7 साल की बेटी ने कम्बल के नीचे छिपकर देखे मौत के आखिरी 30 सेकंड, कोर्ट में बोली मासूम, मम्मी ने पापा को सफेद दवा पिलाई…और खर्राटे बंद हो गए

Edited By Updated: 17 Jan, 2026 11:55 AM

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कानपुर के किदवई नगर में एक सनसनीखेज हत्याकांड में कोर्ट ने पत्नी और उसके प्रेमी को उम्रकैद की सजा सुनाई है। लेकिन इस केस का सबसे चौंकाने वाला खुलासा आया 7 साल की मासूम बेटी से, जिसने कोर्ट में बताया कि मौत के आखिरी 30 सेकंड में उसकी मम्मी ने पापा को...

नेशनल डेस्क: कानपुर के किदवई नगर में एक सनसनीखेज हत्याकांड में कोर्ट ने पत्नी और उसके प्रेमी को उम्रकैद की सजा सुनाई है। लेकिन इस केस का सबसे चौंकाने वाला खुलासा आया 7 साल की मासूम बेटी से, जिसने कोर्ट में बताया कि मौत के आखिरी 30 सेकंड में उसकी मम्मी ने पापा को सफेद दवा पिलाई, और उनके खर्राटे बंद हो गए। बच्ची ने यह सब कम्बल के नीचे छिपकर देखा और कोर्ट में सच उजागर किया।

साजिश और रहस्यमयी गुमशुदगी
यह मामला साल 2024 के मार्च महीने का है। प्रतीक और नेहा अपनी शादीशुदा जिंदगी बिता रहे थे, लेकिन नेहा का झुकाव प्रतीक के ही दोस्त आयुष शर्मा की तरफ हो गया था। 6 मार्च को नेहा और प्रतीक बच्चों के साथ घर से घूमने निकले। कुछ दिन बाद नेहा अकेले बच्चों के साथ लौटी और पति के बारे में झूठ बोला कि उनकी गाड़ी खराब हो गई है। बाद में वह बच्चों को लेकर भी फरार हो गई, जिसके बाद प्रतीक के पिता ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।

 होटल में रची गई खौफनाक वारदात
पुलिस तफ्तीश में सामने आया कि नेहा और आयुष, प्रतीक को लेकर लखनऊ के एक होटल में रुके थे। वहां उन्होंने प्रतीक की शराब में जहर मिला दिया। जहर के असर से जब प्रतीक की मौत हो गई, तो आरोपियों ने पकड़े जाने के डर से गुपचुप तरीके से लखनऊ में ही उनका अंतिम संस्कार भी कर दिया। होटल के मैनेजर की गवाही ने कोर्ट में इस बात की पुष्टि की कि तीनों एक ही कमरे में ठहरे थे।

 7 साल की मासूम बनी सबसे बड़ी गवाह
इस केस का सबसे भावुक और अहम मोड़ तब आया जब प्रतीक की 7 साल की बेटी ने अदालत के सामने अपनी मां के खिलाफ गवाही दी। मासूम ने बताया कि उसने कंबल के नीचे छिपकर देखा था कि कैसे "मम्मी और आयुष अंकल" ने पापा को कुछ सफेद चीज घोलकर पिलाई थी। उसने यह भी बताया कि उसकी मां ने उसे धमकाया था कि अगर उसने किसी को कुछ बताया तो वह उसे मार डालेगी। बच्ची की इस दिलेर गवाही ने दोषियों को सजा दिलाने में सबसे बड़ी भूमिका निभाई।

अदालत का अंतिम फैसला
सरकारी पक्ष ने कोर्ट के सामने कुल सात चश्मदीद और सबूत पेश किए। बच्ची के बयान और होटल के रिकॉर्ड्स के आधार पर अदालत ने इसे एक सोची-समझी हत्या माना। कोर्ट ने टिप्पणी की कि एक पत्नी ने अपने प्रेमी के साथ मिलकर न केवल अपने पति की जान ली, बल्कि अपने बच्चों के भविष्य को भी दांव पर लगा दिया। दोनों आरोपियों को अब अपनी पूरी जिंदगी जेल की सलाखों के पीछे बितानी होगी।

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