Edited By Parveen Kumar,Updated: 05 Mar, 2026 08:36 PM

भारत और कनाडा के बीच हुए यूरेनियम आपूर्ति समझौते ने दक्षिण एशिया की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। इस करार के बाद पाकिस्तान ने चिंता जताते हुए कहा है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत को परमाणु सहयोग के क्षेत्र में विशेष छूट मिल रही है। इस्लामाबाद...
नेशनल डेस्क : भारत और कनाडा के बीच हुए यूरेनियम आपूर्ति समझौते ने दक्षिण एशिया की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। इस करार के बाद पाकिस्तान ने चिंता जताते हुए कहा है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत को परमाणु सहयोग के क्षेत्र में विशेष छूट मिल रही है। इस्लामाबाद का मानना है कि ऐसे समझौते क्षेत्रीय रणनीतिक संतुलन को प्रभावित कर सकते हैं।
भारत-कनाडा के बीच हुआ ऐतिहासिक समझौता
हाल ही में India और Canada के बीच कई अहम समझौते हुए, जिनमें परमाणु ऊर्जा के लिए दीर्घकालिक यूरेनियम सप्लाई की डील भी शामिल है। इस करार के तहत दोनों देश परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के साथ-साथ नई तकनीकों पर भी साथ काम करेंगे।
प्रधानमंत्री Narendra Modi ने इस समझौते को नागरिक परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम बताया और कहा कि इससे ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती मिलेगी।
उन्नत रिएक्टर तकनीकों पर भी साथ काम
इस समझौते के तहत दोनों देश छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR) और उन्नत परमाणु रिएक्टर तकनीक के विकास में सहयोग करेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि यह साझेदारी भारत की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में मददगार साबित हो सकती है और स्वच्छ ऊर्जा के विकल्प को भी मजबूत करेगी।
पाकिस्तान ने जताई रणनीतिक चिंता
दूसरी ओर Pakistan के विदेश मंत्रालय ने इस समझौते पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह नागरिक परमाणु सहयोग के क्षेत्र में किसी एक देश को दी गई “विशेष छूट” जैसा है। मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने कहा कि इस डील के दीर्घकालिक प्रभावों पर ध्यान देने की जरूरत है और इससे क्षेत्रीय संतुलन पर असर पड़ सकता है।
पुराने परमाणु परीक्षण का दिया हवाला
पाकिस्तानी पक्ष ने अपने बयान में 1974 में भारत द्वारा किए गए परमाणु परीक्षण का भी जिक्र किया। उनका कहना है कि उसी घटना के बाद वैश्विक स्तर पर निर्यात नियंत्रण के लिए Nuclear Suppliers Group का गठन हुआ था। पाकिस्तान का दावा है कि जिस देश की वजह से यह व्यवस्था बनी, उसे अब अलग तरह की छूट दी जा रही है।
परमाणु निगरानी को लेकर भी उठाए सवाल
पाकिस्तान ने यह भी आरोप लगाया कि भारत के सभी नागरिक परमाणु प्रतिष्ठान अंतरराष्ट्रीय निगरानी में नहीं हैं। इस संदर्भ में उसने International Atomic Energy Agency की भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि निगरानी व्यवस्था को लेकर स्पष्टता जरूरी है। हालांकि भारत लगातार यह कहता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम जिम्मेदार और सुरक्षित मानकों के अनुरूप है।
दक्षिण एशिया की रणनीति पर पड़ सकता है असर
पाकिस्तान का कहना है कि यदि भारत को विदेशों से यूरेनियम की नियमित आपूर्ति मिलती है तो वह अपने घरेलू संसाधनों को दूसरे उद्देश्यों में इस्तेमाल कर सकता है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का मानना है कि भारत का नागरिक परमाणु कार्यक्रम ऊर्जा उत्पादन और तकनीकी विकास पर केंद्रित है।