Edited By Mehak,Updated: 22 Feb, 2026 07:15 PM

बार-बार बेहोश होना हमेशा सिर्फ लो ब्लड प्रेशर (Low BP) की वजह से नहीं होता। अचानक बेहोशी के पीछे दिल, न्यूरोलॉजिकल समस्या, स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन, ब्लड शुगर में कमी या हार्मोनल गड़बड़ी जैसी कई कारण हो सकते हैं। अगर बेहोशी बार-बार हो, बिना चेतावनी आए,...
नेशनल डेस्क : आजकल अक्सर लोगों को अचानक बेहोशी (Fainting) का सामना करना पड़ता है, लेकिन इसे लोग अक्सर हल्के में लेते हैं। फिल्मों या टीवी में जैसे बेहोशी दिखाई जाती है, रियल लाइफ में वह उतनी नाटकीय नहीं होती। कभी-कभी नाश्ता छोड़ना, पानी कम पीना या ज्यादा गर्मी में रहने से चक्कर आना सामान्य हो सकता है। लेकिन अगर बार-बार बेहोशी हो रही हो, तो यह शरीर की चेतावनी हो सकती है और इसके पीछे गंभीर कारण छिपा हो सकता है।
बेहोशी क्या है और शरीर पर इसका असर
डॉक्टर बेहोशी को सिन्कोपी (Syncope) कहते हैं। यह तब होता है जब दिमाग तक पर्याप्त मात्रा में खून नहीं पहुंच पाता। अचानक खड़े होना, तनाव, गर्मी या डिहाइड्रेशन इसके सामान्य कारण हो सकते हैं। 70 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में यह समस्या अधिक देखी जाती है। बार-बार बिना किसी स्पष्ट वजह के बेहोश होना सामान्य नहीं माना जाता और इसका कारण ढूंढना जरूरी है।
दिल से जुड़ी वजहें
कभी-कभी बेहोशी का संबंध दिल (Heart) से भी होता है। यदि दिल पर्याप्त खून पंप नहीं कर पा रहा, तो दिमाग तक ऑक्सीजन नहीं पहुंचती और व्यक्ति अचानक बेहोश हो सकता है। दिल से जुड़ी बेहोशी अक्सर बिना चेतावनी के होती है। अगर बेहोशी के साथ सीने में दर्द, सांस फूलना या दिल की धड़कन तेज होना जैसे लक्षण दिखाई दें, तो इसे नजरअंदाज न करें। यह आपात स्थिति हो सकती है।
अन्य कारण
बेहोशी का कारण केवल दिल नहीं होता। इसके पीछे न्यूरोलॉजिकल समस्याएं, स्ट्रोक, ऑर्थोस्टेटिक हाइपोटेंशन, गंभीर एनीमिया, ब्लड शुगर में कमी और हार्मोन संबंधी गड़बड़ियां भी जिम्मेदार हो सकती हैं। अच्छी खबर यह है कि कई मामलों में लाइफस्टाइल बदलाव बेहोशी की घटनाओं को कम कर सकते हैं। पर्याप्त पानी पीना, लंबे समय तक खड़े न रहना, भीड़ से बचना और संतुलित आहार लेना मददगार होता है।
कब डॉक्टर से संपर्क करें
अगर बेहोशी एक से ज्यादा बार हो, एक मिनट से अधिक समय तक होश न आए, बिना चेतावनी अचानक बेहोशी हो जाए या होश आने पर भ्रम की स्थिति हो, तो तुरंत डॉक्टर से मिलें। परिवार में दिल की बीमारी का इतिहास होने पर विशेष सतर्कता जरूरी है। डॉक्टर खून की जांच, हार्ट मॉनिटरिंग या नर्वस सिस्टम की जांच करके सही कारण पता कर सकते हैं। अगर वजह दिल से जुड़ी हो, तो कुछ मामलों में पेसमेकर की आवश्यकता भी पड़ सकती है।