Edited By Mansa Devi,Updated: 19 Mar, 2026 06:01 PM

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने विधानसभा चुनाव से पहले राज्य में '50 से अधिक वरिष्ठ अधिकारियों को मनमाने ढंग से हटाए जाने' पर बृहस्पतिवार को चिंता व्यक्त करते हुए इसे 'उच्चतम स्तर का राजनीतिक हस्तक्षेप' करार दिया।
नेशनल डेस्क: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने विधानसभा चुनाव से पहले राज्य में '50 से अधिक वरिष्ठ अधिकारियों को मनमाने ढंग से हटाए जाने' पर बृहस्पतिवार को चिंता व्यक्त करते हुए इसे 'उच्चतम स्तर का राजनीतिक हस्तक्षेप' करार दिया। निर्वाचन आयोग (ईसी) की तीखी आलोचना जारी रखते हुए सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस की सुप्रीमो बनर्जी ने दावा किया कि इस तरह की कार्रवाई 'संस्थानों का व्यवस्थित राजनीतिकरण' और 'संविधान पर सीधा हमला' है।
विधानसभा चुनाव का कार्यक्रम घोषित करने के बाद निर्वाचन आयोग ने मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती, गृह सचिव जगदीश प्रसाद मीणा के तबादले तथा डीजीपी पीयूष पांडे और कोलकाता पुलिस आयुक्त सुप्रतिम सरकार को हटाने समेत कई वरिष्ठ अधिकारियों के तबादलों के आदेश दिए। बुधवार को निर्वाचन आयोग ने वरिष्ठ अधिकारियों के नए फेरबदल का आदेश दिया, जिसमें दो सचिवों को अन्य चुनावी राज्यों में पर्यवेक्षक के रूप में तैनात किया गया तथा 13 आईएएस और पांच आईपीएस अधिकारियों को महत्वपूर्ण चुनाव प्रबंधन भूमिकाओं में लगाया गया।

निर्वाचन आयोग की आलोचना करते हुए बनर्जी ने 'एक्स' पर दावा किया कि चुनाव की औपचारिक अधिसूचना जारी होने से पहले ही 50 से अधिक वरिष्ठ अधिकारियों को 'मनमाने ढंग से और बिना किसी पूर्व सूचना के' हटा दिया गया। उन्होंने लिखा, ''जिस तरह से निर्वाचन आयोग ने बंगाल को निशाना बनाया है, वह न केवल अप्रत्याशित है, बल्कि बेहद चिंताजनक भी है।''
मुख्यमंत्री ने कहा, "चुनाव की औपचारिक अधिसूचना जारी होने से पहले ही 50 से अधिक वरिष्ठ अधिकारियों को मनमाने ढंग से पद से हटा दिया गया है। यह प्रशासनिक कार्रवाई नहीं है; यह उच्चतम स्तर का राजनीतिक हस्तक्षेप है। बनर्जी ने आरोप लगाया कि आईबी, एसटीएफ और सीआईडी जैसी एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारियों को राज्य से "चुनिंदा रूप से हटाया जा रहा है।" उन्होंने निर्वाचन आयोग की कार्रवाई में 'विरोधाभास' का आरोप लगाते हुए कहा कि हटाए गए अधिकारियों को चुनाव पर्यवेक्षक के रूप में नियुक्त किया जा रहा है।

उन्होंने कहा, ''यह शासन नहीं है। यह अराजकता, भ्रम और घोर अक्षमता को दर्शाता है जिसे अधिकार के रूप में पेश किया जा रहा है।'' स्थिति को ''अघोषित आपातकाल से कम नहीं'' बताते हुए बनर्जी ने आरोप लगाया कि ''जबरदस्ती और संस्थागत हेरफेर के माध्यम से पश्चिम बंगाल पर कब्जा करने की जानबूझकर साजिश रची जा रही है।'' उन्होंने कहा,''मैं पश्चिम बंगाल सरकार के हर अधिकारी और उनके परिवारों के साथ पूरी तरह से एकजुटता से खड़ी हूं बंगाल ने कभी भी धमकियों के आगे घुटने नहीं टेके हैं, और न ही कभी झुकेगा।''