Edited By Parveen Kumar,Updated: 20 May, 2026 09:22 PM

देश में बढ़ती ऊर्जा सुरक्षा चिंताओं और पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच केंद्र सरकार ने पेट्रोल में 30 फीसदी तक इथेनॉल मिलाने के मानकों को अधिसूचित कर दिया है। भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) की नई अधिसूचना ने संकेत दिया है कि सरकार अब E20 से आगे बढ़कर...
नेशनल डेस्क : देश में बढ़ती ऊर्जा सुरक्षा चिंताओं और पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच केंद्र सरकार ने पेट्रोल में 30 फीसदी तक इथेनॉल मिलाने के मानकों को अधिसूचित कर दिया है। भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) की नई अधिसूचना ने संकेत दिया है कि सरकार अब E20 से आगे बढ़कर ज्यादा इथेनॉल मिश्रित ईंधन की दिशा में कदम बढ़ा रही है।
रिपोर्ट के मुताबिक BIS ने E22, E25, E27 और E30 जैसे नए ईंधन मिश्रणों के लिए मानक तय किए हैं। इसका मतलब है कि पेट्रोल में क्रमशः 22%, 25%, 27% और 30% तक इथेनॉल मिलाया जा सकेगा। हालांकि फिलहाल यह केवल तकनीकी मानकों की अधिसूचना है, इसे पूरे देश में तुरंत लागू नहीं किया गया है।
दरअसल, ईरान-अमेरिका-इजरायल तनाव और होरमुज़ जलडमरूमध्य पर मंडराते खतरे ने भारत की चिंता बढ़ा दी है। दुनिया की करीब 20 फीसदी तेल सप्लाई इसी रास्ते से गुजरती है। ऐसे में सरकार तेल आयात पर निर्भरता कम करने के लिए इथेनॉल उत्पादन और उसके इस्तेमाल को बढ़ावा दे रही है।
सरकार पिछले कुछ वर्षों से E20 ईंधन को बढ़ावा दे रही है। हालांकि, इसके साथ पुरानी गाड़ियों के इंजन, माइलेज और मेंटेनेंस लागत को लेकर सवाल भी उठते रहे हैं। लेकिन केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री Hardeep Singh Puri ने दावा किया था कि E20 लागू होने के बाद इंजन खराब होने का कोई मामला सामने नहीं आया है। उन्होंने ब्राज़ील का उदाहरण देते हुए कहा था कि वहां वर्षों से E27 ईंधन का इस्तेमाल बिना किसी दिक्कत के हो रहा है।
उधर, ऑटोमोबाइल और बायोफ्यूल इंडस्ट्री लंबे समय से ज्यादा इथेनॉल मिश्रण वाले ईंधनों को बढ़ावा देने की मांग कर रही है। Maruti Suzuki के चेयरमैन R. C. Bhargava ने कहा कि अगर सरकार इसे अनिवार्य बनाती है तो कंपनी इसके लिए पूरी तरह तैयार है।
हालांकि विशेषज्ञों ने चेतावनी भी दी है कि E20 से आगे बढ़ने के लिए देश को ईंधन उपलब्धता, वाहनों की तकनीकी क्षमता और वितरण व्यवस्था को मजबूत करना होगा। अलग-अलग राज्यों की जलवायु और सड़क परिस्थितियों को देखते हुए यह बदलाव आसान नहीं माना जा रहा है।
इसके अलावा, विशेषज्ञों का मानना है कि अगर भारत पेट्रोल में इथेनॉल की मात्रा और बढ़ाना चाहता है, तो चीनी निर्यात पर भी असर पड़ सकता है, क्योंकि इथेनॉल उत्पादन के लिए बड़ी मात्रा में गन्ने और चीनी की जरूरत पड़ेगी।