Edited By Pardeep,Updated: 23 Jul, 2026 10:18 PM

राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर इन दिनों भारी विरोध प्रदर्शन का दौर जारी है। छात्रों की मांगों और 'कॉकरोच जनता पार्टी' के विरोध में शुरू हुआ यह आंदोलन अब देश के विभिन्न हिस्सों जैसे पटना, मुंबई, बेंगलुरु और कोलकाता तक फैल चुका है। 20 जुलाई को आयोजित...
नेशनल डेस्कः राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर इन दिनों भारी विरोध प्रदर्शन का दौर जारी है। छात्रों की मांगों और 'कॉकरोच जनता पार्टी' के विरोध में शुरू हुआ यह आंदोलन अब देश के विभिन्न हिस्सों जैसे पटना, मुंबई, बेंगलुरु और कोलकाता तक फैल चुका है। 20 जुलाई को आयोजित 'चलो संसद' मार्च के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई हिंसक झड़प ने माहौल को और तनावपूर्ण बना दिया है, जिसमें कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं।
इन सबके बीच दिल्ली में छात्रों और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन के बाद एक बार फिर यह सवाल उठने लगा है कि दुनिया के अलग-अलग देशों में विरोध प्रदर्शन को लेकर क्या नियम हैं। कई देशों में शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति है, जबकि कुछ देशों में सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करने पर कड़ी कार्रवाई की जाती है।
दुनिया के इन देशों में है मौत की सजा का खौफ
स्रोतों के अनुसार, दुनिया के कई ऐसे देश हैं जहां सरकार के खिलाफ आवाज उठाना जानलेवा साबित हो सकता है:
- उत्तर कोरिया: यहां सरकार विरोधी गतिविधि में शामिल होने पर सीधे मौत की सजा या आजीवन कठोर कारावास का प्रावधान है।
- चीन: यहां कम्युनिस्ट पार्टी की अनुमति के बिना सड़कों पर उतरना देशद्रोह माना जाता है, जिसके लिए लंबी जेल की सजा काटनी पड़ती है।
- ईरान और सऊदी अरब: इन खाड़ी देशों में सार्वजनिक प्रदर्शनों पर कड़ी पाबंदी है। ईरान में प्रदर्शनकारियों को कोड़े मारने और मृत्युदंड तक देने के नियम हैं, जबकि सऊदी अरब में उल्लंघन करने वालों को सालों की बामुशक्कत जेल या मौत की सजा दी जाती है।
रूस और बेलारूस में दमनकारी कानून
रूस में बिना अनुमति प्रदर्शन करने पर भारी जुर्माना और कई सालों की जेल हो सकती है। वहीं बेलारूस में सरकार विरोधी रैलियों पर पूर्ण प्रतिबंध है और सड़कों पर उतरने वाले नागरिकों को तत्काल गिरफ्तार कर जेल भेज दिया जाता है।
लोकतांत्रिक आवाज को कुचलने के तरीके
जिन देशों में तानाशाही शासन है, वहां पुलिस आंसू गैस, वाटर कैनन और लाठीचार्ज जैसे हिंसक तरीकों का इस्तेमाल करती है। प्रदर्शनकारियों पर गंभीर आपराधिक धाराएं लगाकर उन्हें इस कदर डराया जाता है कि वे भविष्य में कोई बड़ा आंदोलन खड़ा न कर सकें। दिल्ली से शुरू हुई यह आग अब वैश्विक कानूनों और मानवाधिकारों पर नई बहस छेड़ रही है।