Pakistan में गूंजेगी संस्कृत की गूंज! अब कक्षाओं में पढ़ाई जाएगी भगवद् गीता और महाभारत

Edited By Updated: 14 Dec, 2025 01:26 PM

bhagavad gita and mahabharata will be taught to children in pakistan

पाकिस्तान के लिए यह एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक और शैक्षणिक कदम है। पाकिस्तान की प्रतिष्ठित लाहौर यूनिवर्सिटी ऑफ मैनेजमेंट साइंसेज (LUMS) ने अब अपने क्लासरूम में संस्कृत भाषा को शामिल कर लिया है। यूनिवर्सिटी ने क्लासिकल लैंग्वेज कोर्स के तहत संस्कृत को...

इंटरनेशनल डेस्क। पाकिस्तान के लिए यह एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक और शैक्षणिक कदम है। पाकिस्तान की प्रतिष्ठित लाहौर यूनिवर्सिटी ऑफ मैनेजमेंट साइंसेज (LUMS) ने अब अपने क्लासरूम में संस्कृत भाषा को शामिल कर लिया है। यूनिवर्सिटी ने क्लासिकल लैंग्वेज कोर्स के तहत संस्कृत को नियमित पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया है। इस कोर्स में छात्रों को न सिर्फ भाषा सिखाई जाएगी बल्कि भगवद् गीता और महाभारत जैसे भारतीय क्लासिक्स को भी पढ़ाया जाएगा।

वर्कशॉप की सफलता के बाद नियमित कोर्स

LUMS में चार-क्रेडिट का यह क्लासिकल भाषा कोर्स शुरू करने का निर्णय, तीन महीने तक चली एक सफल वीकेंड वर्कशॉप के बाद लिया गया। इस कार्यशाला में छात्रों, शोधकर्ताओं और भाषा में रुचि रखने वाले लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और संस्कृत के प्रति काफी रुचि दिखाई। इसी को देखते हुए, विश्वविद्यालय प्रशासन ने इसे नियमित पाठ्यक्रम के रूप में पढ़ाने का फैसला किया।

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'है कथा संग्राम की' का उर्दू वर्जन

इस कोर्स के हिस्से के तौर पर छात्रों को प्रसिद्ध भारतीय टेलीविजन सीरीज़ महाभारत का मशहूर थीम गीत "है कथा संग्राम की" का उर्दू वर्जन भी सिखाया जा रहा है जो छात्रों के बीच भाषा और संस्कृति के प्रति जुड़ाव पैदा करने में मदद करेगा।

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'संस्कृत हमारी भी धरोहर है': यूनिवर्सिटी प्रशासन

LUMS के गुरमानी केंद्र के निदेशक डॉ. अली उस्मान कास्मी ने इस पहल पर बात करते हुए कहा कि पाकिस्तान में संस्कृत की अपनी एक धरोहर मौजूद है। उन्होंने बताया कि पंजाब विश्वविद्यालय के पुस्तकालय में संस्कृत की पांडुलिपियों (Manuscripts) का एक बड़ा संग्रह है जिस पर अभी तक सही से ध्यान नहीं दिया गया है। डॉ. कासमी ने कहा कि इन पांडुलिपियों का उपयोग ज्यादातर विदेशी शोधकर्ता ही करते रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि यूनिवर्सिटी का उद्देश्य महाभारत और भगवद गीता पर आने वाले कोर्स को भी बढ़ाना है। डॉ. कासमी ने उम्मीद जताई, "आने वाले 10-15 वर्षों में हम पाकिस्तान में ही रहने वाले गीता और महाभारत के स्कॉलर्स (विद्वानों) को देख सकेंगे।"

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संस्कृत किसी धर्म से बंधी नहीं

डॉ. रशीद नामक एक विद्वान ने कहा कि लोग अक्सर उनसे संस्कृत पढ़ने के उनके फैसले पर सवाल उठाते हैं। इस पर उनका जवाब होता है। "हमें इसे क्यों नहीं सीखना चाहिए? यह पूरे इलाके को जोड़ने वाली भाषा है। संस्कृत के महान व्याकरण विशेषज्ञ पाणिनी का गांव भी इसी इलाके में था। सिंधु घाटी सभ्यता के दौरान यहां बहुत कुछ लिखा गया था। हमें इसे अपनाना चाहिए। यह हमारी भी है, यह किसी एक खास धर्म से बंधी नहीं है।" यह कदम पाकिस्तान के शैक्षणिक संस्थानों में सांस्कृतिक और भाषाई विविधता को बढ़ावा देने और उपमहाद्वीप के साझा इतिहास को समझने की दिशा में एक महत्वपूर्ण शुरुआत है।

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