Edited By Anu Malhotra,Updated: 15 Oct, 2026 02:17 PM
अभिनेता इमरान खान को 10 अक्टूबर को मुंबई में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेंद्र कुमार के खिलाफ हुए एक विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लेने के बाद, 28 अक्टूबर तक भारत छोड़ने के लिए कहा गया है। इस नोटिस में 'इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट, 2025' (प्रवास और विदेशी...
नई दिल्ली: अभिनेता इमरान खान को 10 अक्टूबर को मुंबई में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेंद्र कुमार के खिलाफ हुए एक विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लेने के बाद, 28 अक्टूबर तक भारत छोड़ने के लिए कहा गया है। इस नोटिस में 'इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट, 2025' (प्रवास और विदेशी अधिनियम) की धारा 7 और 29 का हवाला दिया गया है। इससे विदेशी नागरिकों पर सरकार की शक्तियों और 'ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया' (OCI) कार्डधारकों के अधिकारों को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।
इस अभिनेता के पास अमेरिकी नागरिकता और OCI कार्ड है। विरोध प्रदर्शन के दौरान उन्हें हिरासत में लिया गया था। यह कार्रवाई भाजपा नेता किरीट सोमैया की शिकायत के बाद की गई है, जिन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन में शामिल होकर खान ने कानून का उल्लंघन किया है। सोमैया ने पत्रकारों से कहा, "भारत में ऐसे हजारों इमरान खान हैं। वे यहां रहना चाहते हैं और देश को बदनाम करना चाहते हैं। ऐसे सभी लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए और उन्हें देश से बाहर निकाल दिया जाना चाहिए।"
'इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट' की धारा 7 और 29 का अर्थ
धारा 7 केंद्र सरकार को यह अधिकार देती है कि वह भारत में विदेशी नागरिकों के प्रवेश, प्रस्थान या यहां रहने को नियंत्रित कर सके या उस पर रोक लगा सके। यह सरकार को देश में उनके रहने और आवाजाही पर शर्तें लगाने की भी अनुमति देती है। धारा 29 विदेशी नागरिकों को भारत से बाहर निकालने से संबंधित है। यह अधिनियम के दायरे में आने वाली स्थितियों में किसी विदेशी को देश से बाहर निकालने का प्रावधान करती है। इसमें अधिनियम के नियमों या आदेशों का उल्लंघन करना, और सुरक्षा से जुड़ी कोई प्रतिकूल रिपोर्ट आना जैसे मामले शामिल हैं।
इमरान खान के मामले में, 10 अक्टूबर के विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के कारण उन्हें 28 अक्टूबर तक भारत छोड़ने का निर्देश दिया गया है। केवल इस नोटिस और उन पर लगे आरोपों से यह साबित नहीं होता कि उन्होंने कोई अपराध किया है। पुलिस के एक अधिकारी ने कहा, "इमरान खान के पास विदेशी नागरिकता है और वे भारतीय नागरिक नहीं हैं। 'फॉरेनर्स/इमिग्रेशन एक्ट' के संबंधित प्रावधानों के तहत, विदेशी नागरिकों को भारतीय धरती पर राजनीतिक विरोध प्रदर्शनों या राजनीतिक गतिविधियों में हिस्सा लेने की मनाही है।"
OCI कार्ड क्या है और यह क्या अधिकार देता है?
'ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया' (OCI) कार्ड भारतीय मूल के उन पात्र लोगों को दिया जाता है, जिनके पास विदेशी नागरिकता है। नाम के बावजूद, OCI कार्ड से भारतीय नागरिकता नहीं मिलती है। यह कुछ विशेष सुविधाएं देता है, जिसमें भारत के लिए जीवन भर का 'मल्टीपल-एंट्री' (कई बार आने-जाने वाला) वीज़ा शामिल है, जो लागू नियमों के अधीन है।
OCI कार्ड धारक भारत के चुनावों में वोट नहीं डाल सकते और न ही संसद या राज्य विधानसभाओं के चुनाव लड़ सकते हैं। उन पर विदेशी नागरिकों और आव्रजन (इमिग्रेशन) से जुड़े भारतीय कानून लागू होते हैं। OCI का दर्जा उन्हें भारत में रहने का बिना शर्त अधिकार नहीं देता है।
भारत के सुप्रीम कोर्ट के वकील अमितराज कौशल ने बताया कि OCI कार्ड कुछ विशेष सुविधाएं तो देता है, लेकिन यह अपने धारक को वे संवैधानिक और राजनीतिक अधिकार नहीं देता जो एक भारतीय नागरिक को मिलते हैं।
कौशल ने कहा, "OCI कार्ड को नागरिकता के बजाय भारत के साथ एक दीर्घकालिक संबंध के रूप में समझना बेहतर है। यह जीवन भर के लिए 'मल्टीपल-एंट्री' वीज़ा देता है और यात्रा, काम तथा संपत्ति के मामलों में NRI (अनिवासी भारतीयों) के बराबर दर्जा देता है। लेकिन 'नागरिकता अधिनियम 1955' के तहत, वोट देने और चुनाव लड़ने जैसे राजनीतिक अधिकार OCI धारकों को नहीं मिलते हैं।"
क्या OCI कार्ड धारक भारत में विरोध प्रदर्शन कर सकते हैं?
वकील ने आगे कहा कि कानून में OCI कार्ड धारकों को शांतिपूर्ण सभाओं में हिस्सा लेने से स्पष्ट रूप से नहीं रोका गया है। हालांकि, अनुच्छेद 19 के तहत शांतिपूर्ण तरीके से इकट्ठा होने का संवैधानिक अधिकार केवल भारतीय नागरिकों को प्राप्त है, और OCI कार्ड धारक उसी आधार पर इस अधिकार का दावा नहीं कर सकते।
उन्होंने कहा, "विरोध प्रदर्शनों के मामले में कानून सख्त होने के बजाय मौन है। इस अधिनियम में ऐसा कुछ भी नहीं है जो OCI धारक को किसी शांतिपूर्ण सभा में शामिल होने से स्पष्ट रूप से रोकता हो। हालांकि, अनुच्छेद 19 के तहत इकट्ठा होने की आज़ादी नागरिकों का अधिकार है। एक OCI धारक इसका इस्तेमाल उस तरह नहीं कर सकता, जैसे एक नागरिक कर सकता है। अनुच्छेद 14 और 21 हर व्यक्ति पर लागू होते हैं।"
अनुच्छेद 14 कानून के समक्ष समानता की गारंटी देता है, जबकि अनुच्छेद 21 जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा करता है। ये दोनों प्रावधान हर व्यक्ति पर लागू होते हैं, जिनमें विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। कौशल ने कहा कि OCI कार्ड धारकों के लिए सबसे बड़ा कानूनी जोखिम यह है कि यदि वे भारतीय कानून का उल्लंघन करते हैं, तो उन्हें आव्रजन (इमिग्रेशन) से जुड़े गंभीर परिणामों का सामना करना पड़ सकता है।
उन्होंने कहा, "असली जोखिम इमिग्रेशन (आप्रवासन) के मोर्चे पर है। धारा 7D के तहत, अगर कार्ड धारक भारतीय कानून तोड़ता है, जनहित के खिलाफ काम करता है या देश की सुरक्षा के लिए खतरा बनता है, तो उसका कार्ड रद्द किया जा सकता है। ऐसा केवल सुनवाई के बाद ही हो सकता है। इसके अलावा, 'फॉरेनर्स एक्ट' (विदेशी अधिनियम) के तहत केंद्र सरकार के पास व्यापक अधिकार हैं, जिनका इस्तेमाल करके वह किसी विदेशी नागरिक को भारत छोड़ने के लिए कह सकती है।" नागरिकता अधिनियम, 1955 की धारा 7D, कुछ तय आधारों पर OCI रजिस्ट्रेशन रद्द करने से संबंधित है। यह उन अधिकारों से अलग है जो सरकार को इमिग्रेशन और विदेशी कानूनों के तहत भारत में किसी विदेशी नागरिक के प्रवास को नियंत्रित करने के लिए मिले हुए हैं।