Edited By Radhika,Updated: 11 Mar, 2026 02:18 PM

मिडिल ईस्ट में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का सीधा असर अब भारत में दिखने लगा है। खाड़ी देशों में जारी इस संघर्ष ने Hormuz Strait के महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को बाधित कर दिया है, जिसके परिणामस्वरूप भारत में LPG की आपूर्ति बुरी तरह...
नेशनल डेस्क: मिडिल ईस्ट में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का सीधा असर अब भारत में दिखने लगा है। खाड़ी देशों में जारी इस संघर्ष ने Hormuz Strait के महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को बाधित कर दिया है, जिसके परिणामस्वरूप भारत में LPG की आपूर्ति बुरी तरह लड़खड़ा गई है।
आयात पर निर्भरता बनी मुसीबत
जानकारी के लिए बता दें कि भारत की कुल LPG का 60% से ज्यादा हिस्सा विदेशों से आता है। लेकिन हैरानी वाली बात यह है कि इस कुल आयात का 80 से 90% का हिस्सा होर्मुज मार्ग से होकर आता है, जो फिलहाल युद्ध के कारण लगभग बंद है। देश में हर साल करीब 31 मिलियन टन गैस की खपत होती है, जिसमें से बड़ा हिस्सा घरेलू उपयोग के लिए आरक्षित है।
कालाबाजारी चरम पर पहुंची कालाबाजारी
LPG की किल्लत के बीच सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं को बचाने के लिए कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की बुकिंग पर रोक लगा दी है, जिसका विपरीत असर छोटे कारोबारियों पर पड़ा है। नोएडा और दिल्ली जैसे शहरों से खबरें आ रही हैं कि कमर्शियल सिलेंडर (19 किलो) के लिए अब दुकानों पर बोलियां लग रही हैं। कीमतों में उछाल के बाद जो सिलेंडर पहले 2000 रुपये के करीब मिलता था, अब उसकी ब्लैक मार्केटिंग 2500 से 2800 रुपये तक में हो रही है। इतना ही नहीं कई छोटे रेहड़ी-पटरी वालों ने गैस न मिल पाने के कारण अपना काम बंद कर दिया है।

चाय से लेकर डिनर तक... सब हुआ महंगा
गैस की किल्लत और महंगी दरों ने सीधा असर आम आदमी की थाली पर डाला है। कल तक जो कटिंग चाय 7-10 रुपये में मिलती थी, अब वह 15 से 20 रुपये की हो गई है। पूरी-सब्जी की प्लेट में 5 रुपये तक की बढ़ोत्तरी हुई है। वहीं, गोलगप्पे की प्लेट में अब कम पीस मिल रहे हैं। कई बड़े रेस्टोरेंट्स ने अपना मेनू बदल दिया है। महंगी डिशेज जैसे 'मटर पनीर' को थाली से हटाया जा रहा है या कीमतें बढ़ाई जा रही हैं।

बिजली के उपकरणों की ओर बढ़ा रुझान
संकट को देखते हुए होटल और रेस्टोरेंट व्यवसायी अब पारंपरिक गैस सिलेंडर से तौबा कर रहे हैं। लागत कम करने और काम जारी रखने के लिए अब इलेक्ट्रिक तंदूर और इंडक्शन जैसे विकल्पों पर जोर दिया जा रहा है, ताकि एलपीजी की कमी का असर कारोबार पर न पड़े।