EPFO : 7.5 करोड़ लोगों के लिए बड़ी राहत, PF पर ब्याज दर को लेकर आया अहम फैसला

Edited By Updated: 02 Mar, 2026 06:41 PM

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देश के 7.5 करोड़ से अधिक नौकरीपेशा लोगों के लिए राहत भरी खबर है। हर महीने सैलरी से कटकर भविष्य निधि (PF) खाते में जमा होने वाली रकम पर मिलने वाले रिटर्न की तस्वीर अब साफ हो गई है। Employees' Provident Fund Organisation (EPFO) ने वित्त वर्ष 2025-26...

नेशनल डेस्क : देश के 7.5 करोड़ से अधिक नौकरीपेशा लोगों के लिए राहत भरी खबर है। हर महीने सैलरी से कटकर भविष्य निधि (PF) खाते में जमा होने वाली रकम पर मिलने वाले रिटर्न की तस्वीर अब साफ हो गई है। Employees' Provident Fund Organisation (EPFO) ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए ब्याज दरों का ऐलान कर दिया है। संगठन की सर्वोच्च संस्था Central Board of Trustees (CBT) ने फैसला लिया है कि इस बार भी पीएफ जमा पर 8.25 फीसदी की दर से ही ब्याज दिया जाएगा। यानी कर्मचारियों की जमा पूंजी पर मिलने वाले रिटर्न में कोई कटौती नहीं की गई है।

लगातार दूसरे साल दरें स्थिर

पिछले वित्त वर्ष 2024-25 में भी पीएफ पर 8.25 फीसदी का ही रिटर्न तय किया गया था। इससे पहले 2023-24 में संगठन ने इसमें मामूली बढ़ोतरी करते हुए इसे 8.15 फीसदी से बढ़ाकर 8.25 फीसदी किया था। विशेषज्ञों का मानना है कि ईपीएफओ का यह फैसला इस बात का संकेत है कि संगठन निवेशकों को बिना अतिरिक्त जोखिम के एक स्थिर और सुरक्षित रिटर्न देना चाहता है। अब सीबीटी के प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी के लिए वित्त मंत्रालय के पास भेजा जाएगा। औपचारिक स्वीकृति के बाद यह दर देशभर के सब्सक्राइबर्स के खातों में लागू हो जाएगी।

कब-कितना मिला ब्याज?

पिछले कुछ वर्षों में पीएफ की ब्याज दरों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला है।

  • 2021-22 में ब्याज दर गिरकर 8.10 फीसदी पर आ गई थी, जो 1977-78 के बाद चार दशकों में सबसे निचला स्तर था।
  • 2015-16 में कर्मचारियों को 8.80 फीसदी तक का रिटर्न मिला था।
  • 2019-20 और 2020-21 में यह दर 8.50 फीसदी रही।

इन आंकड़ों से साफ है कि मौजूदा 8.25 फीसदी दर स्थिर और संतुलित मानी जा रही है।

कैसे तय होती है PF की ब्याज दर?

ईपीएफओ कर्मचारियों के जमा धन को विभिन्न निवेश विकल्पों में लगाता है। इनमें सरकारी प्रतिभूतियां, बॉन्ड और सीमित हिस्सेदारी के रूप में शेयर बाजार (इक्विटी) शामिल हैं। पूरे साल के निवेश से हुई कमाई का आकलन कर नई ब्याज दर प्रस्तावित की जाती है। बाजार की मौजूदा परिस्थितियां और निवेश से प्राप्त कुल रिटर्न इस फैसले में अहम भूमिका निभाते हैं। सीबीटी द्वारा दर तय करने के बाद वित्त मंत्रालय की अंतिम मंजूरी जरूरी होती है।

रिटायरमेंट प्लानिंग पर असर

भले ही इस साल ब्याज दर में बढ़ोतरी नहीं हुई, लेकिन 8.25 फीसदी का रिटर्न आज भी कई पारंपरिक बचत योजनाओं, खासकर सामान्य बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट (FD), से बेहतर माना जा रहा है।

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