संसद सुरक्षा चूक मामले में छठे आरोपी ललित झा ने किया सरेंडर, हमले के बाद से था फरार

Edited By Updated: 14 Dec, 2023 11:00 PM

lalit jha the sixth accused in the parliament security lapse case surrendered

संसद में सुरक्षा चूक मामले में फरार चल रहे छठे आरोपी ललित झा ने दिल्ली पुलिस के आगे सरेंडर कर दिया है। दिल्ली पुलिस लगातार ललित झा की तलाश में जुटी हुई थी।

नेशनल डेस्कः संसद में सुरक्षा चूक मामले में फरार चल रहे छठे आरोपी ललित झा ने दिल्ली पुलिस के आगे सरेंडर कर दिया है। दिल्ली पुलिस लगातार ललित झा की तलाश में जुटी हुई थी। आरोपी ने कर्तव्यपथ थाने में सरेंडर किया। इससे पहले दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा चूक मामले में पांचों आरोपियों को गुरूवार को कोर्ट में पेश किया। कोर्ट ने सभी आरोपियों को 7 दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया।

दिल्ली पुलिस ने संसद की सुरक्षा में चूक के मामले में आतंकवाद निरोधक कानून (यूएपीए) और भारतीय दंड संहिता की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। सूत्रों ने बताया कि पूछताछ के दौरान आरोपियों ने खुलासा किया कि वे भारत में ब्रिटिश शासन के दौरान क्रांतिकारी भगत सिंह द्वारा ‘सेंट्रल असेंबली' के अंदर बम फेंके जाने जैसी घटना को दोहराना चाहते थे।

पुलिस ने कहा कि आरोपियों ने स्मोक (धुआं) बम का उपयोग करने के बाद संसद में पर्चे फेंकने की योजना बनाई थी। इसने कहा कि उन्होंने तिरंगे भी खरीदे थे। गिरफ्तार किए गए चारों आरोपियों-सागर शर्मा (26), मनोरंजन डी (34), अमोल शिंदे (25) और नीलम देवी (37) की चिकित्सीय जांच आधी रात को राम मनोहर लोहिया अस्पताल के डॉक्टरों की एक टीम ने की।

पुलिस सूत्रों ने बताया कि संसद मार्ग थाने में यूएपीए की धारा 16 (आतंकवादी कृत्य) और 18 (साजिश आदि) तथा भारतीय दंड संहिता की धारा 120 बी (आपराधिक साजिश), 452 (अनधिकार प्रवेश), 153 (दंगा भड़काने के इरादे से जानबूझकर उकसाना), 186 (लोकसेवक के सार्वजनिक कार्य निर्वहन में बाधा पहुंचाना) और 353 (लोकसेवक को उसके कर्तव्य निर्वहन से रोकने के लिए हमला या आपराधिक बल) के तहत मामला दर्ज किया गया है।

सोशल मीडिया के जरिए संपर्क में आए थे चारों आरोपी
पुलिस गुरुग्राम निवासी विशाल शर्मा उर्फ विक्की और उसकी पत्नी से भी पूछताछ कर रही है क्योंकि गिरफ्तार किए गए चारों आरोपी मंगलवार रात शर्मा के आवास पर रुके थे। यूएपीए के तहत दर्ज मामले गैर ज़मानती होते हैं। एक अधिकारी ने बताया कि सुरक्षा एजेंसियों को अब तक किसी भी आतंकी समूह के साथ आरोपियों के संबंध नहीं मिले हैं। चारों लोग सोशल मीडिया से संपर्क में आए थे और फिर फेसबुक पर भगत सिंह ‘फैन पेज' से जुड़े थे। मामले में एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, "अब तक, सभी चारों आरोपियों ने दावा किया है कि उन्होंने खुद ही पूरी घटना की साजिश रची और खुद ही उसे अंजाम दे रहे थे।"

पुलिस सूत्रों ने कहा कि बुधवार की सुरक्षा चूक के मामले में कुछ और लोगों की भूमिका का संदेह है जिससे जांच का दायरा बढ़ाया गया है। दिल्ली पुलिस के विशेष प्रकोष्ठ ने संदिग्ध मुख्य साजिशकर्ता ललित झा के बारे में और जानकारी हासिल करने के लिए एक एनजीओ के संस्थापक नीलाक्ष ऐश से संपर्क किया है। बताया जाता है कि झा कोलकाता स्थित एक एनजीओ का हिस्सा है। दिल्ली पुलिस के विशेष प्रकोष्ठ की कई टीम झा को पकड़ने की कोशिश कर रही हैं।

अधिकारियों का मानना है कि वह मुख्य साजिशकर्ताओं में से एक हो सकता है। दिल्ली पुलिस की एक टीम पहले से ही कोलकाता में है। गिरफ्तार किए गए सभी चार लोगों को शहर की एक अदालत ने बृहस्पतिवार को सात दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया।

शून्यकाल के दौरान दर्शक दीर्घा में कूदकर आरोपियों ने मचाया उत्पात
बता दें कि सागर शर्मा और मनोरंजन डी शून्यकाल के दौरान दर्शक दीर्घा से लोकसभा कक्ष में कूद गए और उन्होंने 'केन' से पीली गैस उड़ाते हुए नारेबाजी की। हालांकि, सांसदों ने उन्हें पकड़ लिया। लगभग उसी समय संसद भवन के बाहर अमोल शिंदे और नीलम ने केन से लाल और पीले रंग का धुआं फैलाते हुए "तानाशाही नहीं चलेगी" आदि नारे लगाए। सुरक्षा में चूक की यह घटना 2001 में संसद पर हुए आतंकी हमले की बरसी के दिन हुई।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि विशेष प्रकोष्ठ की जांच में दो संगठनों के नाम भी सामने आए हैं और उनकी भूमिका की जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि सभी आरोपी जांच टीम को एक ही जवाब दे रहे हैं। ललित, सागर और मनोरंजन करीब एक साल पहले मैसूर में मिले थे, जहां उन्होंने संसद में घुसने की साजिश रची थी। बाद में, उन्होंने नीलम और अमोल को भी साजिश में शामिल कर लिया।

अधिकारी ने कहा कि ललित ने अगुवाई की और मनोरंजन को मानसून सत्र के दौरान संसद के सभी प्रवेश द्वारों की रेकी करने (टोह लेने) का निर्देश दिया। उन्होंने कहा, "जुलाई में मनोरंजन दिल्ली आया और एक सांसद के नाम पर जारी आंगतुक पास से संसद के अंदर गया। वहां उसे पता चला कि जूतों की तलाशी नहीं होती है।" ललित की आखिरी लोकेशन राजस्थान-हरियाणा सीमा पर नीमराणा में मिली थी। पुलिस ने पहले कहा था कि सभी पांचों 10 दिसंबर को एकत्र हुए थे और गुरुग्राम में विशाल शर्मा के आवास पर रुके थे।

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