EPFO New Form: PF खाताधारकों के लिए नया नियम: इनकम टैक्स बचाने के लिए भरना होगा ये फॉर्म, वरना कट जाएगा मोटा पैसा

Edited By Updated: 17 Apr, 2026 04:50 PM

epfo update new form mandatory to save income tax on pf withdrawals

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (Employees' Provident Fund Organisation) ने पीएफ खाताधारकों के लिए एक अहम बदलाव किया है।

नेशनल डेस्क: कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (Employees' Provident Fund Organisation) ने पीएफ खाताधारकों के लिए एक अहम बदलाव किया है। अब 1 अप्रैल 2026 से पुराने फॉर्म 15G और 15H की जगह नया फॉर्म 121 लागू कर दिया गया है। यह बदलाव खासतौर पर उन लोगों के लिए फायदेमंद माना जा रहा है, जिनकी आय टैक्स के दायरे में नहीं आती और जो टीडीएस (TDS) कटने से बचना चाहते हैं।

क्या है नया बदलाव?
EPFO के निर्देशों के अनुसार अब पीएफ से जुड़ी टैक्स छूट के लिए फॉर्म 15G और 15H की जगह केवल फॉर्म 121 ही मान्य होगा। हालांकि, यदि किसी ने 1 अप्रैल 2026 के बाद भी 15G या 15H जमा किया है, तो उसे तुरंत खारिज नहीं किया जाएगा। लेकिन बाद में नया फॉर्म 121 जमा करना अनिवार्य होगा।


कौन-कौन भर सकेंगे फॉर्म 121
बता दें कि नया फॉर्म 121 हर नौकरीपेशा शख्स के लिए नहीं है। बल्कि सिर्फ भारत में रहने वाले 60 साल से कम उम्र के नौकरीपेशा या इससे ज्यादा उम्र के बिजनेसमैन ही यह फॉर्म भर जाएंगे। HUF यानी हिंदू अविभाजित परिवार और अन्य पात्र लोग ही यह फॉर्म भर जाएंगे। बशर्ते उनकी कुल अनुमानित आय इनकम टैक्स के दायरे में न हो। इसके साथ ही जरूरी शर्त यह है कि आवेदक की कुल अनुमानित आय इनकम टैक्स की सीमा से कम हो।


फॉर्म 121 को कौन नहीं भर सकते
बता दें कि EPFO का फॉर्म 121 कंपनियों और फर्म NRI (गैर-निवासी) नहीं भर पाएंगे। आसान भाषा में कहें तो फॉर्म 121 सेल्फ-डिक्लेरेशन (स्व-घोषणा) फॉर्म है, जिसमें बताया जाता है कि कुल इनकम टैक्स लिमिट से कम है।


क्या है फॉर्म 121 की खासियत?
नए फॉर्म को पहले से अधिक आसान और उपयोगकर्ता के अनुकूल बनाया गया है। हर फॉर्म के साथ एक यूनिक आईडी नंबर (UIN) दिया जाएगा, जिसमें सीरियल नंबर, टैक्स वर्ष और TAN जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां शामिल होंगी। इससे रिकॉर्ड रखना और ट्रैक करना भी आसान होगा।


क्यों है यह बदलाव महत्वपूर्ण?
यह नया सिस्टम प्रक्रिया को सरल बनाने और पारदर्शिता बढ़ाने के उद्देश्य से लाया गया है। इससे टैक्स से जुड़े मामलों में भ्रम कम होगा और योग्य लोगों को बिना परेशानी के राहत मिल सकेगी।

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