Edited By Anu Malhotra,Updated: 15 Oct, 2025 12:29 PM

ग्लोबल मार्केट में सुरक्षित निवेश की ओर लौटाव के बीच सोना अपनी झोली भर रहा है। अमेरिका व चीन के बीच बढ़ते विवादों और 2025 के अंत तक फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती की संभावनाओं ने सोने को कारोबार की ऊँचाइयों पर पहुंचा दिया है। रिपोर्ट्स के...
नेशनल डेस्क: अमेरिका व चीन के बीच बढ़ते विवादों और 2025 के अंत तक फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती की संभावनाओं ने सोने को कारोबार की ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सोने की कीमत इस समय लगभग 4,185 डॉलर प्रति औंस के नए रिकॉर्ड स्तर पर है।
चांदी ने भी तोड़ी अपनी पुरानी कील
सोने की ही तरह चांदी (Silver) ने भी जोरदार वृद्धि दिखाई है। हाजिर चांदी की कीमत 53.54 डॉलर प्रति औंस से ऊपर जाकर ऑल टाइम हाई स्तर पर पहुंच चुकी है।
क्या कारण है इस रिकॉर्ड रैली के पीछे?
राष्ट्रों की केंद्रीय बैंकों की खरीद
पिछले कुछ वर्षों में, कई देश अपनी रिजर्व्स को विविधता देने के लिए भारी मात्रा में सोना खरीद रहे हैं। यह ब्लॉकबस्टर इन्वेस्टमेंट मांग को और तीव्र करता है।
डॉलर की कमजोरी
इस वर्ष डॉलर इंडेक्स में बड़ी गिरावट आई है। क्योंकि सोना डॉलर में कीमत निर्धारित होता है, डॉलर कमजोर होने से अन्य मुद्राओं में इसे खरीदना सस्ता होता है, जिससे उसकी मांग बढ़ती है।
दर कटौती की उम्मीदें
यदि फेडरल रिजर्व ने इस वर्ष ब्याज दरों में कटौती की दिशा ली, तो गैर-ब्याज देने वाली संपत्ति जैसे सोना और भी आकर्षक बन जाएगा।
भू‑राजनीतिक तनाव और वैश्विक अनिश्चितताएं
अमेरिका–चीन वाणिज्यिक झड़प, व्यापार नीतियों की उलटफेर, और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताएं निवेशकों को सुरक्षित परिसंपत्तियों — जैसे सोना — की ओर धकेलती हैं।
ETF और निवेश प्रवाह
निवेशकों और एसेट मैनेजर्स की तरफ सोने में भारी प्रवाह देखा जा रहा है, जो गति को और ईंधन दे रहा है।
भारत में सोने की क़ीमतें— आम आदमी की पहुंच से बाहर?
भारत में यह तेजी और अधिक महसूस की जा रही है। पिछले दस महीनों में सोने की कीमत लगभग 51% तक बढ़ी है। 10 ग्राम सोना अब लगभग ₹1,30,000 पार कर चुका है। भारत में केंद्रीय बैंकों की खरीद का योगदान इस उछाल में अहम भूमिका निभा रहा है। हाल ही में आई रिपोर्ट के अनुसार, मई 2025 तक सरकारी खजाने में लगभग 36,344 टन सोना जमा था।