Edited By Sahil Kumar,Updated: 11 Mar, 2026 04:25 PM

देश के कई शहरों में गैस आपूर्ति को लेकर परेशानी बढ़ती नजर आ रही है। दिल्ली, मुंबई, लखनऊ, भोपाल और बेंगलुरु में कमर्शियल गैस की कमी की शिकायतें सामने आई हैं, जिससे होटल और रेस्टोरेंट संचालक चिंतित हैं। कई जगह गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें देखी जा...
नेशनल डेस्कः देश के कई बड़े शहरों में गैस आपूर्ति को लेकर बढ़ती परेशानी अब होटल और रेस्टोरेंट कारोबार के लिए बड़ा संकट बनती जा रही है। दिल्ली, मुंबई, लखनऊ, भोपाल और बेंगलुरु से कमर्शियल गैस और एलपीजी की कमी की खबरें सामने आ रही हैं। कई जगह गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें लग रही हैं और होटल मालिकों का कहना है कि अगर जल्द सप्लाई सामान्य नहीं हुई तो उन्हें अपने प्रतिष्ठान बंद करने पड़ सकते हैं। हालांकि सरकार का दावा है कि गैस की उपलब्धता पर्याप्त है और स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है।
गैस एजेंसियों के बाहर लोगों की भीड़
दिल्ली में हालात ऐसे बताए जा रहे हैं कि कई गैस एजेंसियों के बाहर लोगों की भीड़ लगी हुई है। दावा किया जा रहा है कि सिलेंडर की कमी के चलते रेस्टोरेंट संचालक परेशान हैं और कुछ जगहों पर एजेंसियों से तीखी बहस तक की स्थिति बन रही है। मुंबई में भी कमर्शियल गैस की आपूर्ति प्रभावित होने की खबरें सामने आई हैं। कई होटलों का कहना है कि उनका स्टॉक खत्म होने के करीब है। गैस की कमी से होटल उद्योग के साथ-साथ अन्य व्यावसायिक क्षेत्रों पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
भोपाल में भी गैस को लेकर तनाव
भोपाल में भी गैस को लेकर तनाव की स्थिति देखी जा रही है। गैस एजेंसियों के बाहर बड़ी संख्या में लोग सिलेंडर के लिए इंतजार करते दिखाई दे रहे हैं। इसी तरह लखनऊ में दावा किया जा रहा है कि पिछले करीब एक सप्ताह से कई उपभोक्ताओं तक गैस सिलेंडर की आपूर्ति नहीं पहुंच पाई है, जिसके चलते कुछ होटल मालिकों ने कारोबार बंद करने की चेतावनी दी है। बेंगलुरु में भी गैस संकट का असर देखने को मिल रहा है। शहर का 1943 से संचालित प्रतिष्ठित रेस्टोरेंट ‘विद्यार्थी भवन’ भी गैस आपूर्ति की समस्या के कारण बंद होने की कगार पर बताया जा रहा है।
वस्तु अधिनियम 1955
इस बीच सरकार ने स्थिति को देखते हुए आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के तहत पेट्रोलियम उत्पादों और प्राकृतिक गैस की उपलब्धता तथा वितरण को नियंत्रित करने के लिए विशेष प्रावधान लागू किए हैं। इसके तहत गैस की आपूर्ति के लिए प्राथमिकताएं तय की गई हैं। सरकार के अनुसार सबसे पहले घरों में इस्तेमाल होने वाली पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) और सीएनजी पर निर्भर परिवहन क्षेत्र को प्राथमिकता दी गई है। इन दोनों क्षेत्रों में पिछले छह महीनों की औसत खपत के आधार पर 100 प्रतिशत गैस आपूर्ति जारी रखने का प्रावधान किया गया है।
दूसरे स्थान पर उद्योग और फैक्ट्रियों को रखा गया है, जहां पिछले छह महीनों की औसत खपत का 80 प्रतिशत गैस सप्लाई किए जाने का प्रावधान है। वहीं तीसरी प्राथमिकता उर्वरक संयंत्रों को दी गई है, जिन्हें औसत आपूर्ति का 70 प्रतिशत गैस उपलब्ध कराया जाएगा। सरकार का कहना है कि स्थिति नियंत्रण में है और गैस की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। सरकारी सूत्रों ने यह भी स्पष्ट किया है कि एलपीजी की सप्लाई में किसी तरह की कमी नहीं है और किसी भी गैस डिस्ट्रीब्यूटर का गोदाम खाली नहीं है। साथ ही सरकार ने चेतावनी दी है कि एलपीजी की कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
हालांकि कई शहरों में गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें और उपभोक्ताओं की बढ़ती चिंता इस बात की ओर इशारा कर रही है कि जमीनी स्तर पर लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद करने की आशंका के बीच भारत में भी तेल और गैस आपूर्ति को लेकर उच्च स्तर पर चर्चा शुरू हो गई है। इस मुद्दे पर मंगलवार को कई अहम बैठकें हुईं।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर स्थिति की जानकारी दी, जबकि पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने भी तेल और गैस आपूर्ति से जुड़े मुद्दों पर प्रधानमंत्री से चर्चा की। बताया जा रहा है कि प्रधानमंत्री मोदी ने कैबिनेट बैठक में मंत्रियों को निर्देश दिया है कि पश्चिम एशिया में चल रहे संकट का असर देश के आम लोगों पर कम से कम पड़े, इसके लिए सभी मंत्रालयों को आपसी समन्वय के साथ काम करना होगा। साथ ही संभावित चुनौतियों से निपटने के लिए पूरी तैयारी रखने को कहा गया है।