वैश्विक आर्थिक परिदृश्य खराब हुआ, लेकिन भारत को विकास का वाहक माना जा रहा है: WEF

Edited By Updated: 29 May, 2025 10:05 PM

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विश्व आर्थिक मंच (WEF) की ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक, साल की शुरुआत से दुनिया की अर्थव्यवस्था की स्थिति बिगड़ी है। इसकी वजह आर्थिक राष्ट्रवाद में बढ़ोतरी, व्यापार में तनाव और टैरिफ (शुल्क) की अनिश्चितता है। लेकिन इन सबके बीच भारत के नेतृत्व में दक्षिण...

नेशनल डेस्क: विश्व आर्थिक मंच (WEF) की ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक, साल की शुरुआत से दुनिया की अर्थव्यवस्था की स्थिति बिगड़ी है। इसकी वजह आर्थिक राष्ट्रवाद में बढ़ोतरी, व्यापार में तनाव और टैरिफ (शुल्क) की अनिश्चितता है। लेकिन इन सबके बीच भारत के नेतृत्व में दक्षिण एशिया को तेजी से विकास करने वाला क्षेत्र माना जा रहा है।

वैश्विक अर्थव्यवस्था में बड़ा बदलाव

रिपोर्ट में कहा गया है कि 79% मुख्य अर्थशास्त्री मौजूदा वैश्विक हालात को केवल अस्थायी परेशानी नहीं, बल्कि एक बड़ा और स्थायी बदलाव मानते हैं। व्यापार नीतियों में अस्थिरता, ऊंची महंगाई और कमजोर डॉलर के कारण दुनिया की अर्थव्यवस्था कमजोर हो रही है।

भारत के कारण दक्षिण एशिया में आशा की किरण

हालांकि सभी क्षेत्रों की स्थिति एक जैसी नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत की वजह से दक्षिण एशिया को लेकर सबसे ज्यादा सकारात्मक सोच देखने को मिली है। यहां 33% अर्थशास्त्रियों को इस साल मजबूत विकास की उम्मीद है।

अमेरिका और चीन को लेकर चिंता

रिपोर्ट में बताया गया है कि 77% अर्थशास्त्री 2025 तक अमेरिका की विकास दर कमजोर रहने की आशंका जता रहे हैं। चीन को लेकर भी विशेषज्ञों की राय बंटी हुई है कि क्या वह 5% विकास दर का लक्ष्य हासिल कर पाएगा।

यूरोप के लिए हल्की उम्मीद

यूरोप को लेकर पहली बार अर्थशास्त्री थोड़े आशावादी हैं। खासकर जर्मनी में सरकार के खर्च बढ़ाने की उम्मीद की जा रही है, जिससे कुछ राहत मिल सकती है।

बढ़ती वैश्विक अनिश्चितता और मंदी की आशंका

82% अर्थशास्त्रियों का मानना है कि फिलहाल वैश्विक अनिश्चितता बहुत ज्यादा है। 97% का मानना है कि व्यापार नीति सबसे अधिक अनिश्चित क्षेत्र है, जिससे कंपनियों के फैसले टल सकते हैं और मंदी का खतरा बढ़ सकता है।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) से उम्मीदें और खतरे

रिपोर्ट में कहा गया है कि AI आने वाले समय में आर्थिक विकास का बड़ा जरिया बन सकता है। 46% अर्थशास्त्री मानते हैं कि AI अगले 10 सालों में वैश्विक जीडीपी में 0-5% की वृद्धि कर सकता है। हालांकि इसके खतरे भी हैं — 47% अर्थशास्त्रियों को डर है कि इससे नौकरी के मौके कम हो सकते हैं। साथ ही फेक न्यूज और सामाजिक अस्थिरता का खतरा भी है।

सरकार और कंपनियों को क्या करना चाहिए?

  • सरकारों को चाहिए कि वे AI इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश करें, लोगों को नई स्किल्स सिखाएं और AI टैलेंट को बढ़ावा दें।
  • कंपनियों को अपने कामकाज में AI को शामिल करना चाहिए, कर्मचारियों को ट्रेनिंग देनी चाहिए और नए तरीकों से काम करना सीखना चाहिए।

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