Oman : मिसाइल हमले में बाल-बाल बचे भारतीय नाविक लौटे वतन …लेकिन अब पासपोर्ट, पैसे और पहचान पत्र गायब, क्या मिलेगा मुआवजा?

Edited By Updated: 21 Mar, 2026 02:30 AM

indian sailors who narrowly escaped missile attack return home

ओमान के खसाब बंदरगाह के पास तेल टैंकर‘स्काई लाइट'पर एक मार्च को हुए मिसाइल हमले में बाल-बाल बचे आठ भारतीय नाविक 18 मार्च को मुंबई लौट आये, लेकिन उनके पासपोर्ट, पहचान पत्र, पैसे और सामान का खो गये हैं, जिसके कारण दस्तावेज़ीकरण तथा मुआवज़े को लेकर...

नेशनल डेस्कः ओमान के खसाब बंदरगाह के पास तेल टैंकर‘स्काई लाइट'पर एक मार्च को हुए मिसाइल हमले में बाल-बाल बचे आठ भारतीय नाविक 18 मार्च को मुंबई लौट आये, लेकिन उनके पासपोर्ट, पहचान पत्र, पैसे और सामान का खो गये हैं, जिसके कारण दस्तावेज़ीकरण तथा मुआवज़े को लेकर असमंजस उत्पन्न हो गई है। हमले में बचे नाविकों में से ज़्यादातर की उम्र 20-22 साल के आसपास है और जो अपनी पहली विदेश नौकरी पर थे। ये सभी पश्चिम बंगाल, हरियाणा, राजस्थान और आंध्र प्रदेश के रहने वाले हैं।

एक मार्च की सुबह करीब 07:05 बजे टैंकर में अचानक ज़ोरदार धमाका हुआ, जिससे बिजली गुल हो गई और आग तेज़ी से फैल गई। धुएं और लपटों ने भागने के सारे रास्ते बंद कर दिए थे, इसलिए चालक दल को समुद्र में कूदना पड़ा। कई लोगों ने लाइफ जैकेट पहन रखी थी और कुछ को तैरना नहीं आता था, लेकिन ओमान की सेना ने कुछ ही मिनटों में उन्हें बचा लिया। हालांकि, बिहार के रहने वाले कैप्टन आशीष कुमार की इस हमले में मौत हो गई, जबकि राजस्थान के एक अन्य नाविक दलीप सिंह अभी भी लापता हैं। बचाए जाने के बाद ये आठ नाविक कई दिनों तक फंसे रहे।

अगले दिन अपराह्न में उन्हें नवी मुंबई में एक दफ़्तर ले जाया गया, जहां कानूनी औपचारिकताएं पूरी की गईं। उन्होंने बताया कि उनसे ऐसे कागज़ों पर दस्तखत करने को कहा गया जिन्हें वे पूरी तरह समझ नहीं पा रहे थे, और बाद में उन्हें अपने रहने का इंतज़ाम खुद करने के लिए छोड़ दिया गया। उनकी तनख्वाहें उनके खातों में जमा हो गई थीं, लेकिन ज़्यादातर लोग पैसे नहीं निकाल पा रहे हैं, क्योंकि बैंक से पैसे निकालने के लिए पहचान पत्र की ज़रूरत होती है। सिफऱ् एक नाविक अपना खाता इस्तेमाल कर पा रहा है और वही पूरे समूह का खर्च उठा रहा है। शिपिंग एजेंसी ने ज़रूरी चीज़ों की खरीद का पैसा वापस करने का वादा किया है, लेकिन ये लोग अभी भी इस बात को लेकर अनिश्चित हैं कि वे अपने गांव कब लौट पाएंगे।

डायरेक्टरेट जनरल ऑफ़ शिपिंग के अधिकारियों ने बताया कि दस्तावेज़ों को फिर से जारी करने और हर व्यक्ति को हुए नुकसान के आधार पर मुआवज़ा तय करने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। लखनऊ की कंपनी एसकेएस कृषि मरीन सर्विसेज़ के निदेशक सुमित सिंह ने कहा है कि सभी की तनख्वाहें जिनमें मृत या लापता लोग भी शामिल हैं दे दी गई हैं। कंपनी ने हवाई टिकटों पर तीन लाख से ज़्यादा खर्च किए और ओमान में उन्हें कपड़े, रहने की जगह और खाना भी मुहैया कराया। सोना या इलेक्ट्रॉनिक सामान जैसी निजी कीमती चीज़ों के लिए मुआवज़ा मिलना मुश्किल है, क्योंकि उनके पास इसका कोई सबूत नहीं है। जो लोग बच गए हैं, उन्हें अपने बयान दर्ज करवाने के लिए एक आधिकारिक सुनवाई में भी शामिल होना होगा।

इस घटना ने उन्हें अंदर तक झकझोर दिया है। कई नाविकों ने तो समुद्री सेवा को पूरी तरह से छोड़ने की इच्छा भी ज़ाहिर की है। क्रू के एक सदस्य ने बताया कि यह उसकी पहली नौकरी थी और जब भी वह सोने की कोशिश करता है, तो उस हमले की खौफ़नाक यादें उसके ज़हन में ताज़ा हो जाती हैं। अब वे अपने बचने को ज़दिंगी का दूसरा मौका मान रहे हैं और बस यही उम्मीद कर रहे हैं कि वे सुरक्षित अपने घर लौट पाएँ और अपने परिवारों से मिल सकें जो आर्थिक तंगी की वजह से मुंबई नहीं आ पा रहे हैं।

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