Edited By Anu Malhotra,Updated: 14 Oct, 2026 07:57 AM

तृणमूल कांग्रेस (TMC) के ममता गुट ने आरोप लगाया है कि कोलकाता के कालीघाट में पूर्व पश्चिम बंगाल मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के घर के बाहर एक महिला ने उन पर हमला करने की कोशिश की, जब वह दुर्गा पूजा पंडाल का उद्घाटन करने के लिए बाहर निकल रही थीं।
नई दिल्ली: तृणमूल कांग्रेस (TMC) के ममता गुट ने आरोप लगाया है कि कोलकाता के कालीघाट में पूर्व पश्चिम बंगाल मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के घर के बाहर एक महिला ने उन पर हमला करने की कोशिश की, जब वह दुर्गा पूजा पंडाल का उद्घाटन करने के लिए बाहर निकल रही थीं।
ममता गुट के आरोपों के मुताबिक, वह युवा महिला कालीघाट में पूर्व मुख्यमंत्री ममता के घर के बाहर पहुंची। आरोप है कि ममता बनर्जी की साड़ी खींची गई और महिला के पास चाकू मिला। ममता बनर्जी की पार्टी के कार्यकर्ताओं ने महिला को पकड़ा और बाद में उसे कालीघाट पुलिस के हवाले कर दिया। पुलिस को सौंपने से पहले, कार्यकर्ताओं ने उसे ज़मीन पर दबाकर उससे पूछताछ की, जबकि आरोपी महिला अड़ी रही।
स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, यह घटना शाम करीब 6 बजे हुई, जब महिला ममता बनर्जी की ओर दौड़ी और उन्हें "पिसी" (बुआ) कहकर संबोधित किया। आरोप है कि उसने बनर्जी पर झपटने की कोशिश की और फिर सड़क पर लेटकर गालियां देने लगी। राज्यसभा सांसद डोला सेन ने कहा कि महिला नशे में थी और उसके हाथ में चाकू था। आरोप है कि उसने खुद को ममता बनर्जी की भतीजी बताकर भीड़ में घुसने की कोशिश की।
इस घटना के बाद ममता के सहयोगियों ने पूर्व मुख्यमंत्री की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। कोलकाता पुलिस ने कहा कि आरोपी 38 वर्षीय अनुसूया साहा के खिलाफ ज़रूरी कार्रवाई की गई है। एक बयान में पुलिस ने कहा, "पूर्व मुख्यमंत्री के घर से निकलते समय एक घटना हुई। अनुसूया साहा नाम की एक महिला ने उनसे सामना किया, जिससे तीखी बहस हुई। बाद में ड्यूटी पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने महिला को हिरासत में ले लिया। इस बीच, TMC सदस्यों ने शिकायत दर्ज कराई।"
इससे पहले आज, ममता बनर्जी के गुट के सदस्यों ने कोलकाता के राजाबाज़ार इलाके में प्रदर्शन किया और SIR विवाद के बीच गांधी परिवार और अन्य INDIA ब्लॉक नेताओं के साथ बैठक करके दिल्ली से लौटने के बाद मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। पार्टी के स्टूडेंट और यूथ विंग ने राजाबाज़ार से पार्क सर्कस तक मार्च करने का प्लान बनाया था, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक दिया क्योंकि इस प्रोग्राम के लिए इजाज़त नहीं ली गई थी।
इसके बाद कार्यकर्ताओं ने राजाबाज़ार में ही विरोध प्रदर्शन किया और बीजेपी व CEC के ख़िलाफ़ नारे लगाए। ममता बनर्जी के गुट का कहना था कि पुलिस को ईमेल से जानकारी दी गई थी, जबकि कोलकाता पुलिस का कहना था कि उन्हें कोई आधिकारिक सूचना नहीं मिली और ऐसी रैली के लिए लिखित इजाज़त ज़रूरी है।
बेलेघाटा के MLA कुणाल घोष ने कहा कि यह मार्च पार्टी के स्टूडेंट और यूथ विंग ने आयोजित किया था और दावा किया कि पुलिस को पहले ही बता दिया गया था। उन्होंने आरोप लगाया, "लेकिन आज सुबह से ही पुलिस और सेंट्रल फ़ोर्स सड़क रोके हुए हैं। जो पार्टी कार्यकर्ता यहाँ आना चाहते हैं, उन्हें रोका जा रहा है। हम शांतिपूर्ण तरीक़े से ज्ञानेश कुमार के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रहे हैं। इससे बीजेपी को तकलीफ़ हुई है क्योंकि ज्ञानेश कुमार ने उन्हें फ़ायदा पहुँचाने के लिए 'वोट चोरी' की थी।"
सोमवार को सुवेंदु अधिकारी ने कहा था कि उन्होंने कोलकाता पुलिस कमिश्नर से दुर्गा पूजा के दौरान रैली की इजाज़त न देने को कहा था और ममता को घर से बाहर न निकलने की चेतावनी दी थी। उन्होंने कहा था, "हम उन्हें बाहर नहीं निकलने देंगे। मैंने CP को निर्देश दिया है कि रैली राजाबाज़ार से एक कदम भी आगे न बढ़े। ज़रूरत पड़ने पर मैंने उन्हें सेंट्रल फ़ोर्स तैनात करने के लिए कहा है।"
इन बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए TMC के ममता बनर्जी गुट ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, "सुवेंदु अधिकारी इतने परेशान क्यों हैं? और विरोध मार्च की इजाज़त न देने की बात का क्या मतलब है? शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ सेंट्रल फ़ोर्स तैनात करने की धमकी देने का क्या मतलब है? क्या यह लोकतंत्र है या मज़ाक?"