Edited By Ramanjot,Updated: 03 Feb, 2026 10:50 PM

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग और खास तौर पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
नेशनल डेस्क: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग और खास तौर पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। मंगलवार को ममता बनर्जी ने चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग लाने की मांग की और इस मुद्दे पर सभी विपक्षी दलों से समर्थन की अपील की। दरअसल, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इन दिनों राजधानी दिल्ली में हैं, जहां वे पश्चिम बंगाल में चल रहे Special Intensive Revision (SIR) को लेकर चुनाव आयोग के फैसलों का विरोध कर रही हैं।
मीटिंग अधूरी छोड़कर निकलीं ममता
एक दिन पहले ममता बनर्जी अपने प्रतिनिधिमंडल के साथ चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और अन्य आयुक्तों से मिलने पहुंची थीं। लेकिन बैठक के दौरान ही वे बाहर निकल आईं।
बाद में उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने अहंकारी रवैया अपनाया और उनके साथ अपमानजनक व्यवहार किया।
राहुल गांधी के रुख को मिला समर्थन
दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ममता बनर्जी ने दावा किया कि मतदाता सूची से हटाए जा रहे अधिकांश नाम तृणमूल कांग्रेस समर्थकों के हैं। कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त को जवाबदेह बनाने के लिए कानून में बदलाव की मांग पर ममता बनर्जी ने साफ कहा कि उनकी पार्टी भी चाहती है कि ज्ञानेश कुमार को पद से हटाया जाए।
सांसदों की संख्या पर क्या बोलीं?
मुख्यमंत्री ने माना कि तृणमूल कांग्रेस के पास संसद में पर्याप्त संख्या नहीं है, लेकिन उन्होंने कहा कि संविधान में एक प्रावधान मौजूद है, जिसे दर्ज कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि अगर कांग्रेस इस दिशा में कोई पहल करती है, तो टीएमसी भी अपने सांसदों के साथ इस पर चर्चा करेगी। जनहित के मुद्दों पर विपक्ष को एकजुट होकर काम करना चाहिए।
बीजेपी को खुली चुनौती
ममता बनर्जी ने यह भी ऐलान किया कि उनकी पार्टी आगामी विधानसभा चुनाव अकेले लड़ेगी। उन्होंने बीजेपी पर आरोप लगाया कि वह चुनाव आयोग का सहारा लेकर राजनीति करना चाहती है और चुनौती दी कि आयोग का ‘इस्तेमाल’ छोड़कर सीधे चुनावी मैदान में मुकाबला करे।
SIR पर गंभीर आरोप
सीएम बनर्जी ने दावा किया कि मतदाता सूची से हटाए जा रहे नामों में लगभग सभी तृणमूल समर्थकों के हैं। उनका आरोप है कि इस प्रक्रिया से सबसे ज्यादा दलित, आदिवासी, अल्पसंख्यक और वंचित वर्ग प्रभावित हो रहे हैं।
‘क्या देश में महा-आपातकाल?’
ममता बनर्जी ने सवाल उठाया कि पश्चिम बंगाल की आबादी में 23% अनुसूचित जाति, 6% आदिवासी और 33% मुस्लिम हैं।
उन्होंने तीखा सवाल किया “क्या इन लोगों से कहा जाएगा कि वे राज्य छोड़ दें? क्या हम बंगाल या पूरे देश में किसी तरह का महा-आपातकाल देख रहे हैं?” उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्रीय एजेंसियों और बाहरी नेताओं के जरिए बंगाल पर दबाव बनाया जा रहा है।