Why Gold Price Fell: जंग के बीच सस्ता क्यों हो रहा है सोना और कब तक रहेगा ऐसा? जानें क्या है ग्लोबल कनेक्शन

Edited By Updated: 28 Mar, 2026 12:55 PM

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Why Gold price fell: दुनियाभर में जब भी युद्ध, आर्थिक मंदी या महामारी जैसी आपदाएं आती हैं, तो निवेशक सबसे पहले सोने की शरण में जाते हैं। इसे 'सेफ हेवन' यानी सबसे सुरक्षित निवेश माना जाता है। लेकिन इस बार पश्चिम एशिया (वेस्ट एशिया) में जारी भारी तनाव...

Why Gold price fell: दुनियाभर में जब भी युद्ध, आर्थिक मंदी या महामारी जैसी आपदाएं आती हैं, तो निवेशक सबसे पहले सोने की शरण में जाते हैं। इसे 'सेफ हेवन' यानी सबसे सुरक्षित निवेश माना जाता है। लेकिन इस बार पश्चिम एशिया (वेस्ट एशिया) में जारी भारी तनाव के बीच एक बेहद अजीब नजारा देखने को मिल रहा है। एक तरफ जहां कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं, वहीं सोने के दाम लगातार गिर रहे हैं। भारत में भी 24 कैरेट सोना अपने रिकॉर्ड स्तर से काफी नीचे आ चुका है, जिससे आम आदमी और निवेशक दोनों हैरान हैं।

 ये है बड़ी वजह
आमतौर पर इतिहास गवाह रहा है कि 2008 की मंदी हो या कोरोना काल, निवेशकों ने शेयर बाजार से पैसा निकालकर सोने में लगाया था। मगर इस बार कहानी उलट है। इसकी सबसे बड़ी वजह ब्याज दरें और सरकारी बॉन्ड हैं। सोना खुद कोई ब्याज नहीं देता, जबकि इस समय वैश्विक केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को ऊंचा रख रहे हैं। ऐसे में निवेशकों को सरकारी बॉन्ड में निवेश करना ज्यादा फायदेमंद लग रहा है क्योंकि वहां उन्हें निश्चित रिटर्न मिल रहा है। इसी वजह से लोग सोने से अपना पैसा निकालकर बॉन्ड मार्केट की ओर डाइवर्ट कर रहे हैं।

'प्रॉफिट बुकिंग' कर रहे हैं लोग
एक और महत्वपूर्ण कारण अमेरिकी डॉलर की मजबूती है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने का व्यापार डॉलर में होता है। तेल की कीमतें बढ़ने के कारण देशों को भुगतान के लिए ज्यादा डॉलर की जरूरत पड़ रही है, जिससे डॉलर की मांग बढ़ गई है और वह मजबूत हो गया है। जब डॉलर मजबूत होता है, तो सोना खरीदना महंगा हो जाता है, जिससे इसकी मांग में कमी आती है और कीमतें गिर जाती हैं। साथ ही, जिन निवेशकों ने पिछले कुछ सालों में सोने से अच्छा मुनाफा कमाया था, वे अब गिरते बाजार को देखकर अपनी 'प्रॉफिट बुकिंग' कर रहे हैं, यानी सोना बेचकर नकदी हाथ में ले रहे हैं।

भारत के नजरिए से देखें तो यहां सोने की मांग आभूषण और निवेश दोनों रूपों में रहती है। हालांकि ऊंचे दामों की वजह से गहनों की बिक्री पर थोड़ा असर पड़ा है, लेकिन गोल्ड ETF जैसे डिजिटल निवेश में अभी भी लोगों की दिलचस्पी बनी हुई है।

कब तक गिरेंगी सोने की कीमतें
जानकारों का मानना है कि सोने की कीमतों का भविष्य काफी हद तक पश्चिम एशिया के हालात और कच्चे तेल की सप्लाई पर टिका है। अगर भविष्य में तेल की कीमतें स्थिर होती हैं और महंगाई का डर कम होता है, तो सोना एक बार फिर अपनी पुरानी चमक वापस पा सकता है। फिलहाल, विशेषज्ञों की सलाह है कि निवेशकों को घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि सोना लंबी अवधि में हमेशा एक मजबूत एसेट साबित हुआ है।

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