ईरान युद्ध का भारत पर सीधा असर: कतर ने LNG सप्लाई में बड़ी कटौती की! भारत की 40% गैस प्रभावित

Edited By Updated: 03 Mar, 2026 11:52 PM

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ईरान, अमेरिका और इजराइल के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का असर अब वैश्विक ऊर्जा बाजार पर साफ दिखने लगा है। इस संकट के बीच कतर से एलएनजी (Liquefied Natural Gas) सप्लाई में बड़ी कटौती की खबर सामने आई है, जिससे भारत की ऊर्जा जरूरतों पर सीधा असर पड़ा है।

नेशनल डेस्क: ईरान, अमेरिका और इजराइल के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का असर अब वैश्विक ऊर्जा बाजार पर साफ दिखने लगा है। इस संकट के बीच कतर से एलएनजी (Liquefied Natural Gas) सप्लाई में बड़ी कटौती की खबर सामने आई है, जिससे भारत की ऊर्जा जरूरतों पर सीधा असर पड़ा है।

जानकारी के मुताबिक, कतर के प्रमुख गैस निर्यात केंद्रों पर सुरक्षा स्थिति बिगड़ने के बाद उत्पादन अस्थायी रूप से रोका गया है। कतर वैश्विक LNG सप्लाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और भारत अपने कुल LNG आयात का बड़ा हिस्सा वहीं से लेता है।

भारत की 40% गैस सप्लाई प्रभावित

भारत हर साल बड़ी मात्रा में LNG आयात करता है, जिसमें लगभग 40% से अधिक हिस्सा कतर से आता है। इस कटौती के बाद घरेलू गैस वितरण पर दबाव बढ़ गया है। Petronet LNG Limited ने गैस मार्केटिंग कंपनियों को आपूर्ति में कमी की सूचना दी है। इसके बाद प्राथमिकता के आधार पर घरेलू रसोई गैस (PNG) और CNG सप्लाई को बनाए रखने की कोशिश की जा रही है, जबकि पावर प्लांट्स और कुछ औद्योगिक इकाइयों में गैस आवंटन घटाया गया है।

स्पॉट मार्केट में कीमतों में उछाल

वैश्विक बाजार में LNG की कीमतों में तेज बढ़ोतरी देखी गई है। स्पॉट मार्केट में रेट्स लंबी अवधि के कॉन्ट्रैक्ट की तुलना में लगभग दोगुने स्तर तक पहुंच गए हैं। GAIL और Indian Oil Corporation जैसी कंपनियां वैकल्पिक स्रोतों से गैस खरीदने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन ऊंची कीमतों के कारण लागत बढ़ रही है।

होर्मुज स्ट्रेट बना चिंता का कारण

मिडिल ईस्ट का रणनीतिक समुद्री मार्ग होर्मुज स्ट्रेट वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम है। इस मार्ग से भारत का बड़ा हिस्सा कच्चा तेल और LNG गुजरता है। तनाव बढ़ने से शिपिंग लागत और बीमा प्रीमियम में उछाल आया है, जिससे आयात महंगा हो रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर संकट लंबा खिंचता है तो उर्वरक, बिजली उत्पादन और CNG सेक्टर पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा, जिससे महंगाई बढ़ सकती है।

सरकार की वैकल्पिक रणनीति

ऊर्जा मंत्रालय और संबंधित कंपनियां वैकल्पिक आपूर्तिकर्ताओं से बातचीत कर रही हैं। रूस और अन्य देशों से अतिरिक्त स्पॉट कार्गो की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। हालांकि अल्पकालिक राहत सीमित हो सकती है। मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष ने एक बार फिर यह दिखा दिया है कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति कितनी संवेदनशील है। आने वाले दिनों में हालात सामान्य होते हैं या नहीं, इस पर भारत की ऊर्जा सुरक्षा काफी हद तक निर्भर करेगी।

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