Edited By Mansa Devi,Updated: 19 Mar, 2026 04:40 PM

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने बृहस्पतिवार को कहा कि वह अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष पर भारत सरकार के सतर्कतापूर्ण रुख अपनाने की इच्छा को समझते हैं, और उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार दोनों पक्षों से युद्ध को जल्द से जल्द खत्म करने...
नेशनल डेस्क: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने बृहस्पतिवार को कहा कि वह अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष पर भारत सरकार के सतर्कतापूर्ण रुख अपनाने की इच्छा को समझते हैं, और उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार दोनों पक्षों से युद्ध को जल्द से जल्द खत्म करने की सार्वजनिक अपील कर सकती है।
थरूर ने 'पीटीआई-भाषा' को दिए साक्षात्कार में यह भी कहा कि सरकार को ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मृत्यु पर तुरंत सार्वजनिक संवेदना व्यक्त करनी चाहिए थी, और वैसा ही कदम उठाना चाहिए था जैसा उसने 2024 में एक हेलीकॉप्टर दुर्घटना में तत्कालीन ईरानी राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी के निधन के बाद उठाया था।

थरूर ने कहा कि मौजूदा हालात में, ऐसे देशों का एक समूह जो इस संघर्ष में किसी भी पक्ष की ओर से शामिल नहीं है, दोनों पक्षों के पास जाकर उनसे संघर्ष खत्म करने की अपील कर सकता है, और भारत को इस पहल में सबसे आगे रहना चाहिए। जब उनसे विभिन्न हलकों से उठ रही इस मांग के बारे में पूछा गया कि भारत को अमेरिका-इजराइल के हमले में खामेनेई की हत्या की निंदा करनी चाहिए थी, तो थरूर ने कहा, ''मुझे नहीं पता कि इसकी निंदा करनी चाहिए थी या नहीं, लेकिन हमें निश्चित रूप से इस पर संवेदना व्यक्त करनी चाहिए थी।
आखिर वह उस देश के आध्यात्मिक नेता थे जिसके साथ हमारे मैत्रीपूर्ण संबंध हैं।'' उन्होंने कहा, ''उचित होता कि जिस दिन यह घटना हुई, उसी दिन हम सार्वजनिक रूप से संवेदना व्यक्त करते और उनके प्रियजनों तथा उनके राष्ट्र के दुख में शामिल होते; ठीक वैसे ही जैसे दो साल पहले जब राष्ट्रपति रईसी एक हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मारे गए थे, तो हमने तुरंत संवेदना संदेश जारी की थी और साथ ही राष्ट्रीय शोक की घोषणा भी की थी।''

थरूर ने कहा कि जैसे ही ईरानी दूतावास ने शोक पुस्तिका खोली, विदेश सचिव विक्रम मिसरी वहां गए और उस पुस्तिका पर हस्ताक्षर किए, जो उनके अनुसार एक 'अच्छी बात' थी। उन्होंने कहा, ''लेकिन मेरा मानना है कि हम थोड़ा और बेहतर कर सकते थे किसी भी देश के लिए ऐसा करना केवल एक शिष्टाचार की बात है। उदाहरण के लिए, अगर किसी दूरदराज के देश के राष्ट्रपति जिसके साथ हमारे इतने करीबी संबंध भी नहीं हैं ऐसी किसी घटना का शिकार होते, तो हमारा संवेदना व्यक्त न करना अजीब लगता।''
उन्होंने कहा, ''लेकिन इसके अलावा, मुझे लगता है कि सरकार 'सतर्क रुख' अपनाना चाहती है।'' थरूर ने कहा कि जो कुछ हो रहा है, उसमें भारत के बहुत बड़े हित जुड़े हैं और उसकी ऊर्जा सुरक्षा खाड़ी क्षेत्र की स्थिति पर निर्भर करती है, जिसमें उसके एलपीजी और एलएनजी आयात भी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इस संघर्ष का असर भारत के लोगों पर भी पड़ना शुरू हो गया है। थरूर ने कहा, ''गैस सिलेंडरों की कमी के चलते कई ढाबे बंद हो रहे हैं।

हैदराबाद में मेरे कुछ दोस्तों ने बताया कि अब कोई 'हलीम' नहीं बना पा रहा है, क्योंकि यह एक ऐसी चीज है जिसे धीमी आंच पर पकाना पड़ता है।'' उन्होंने कहा, ''जब 'चायवालों' के पास एलपीजी सिलेंडर ही नहीं होंगे, तो हम चाय पीने के लिए कहां रुकेंगे? मैं मज़ाक नहीं कर रहा हूं; ये सचमुच की ऐसी चिंताएं हैं जिनका सीधा असर भारतीय रसोई और आम भारतीय परिवारों पर पड़ रहा है।''
उन्होंने कहा, ''मुझे पूरी उम्मीद है कि भारत सरकार आगे बढ़कर दोनों ही पक्षों से सार्वजनिक रूप से यह अपील करेगी कि वे इस युद्ध को जल्द से जल्द खत्म करें। मुझे अब भी यही लगता है कि आज नहीं तो कल, दोनों ही पक्ष (अमेरिका-इजराइल और ईरान) इस तनावपूर्ण स्थिति से बाहर निकलने के लिए कोई न कोई रास्ता ज़रूर ढूंढ़ेंगे।''