Edited By Radhika,Updated: 03 Mar, 2026 11:42 AM

पश्चिम एशिया में ईरान, इज़राइल और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने भारत की चिंताएं बढ़ा दी हैं। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है। ऐसी स्थिति में अगर युद्ध लंबा खिंचता है तो इससे देश में तेल और गैस की किल्लत हो सकती है।...
Fuel Crisis Alert: पश्चिम एशिया में ईरान, इज़राइल और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने भारत की चिंताएं बढ़ा दी हैं। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है। ऐसी स्थिति में अगर युद्ध लंबा खिंचता है तो इससे देश में तेल और गैस की किल्लत हो सकती है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयान, जिसमें उन्होंने युद्ध के चार सप्ताह तक चलने की आशंका जताई है, ने होर्मुज की खाड़ी में जहाजों की आवाजाही पर सवालिया निशान लगा दिए हैं।
भारत के पास कितना है स्टॉक?
औद्योगिक आंकड़ों के अनुसार, भारत की वर्तमान तैयारी इस प्रकार है:
- कच्चा तेल (Crude Oil): लगभग 17-18 दिनों की मांग के बराबर भंडार।
- पेट्रोल और डीजल: 20-21 दिनों का पर्याप्त स्टॉक।
- एलपीजी (गैस): सबसे नाजुक स्थिति यहाँ है, जहाँ केवल 10-12 दिनों का बैकअप बचा है।
चूँकि भारत अपनी 90% LNG खाड़ी देशों से ही खरीदता है, इसलिए होर्मुज की खाड़ी में रुकावट सीधे रसोई गैस की आपूर्ति को प्रभावित कर सकती है।

संकट से निपटने का 'इमरजेंसी प्लान'
पेट्रोलियम मंत्रालय और तेल क्षेत्र की दिग्गज कंपनियां आपूर्ति बनाए रखने के लिए सक्रिय हो गई हैं। सरकार निम्नलिखित ठोस कदम उठाने पर विचार कर रही है:
- निर्यात पर अंकुश: भारत अपनी रिफाइनिंग क्षमता के दम पर भारी मात्रा में डीजल और पेट्रोल निर्यात करता है। संकट बढ़ने पर इस निर्यात को रोककर घरेलू बाजार में तेल की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी।
- रूस से बढ़ेगी नजदीकी: खाड़ी देशों से होने वाली सप्लाई में बाधा को देखते हुए, भारत रूस से कच्चे तेल का आयात बढ़ाने की योजना बना रहा है। समुद्र में मौजूद रूसी तेल टैंकरों को प्राथमिकता के आधार पर भारत की ओर मोड़ने की तैयारी है।
- एलपीजी की राशनिंग और घरेलू उत्पादन: भारत अपनी जरूरत की 85-90% एलपीजी आयात करता है। आपूर्ति बाधित होने पर गैस की राशनिंग (सीमित वितरण) की जा सकती है। साथ ही, घरेलू रिफाइनरियों को एलपीजी उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।

बाजार पर असर और वैश्विक स्थिति
सोमवार को तनाव बढ़ते ही कच्चे तेल की कीमतों में 10% का उछाल देखा गया और यह 80 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुँच गया। इसके अलावा, सऊदी अरब और कतर के तेल-गैस संयंत्रों पर हमलों ने वैश्विक सप्लाई चेन को और सख्त कर दिया है। पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने जनता को आश्वस्त किया है कि सरकार स्थिति पर बारीकी से नजर रखे हुए है और देश में ईंधन की कमी नहीं होने दी जाएगी। विशेषज्ञों का एक वर्ग यह भी मान रहा है कि ईरान इस युद्ध को बहुत लंबे समय तक नहीं खींच पाएगा, जिससे जल्द ही स्थिति सामान्य होने की उम्मीद है।