Pakistan: सिंध में 3 हिंदू बेटियों काअपहरण कर जबरन निकाह कराया, कोर्ट में चला ‘स्वेच्छा’ का नाटक (Video)

Edited By Updated: 17 Jul, 2025 11:37 AM

hindus stage protest over conversion of minor girls in sindh

पाकिस्तान में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय एक बार फिर जबरन धर्मांतरण और अपहरण की घटनाओं से सदमे में है। दक्षिणी सिंध प्रांत के हैदराबाद शहर में हिंदू परिवारों ने खुलकर विरोध-प्रदर्शन ...

Peshawar: पाकिस्तान में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय एक बार फिर जबरन धर्मांतरण और अपहरण की घटनाओं से सदमे में है। दक्षिणी सिंध प्रांत के हैदराबाद शहर में हिंदू परिवारों ने खुलकर विरोध-प्रदर्शन किया है। आरोप है कि तीन नाबालिग हिंदू लड़कियों को अगवा कर उनका जबरन इस्लाम में धर्मांतरण कराया गया और मुस्लिम युवकों से निकाह करवा दिया गया।

 

पुलिस में दर्ज शिकायत के मुताबिक, 13 जुलाई को सिंध के संघार जिले से इन तीन नाबालिग लड़कियों का अपहरण किया गया। इसके बाद परिजनों ने हैदराबाद में प्रदर्शन कर कार्रवाई की मांग की। दबाव बढ़ने पर पुलिस ने सोमवार रात प्राथमिकी दर्ज की।लेकिन चौंकाने वाली बात यह रही कि बुधवार को तीनों लड़कियां सिंध हाईकोर्ट की हैदराबाद पीठ में अपने कथित पतियों के साथ पेश हुईं और जबरन धर्मांतरण से साफ इनकार कर दिया।

 

उन्होंने कोर्ट में दावा किया कि उन्होंने ‘स्वेच्छा से’ धर्म बदला और निकाह किया है जबकि परिजनों का आरोप है कि उन्हें डराया-धमकाया गया है।सिंध मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष इकबाल अहमद ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को पत्र लिखकर मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने कहा, ‘‘अगर ये लड़कियां नाबालिग साबित होती हैं तो सिंध बाल विवाह निरोधक अधिनियम, 2013 के तहत ये निकाह अवैध होंगे।’’
 

हिंदू समुदाय के कल्याण के लिए बने संगठन के प्रमुख  शिवा काछी ने कहा कि सिंध में हिंदू नाबालिग बेटियों का अपहरण कर जबरन धर्म परिवर्तन करवाना अब एक सुनियोजित समस्या बन चुकी है। हर साल सैकड़ों परिवार ऐसे मामलों को लेकर सड़कों पर उतरते हैं, लेकिन पाकिस्तान सरकार और प्रशासन आंख मूंदे बैठे हैं ।दुनियाभर में अल्पसंख्यकों के अधिकारों की बात करने वाला पाकिस्तान अपने ही देश में हिंदू, सिख और ईसाई बेटियों को सुरक्षित नहीं रख पा रहा। धर्मांतरण और बाल विवाह के खिलाफ बने कानून कागजों तक सीमित हैं। परिजन और पीड़ित परिवार अक्सर डर के माहौल में खामोश रहने को मजबूर होते हैं  और कोर्ट में जबरन ‘स्वेच्छा’ का खेल खेला जाता है।
 

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