन उत्पीड़न की शिकायतों का निपटारा कानून के अनुसार निष्पक्ष, त्वरित और संवेदनशील तरीके से किया जाना चाहिए। 

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