Edited By Anu Malhotra,Updated: 11 Mar, 2026 03:10 PM

Weather Report: अभी मार्च का महीना आधा भी नहीं बीता है और सूरज के तेवर देख ऐसा लग रहा है मानो हम मई-जून की झुलसाने वाली गर्मी के बीच खड़े हों। दिल्ली, यूपी और पंजाब से लेकर राजस्थान तक पारा अभी से 38 डिग्री सेल्सियस को छू रहा है। विदर्भ और राजस्थान...
Weather Report: अभी मार्च का महीना आधा भी नहीं बीता है और सूरज के तेवर देख ऐसा लग रहा है मानो हम मई-जून की झुलसाने वाली गर्मी के बीच खड़े हों। दिल्ली, यूपी और पंजाब से लेकर राजस्थान तक पारा अभी से 38 डिग्री सेल्सियस को छू रहा है। महाराष्ट्र के विदर्भ इलाके में और राजस्थान में तो लू के थपेड़े अभी से महसूस होने लगे हैं। लेकिन वैज्ञानिकों का कहना है कि यह तो बस एक ट्रेलर है, असली 'पिक्चर' अभी बाकी है। World Meteorological Organization और यूरोपीय मौसम विशेषज्ञों ने एक ऐसी चेतावनी जारी की है जिसने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है।
वर्ल्ड मीटिरियोलॉजिकल आर्ग ने भी ऐसी ही चेतावनी दी है कि इस साल प्रशांत महासागर में एक 'super el nino' विकसित हो रहा है, जिसकी संभावना 60 प्रतिशत तक आंकी गई है। यह वही खौफनाक मौसमी बदलाव है जिसने 1982-83 और 2015-16 में दुनिया को भीषण गर्मी से तपाया था, लेकिन इस बार डर यह है कि 2026 और 2027 अब तक के इतिहास के सबसे गर्म साल बन सकते हैं।
क्या है अल नीनो
आखिर यह अल नीनो है क्या जो पूरी दुनिया के मौसम को अस्त-व्यस्त कर देता है? दरअसल, यह प्रशांत महासागर के पानी का असामान्य रूप से गर्म होना है। जब समुद्र का तापमान औसत से 2 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा बढ़ जाता है, तो पूरी दुनिया के वायुमंडल में हलचल मच जाती है।
वैज्ञानिक डेनियल स्वेन और एंडी हेजल्टन बताते हैं कि इस दौरान समुद्र के भीतर दबी गर्मी बाहर निकलती है और पूरे ग्लोब पर फैल जाती है। इसके कारण जहां एक ओर पश्चिमी अमेरिका जैसे देशों में भीषण गर्मी पड़ेगी, वहीं उष्णकटिबंधीय देशों को भयंकर सूखे का सामना करना पड़ सकता है। इतना ही नहीं, यह समुद्री बर्फ को पिघलाने और प्रशांत महासागर में विनाशकारी चक्रवातों की संख्या बढ़ाने के लिए भी जिम्मेदार है।
सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि इस बार 'super el nino' का सामना बढ़ती हुई। global warming और Green House गैसों से हो रहा है। मौसम विज्ञानी एरिक वेब का मानना है कि जलवायु प्रणाली अब इतनी गर्म हो चुकी है कि वह अल नीनो से निकलने वाली अतिरिक्त ऊष्मा को सोख नहीं पा रही है।
हालांकि यह कहना जल्दबाजी होगी कि क्या 2026 पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ देगा, लेकिन वैज्ञानिकों को पूरा यकीन है कि 2027 दुनिया का अब तक का सबसे गर्म वर्ष साबित होने वाला है। यानी आने वाले महीनों में हमें न केवल रिकॉर्ड तोड़ गर्मी, बल्कि बाढ़ और सूखे जैसे विरोधाभासी मौसम के लिए भी तैयार रहना होगा। यह कुदरत का वह अलार्म है जिसे अनदेखा करना अब मुमकिन नहीं है।