Sleep Disorder: अगर रात में बार-बार टूटती है आपकी नींद, तो शरीर में हो सकती है ये गंभीर बीमारियां

Edited By Updated: 19 Feb, 2026 05:18 PM

if your sleep is repeatedly interrupted at night then these serious diseases

आजकल बड़ी संख्या में लोग रात में ठीक से नींद न आने की समस्या से जूझ रहे हैं। कई लोगों को सोने में देर लगती है, तो कुछ की नींद बार-बार खुल जाती है। कई बार सुबह बहुत जल्दी आंख खुल जाती है और दोबारा नींद नहीं आती।

नेशनल डेस्क: आजकल बड़ी संख्या में लोग रात में ठीक से नींद न आने की समस्या से जूझ रहे हैं। कई लोगों को सोने में देर लगती है, तो कुछ की नींद बार-बार खुल जाती है। कई बार सुबह बहुत जल्दी आंख खुल जाती है और दोबारा नींद नहीं आती। पूरी रात बिस्तर पर रहने के बाद भी सुबह थकान महसूस होना अनिद्रा यानी इंसोम्निया का संकेत हो सकता है। यह समस्या धीरे-धीरे शरीर की ऊर्जा को कम कर देती है, मूड में बदलाव लाती है और कामकाज की क्षमता के साथ जीवन की गुणवत्ता को भी प्रभावित करती है।

कितनी नींद है जरूरी?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार हर व्यक्ति की नींद की जरूरत अलग हो सकती है, लेकिन आमतौर पर वयस्कों के लिए रोजाना 7 से 9 घंटे की नींद पर्याप्त मानी जाती है। जीवन में कभी न कभी ज्यादातर लोगों को कुछ दिनों या हफ्तों के लिए नींद की परेशानी होती है। यह अक्सर तनाव, चिंता या किसी भावनात्मक घटना के कारण होती है। अगर यही समस्या तीन महीने या उससे अधिक समय तक बनी रहे, तो इसे क्रॉनिक अनिद्रा कहा जाता है। कई बार यह खुद एक बीमारी होती है, तो कभी किसी अन्य शारीरिक समस्या या दवाओं के प्रभाव से जुड़ी होती है।


किन कारणों से बढ़ती है परेशानी?
मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं जैसे एंग्जायटी और डिप्रेशन अनिद्रा को बढ़ा सकती हैं। इसके अलावा लंबे समय तक रहने वाला दर्द, अस्थमा, थायरॉयड, एसिडिटी, स्लीप एपनिया या रेस्टलेस लेग्स सिंड्रोम जैसी स्थितियां भी नींद में बाधा डालती हैं। बढ़ती उम्र के साथ नींद स्वाभाविक रूप से हल्की हो जाती है। कई बार ज्यादा दवाइयों का सेवन भी इस समस्या को बढ़ा देता है। बच्चों और किशोरों में देर रात तक जागने की आदत या शरीर की जैविक घड़ी में बदलाव के कारण भी नींद देर से आती है।


दिन में भी दिखते हैं लक्षण
अनिद्रा का असर सिर्फ रात तक सीमित नहीं रहता। दिन के समय थकान, चिड़चिड़ापन, उदासी या घबराहट महसूस होना इसके आम लक्षण हैं। ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई, काम में बार-बार गलती होना या छोटी-छोटी बातों पर अधिक चिंता करना भी संकेत हो सकते हैं कि नींद पूरी नहीं हो रही।


कब लें डॉक्टर की सलाह?
अगर नींद की कमी आपके रोजमर्रा के काम, रिश्तों या मानसिक स्थिति को प्रभावित करने लगे, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। विशेषज्ञ पहले समस्या के कारण को समझते हैं और उसी के अनुसार इलाज की योजना बनाते हैं। जरूरत पड़ने पर स्लीप टेस्ट भी कराया जा सकता है, जिससे समस्या की जड़ तक पहुंचा जा सके।

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