Edited By Ramanjot,Updated: 30 Jan, 2026 08:17 PM

भारतीय रेलवे ने स्वच्छ ऊर्जा और ईंधन बचत की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है।
नेशनल डेस्क: भारतीय रेलवे ने स्वच्छ ऊर्जा और ईंधन बचत की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। पश्चिम रेलवे के अहमदाबाद मंडल ने पहली बार डीजल इलेक्ट्रिक मल्टीपल यूनिट (DEMU) की ड्राइविंग पावर कार (DPC) में LNG आधारित ड्यूल फ्यूल तकनीक को सफलतापूर्वक लागू किया है। इस पहल के साथ ही भारत की पहली LNG-संचालित DEMU ट्रेन अब नियमित यात्री सेवा के लिए तैयार है।
इस नई तकनीक के तहत 1400 हॉर्सपावर क्षमता वाली दो DEMU पावर कारों को डीजल और LNG दोनों पर चलने योग्य बनाया गया है। संचालन के दौरान करीब 40 प्रतिशत ईंधन के रूप में LNG का उपयोग किया जा रहा है, जिससे पारंपरिक डीजल पर निर्भरता काफी घट गई है। इन पावर कारों का 2000 किलोमीटर से अधिक का फील्ड ट्रायल सफलतापूर्वक पूरा किया जा चुका है और अब ये बिना किसी तकनीकी समस्या के नियमित सेवा में चल रही हैं।
ग्रीन रेलवे मिशन को मिली नई रफ्तार
अहमदाबाद मंडल रेल प्रबंधक वेद प्रकाश ने साबरमती स्थित DEMU शेड का निरीक्षण कर LNG सिस्टम की सुरक्षा, रखरखाव और परिचालन तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने इस तकनीक को भारतीय रेलवे के लिए गेम-चेंजर बताते हुए कहा कि यह ग्रीन रेलवे मिशन को मजबूती देने वाला कदम है।
LNG ड्यूल फ्यूल तकनीक के बड़े फायदे
LNG के इस्तेमाल से ट्रेनों से निकलने वाले कार्बन डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड और पार्टिकुलेट मैटर जैसे प्रदूषक तत्वों में उल्लेखनीय कमी आती है, जिससे रेलवे ट्रैक के आसपास वायु गुणवत्ता बेहतर होती है। इसके साथ ही यह तकनीक आर्थिक रूप से भी फायदेमंद है। परीक्षण के आधार पर एक पावर कार से सालाना लगभग 11.9 लाख रुपये की बचत संभव है, जबकि एक 8-कोच DEMU रेक से यह बचत करीब 23.9 लाख रुपये प्रति वर्ष तक पहुंच सकती है।
इस सिस्टम की खास बात यह है कि इंजन जरूरत के अनुसार डीजल और LNG के बीच आसानी से स्विच कर सकता है, जिससे ट्रेन संचालन पर कोई असर नहीं पड़ता। प्रत्येक पावर कार में लगभग 2200 लीटर LNG टैंक लगाया गया है, जो एक बार भरने पर करीब 222 किलोमीटर तक दैनिक संचालन की क्षमता देता है। इंजन की पावर और परफॉर्मेंस भी पारंपरिक डीजल इंजन के बराबर बनी रहती है।
आगे क्या है रेलवे की योजना?
रेलवे डिज़ाइन एंड स्टैंडर्ड्स ऑर्गनाइजेशन (RDSO) से अंतिम उत्सर्जन परीक्षण और मंजूरी मिलने के बाद इस तकनीक को बड़े पैमाने पर लागू करने की योजना है। अगले चरण में 8 और DEMU पावर कारों को LNG ड्यूल फ्यूल सिस्टम में बदलने की तैयारी है। इससे रेलवे का कार्बन फुटप्रिंट घटेगा और परिचालन लागत भी कम होगी।