Edited By Radhika,Updated: 02 Feb, 2026 12:31 PM

भारत को दुनिया का 'इलेक्ट्रॉनिक्स हब' बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय बजट 2026 में वित्त मंत्री ने इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम के लिए दी राशि को लगभग दोगुना कर दिया है। अब यह बजट 23,000 करोड़ रुपये...
नेशनल डेस्क : भारत को दुनिया का 'इलेक्ट्रॉनिक्स हब' बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय बजट 2026 में वित्त मंत्री ने इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम के लिए दी राशि को लगभग दोगुना कर दिया है। अब यह बजट 23,000 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 40,000 करोड़ रुपये कर दिया गया है। इस कदम का सीधा उद्देश्य विदेशों, खासकर चीन पर निर्भरता कम करना और भारत में ही उच्च गुणवत्ता वाले इलेक्ट्रॉनिक पुर्जों का निर्माण करना है।

विदेशी कंपनियों के लिए खुले रास्ते, सस्ता होगा सामान?
इस भारी-भरकम बजट से न केवल भारतीय कंपनियां मजबूत होंगी, बल्कि Samsung, Foxconn और Tata Electronics जैसी बड़ी कंपनियां भी भारत में अपनी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स का विस्तार करेंगी।
- उपभोक्ता को फायदा: अगर स्मार्टफोन, लैपटॉप, एसी और फ्रिज में लगने वाले कंपोनेंट्स भारत में ही सस्ते दाम पर बनेंगे, तो आने वाले समय में इन इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स की कीमतों में गिरावट आ सकती है।
- नौकरी के मौके: सरकार का अनुमान है कि इस स्कीम से लगभग 51,000 लोगों को सीधे रोजगार मिलेगा।

क्या-क्या बनेगा अब भारत में?
सरकार ने उन पुर्जों की लिस्ट तैयार की है जिनके उत्पादन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इनमें शामिल हैं:
- डिस्प्ले और कैमरा मॉड्यूल: फोन की स्क्रीन और कैमरा के पार्ट्स।
- सर्किट बोर्ड (PCBA): किसी भी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस का मुख्य बोर्ड।
- लिथियम सेल और एनक्लोजर: बैटरी और उसके बाहरी कवर।
- पैसिव कंपोनेंट्स: रेजिस्टर, कैपेसिटर और फेराइट्स जैसे छोटे लेकिन जरूरी पार्ट्स।
PLI से कितनी अलग है यह स्कीम?
अक्सर लोग इसे PLI (Production Linked Incentive) स्कीम समझ लेते हैं, लेकिन यह उससे अलग है। PLI में छूट केवल Production पर मिलती है, जबकि ECMS में इंसेंटिव तीन मुख्य बातों पर निर्भर करते हैं:
- रोजगार सृजन: आप कितने लोगों को नौकरी दे रहे हैं।
- कैपेक्स (Capex): कंपनी मशीनरी और इंफ्रास्ट्रक्चर पर कितना निवेश कर रही है।
- उत्पादन: सालाना कितना माल तैयार हो रहा है।

खास बात
वर्तमान में Apple और Samsung जैसी कंपनियों के भारत में होने के बावजूद, पार्ट्स का केवल 15-20% हिस्सा ही भारत में बनता है। सरकार इस 'वैल्यू एडिशन' को बढ़ाकर 30-40% तक ले जाना चाहती है।