Indian Railways का बड़ा धमाका! देश की पहली LNG ट्रेन सफल, खर्च में 3 गुना कमी देख दुनिया हैरान

Edited By Updated: 31 Jan, 2026 11:58 AM

india s first lng train is a success and the world is amazed by the three fold

भारतीय रेलवे ने पर्यावरण संरक्षण और परिचालन लागत घटाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। पश्चिमी रेलवे के अहमदाबाद डिवीजन ने देश की पहली एलएनजी (LNG) और डीजल से चलने वाली हाइब्रिड ट्रेन का सफल परीक्षण पूरा कर लिया है।

नेशनल डेस्क: भारतीय रेलवे ने पर्यावरण संरक्षण और परिचालन लागत घटाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। पश्चिमी रेलवे के अहमदाबाद डिवीजन ने देश की पहली एलएनजी (LNG) और डीजल से चलने वाली हाइब्रिड ट्रेन का सफल परीक्षण पूरा कर लिया है। यह पहल न सिर्फ रेलवे के ईंधन खर्च को कम करेगी, बल्कि प्रदूषण नियंत्रण के लिहाज से भी एक बड़ा बदलाव साबित होगी। 30 जनवरी 2026 को साबरमती डिपो में मंडल रेल प्रबंधक वेद प्रकाश ने इस ट्रेन का निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि यह तकनीक भारतीय रेलवे के भविष्य को नई दिशा देने वाली है और स्वच्छ ऊर्जा की ओर एक मजबूत कदम है।

40 फीसदी तक डीजल की बचत
इस परियोजना के तहत 1400 हॉर्सपावर क्षमता वाली दो डीएमयू (DMU) ट्रेनों को ड्यूल फ्यूल सिस्टम में बदला गया है। अब ये ट्रेनें डीजल के साथ-साथ एलएनजी पर भी चल सकती हैं। नई व्यवस्था के बाद ट्रेन में लगभग 40 प्रतिशत तक डीजल की खपत कम हो जाएगी। खास बात यह है कि इंजन की क्षमता और प्रदर्शन पर इसका कोई असर नहीं पड़ा है और जरूरत के अनुसार डीजल या एलएनजी पर स्विच किया जा सकता है। रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, इन ट्रेनों ने अब तक 2000 किलोमीटर से अधिक का ट्रायल सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है और सभी तकनीकी मानकों पर खरी उतरी हैं।


प्रदूषण और खर्च दोनों पर लगेगी लगाम
आर्थिक दृष्टि से यह तकनीक रेलवे के लिए फायदेमंद साबित होगी। एलएनजी की कीमत डीजल की तुलना में काफी कम है, जिससे एक ट्रेन रेक पर सालाना लगभग 24 लाख रुपये तक की बचत संभव है। वहीं, पर्यावरण के लिहाज से भी यह बदलाव अहम है क्योंकि इससे कार्बन उत्सर्जन और अन्य हानिकारक गैसों में भारी कमी आएगी। रेलवे ट्रैक के आसपास रहने वाले लोगों को भी साफ हवा का लाभ मिलेगा।


लंबी दूरी, कम ईंधन की चिंता
हाइब्रिड ट्रेन में 2200 लीटर क्षमता वाला एलएनजी टैंक लगाया गया है, जिसमें करीब 1000 किलोग्राम गैस भरी जा सकती है। एक बार टैंक भरने के बाद यह ट्रेन लगभग 2200 किलोमीटर तक बिना दोबारा ईंधन भरे चल सकती है। इससे ऑपरेशन के दौरान ईंधन भरने की बार-बार जरूरत भी खत्म हो जाएगी।


जल्द देशभर में हो सकता है विस्तार
साबरमती में सफल ट्रायल के बाद अब इस परियोजना को आरडीएसओ (RDSO) की अंतिम मंजूरी का इंतजार है। मंजूरी मिलते ही इस तकनीक को देश के अन्य डीजल चालित ट्रेनों में भी लागू किया जा सकता है। भारतीय रेलवे की यह पहल न केवल खर्च घटाने वाली है, बल्कि स्वच्छ, सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल रेल सफर की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर मानी जा रही है।

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