Edited By Radhika,Updated: 02 Apr, 2026 05:48 PM

कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) के सब्सक्राइबर्स के लिए यह खबर काफी अहम होने वाली है। इन कर्मचारियो के लिए केंद्र सरकार ने आधिकारिक तौर पर स्पष्ट कर दिया है कि PF पर ब्याज दर को बढ़ाकर 10% करने का फिलहाल नहीं किया जाएगा। इस दर को बढ़ाने का कोई प्लान...
नेशनल डेस्क: कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) के सब्सक्राइबर्स के लिए यह खबर काफी अहम होने वाली है। इन कर्मचारियो के लिए केंद्र सरकार ने आधिकारिक तौर पर स्पष्ट कर दिया है कि PF पर ब्याज दर को बढ़ाकर 10% करने का फिलहाल नहीं किया जाएगा। इस दर को बढ़ाने का कोई प्लान नहीं है।
सरकार ने संसद में क्या कहा?
संसद के सत्र के दौरान जब श्रम और रोजगार मंत्रालय से पूछा गया कि क्या भविष्य निधि की ब्याज दरों को 10% तक ले जाने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन है, तो सरकार ने लिखित जवाब में इसे सिरे से खारिज कर दिया। सरकार के अनुसार ब्याज दर बढ़ाने का फिलहाल कोई प्रस्ताव टेबल पर नहीं है। पीएफ की दरें EPFO के सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज द्वारा तय की जाती हैं। यह दरें पूरी तरह से फंड की सालाना कमाई और निवेश से मिलने वाले रिटर्न पर निर्भर करती हैं।
बाजार की तुलना में अब भी बेहतर है EPF
सरकार ने तर्क दिया है कि भले ही यह 10% न हो, लेकिन वर्तमान में मिल रही ब्याज दरें बाजार की अन्य बचत योजनाएं जैसे FD या RD की तुलना में कहीं अधिक प्रतिस्पर्धी और सुरक्षित हैं।
पिछले कुछ वर्षों का ब्याज ट्रैक रिकॉर्ड
EPFO ने पिछले कुछ समय में अपनी दरों को स्थिर रखने की कोशिश की है:
| 2023-24 : 8.25% (तीन साल में सबसे ज्यादा)
| 2022-23 : 8.15%
| 2021-22 : 8.10%
| 2020-21: 8.50%
क्यों हो रही थी 10% की मांग?
बढ़ती महंगाई के बीच कर्मचारी यूनियनों का तर्क था कि पीएफ पर रिटर्न कम से कम Double Digit में होना चाहिए ताकि रिटायरमेंट फंड मजबूत हो सके। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि EPFO को अपनी देनदारियों और निवेश आय के बीच संतुलन बनाना होता है, इसलिए अचानक इतना बड़ा उछाल संभव नहीं है।