Edited By Ramanjot,Updated: 29 Jan, 2026 12:20 AM

तमिलनाडु की राजनीति में 2026 विधानसभा चुनाव से पहले हलचल तेज हो गई है। सत्तारूढ़ DMK और उसकी सहयोगी कांग्रेस के बीच सीट शेयरिंग और सत्ता में भागीदारी को लेकर खींचतान खुलकर सामने आ गई है।
नेशनल डेस्क: तमिलनाडु की राजनीति में 2026 विधानसभा चुनाव से पहले हलचल तेज हो गई है। सत्तारूढ़ DMK और उसकी सहयोगी कांग्रेस के बीच सीट शेयरिंग और सत्ता में भागीदारी को लेकर खींचतान खुलकर सामने आ गई है। दोनों दलों के बीच बातचीत जारी है, लेकिन फिलहाल किसी ठोस सहमति के संकेत नहीं मिल रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि गठबंधन तो बरकरार है, मगर अंदरखाने असंतोष बढ़ता जा रहा है।
कांग्रेस की बड़ी मांग, DMK का सीमित ऑफर
कांग्रेस पार्टी इस बार आक्रामक मूड में है। पार्टी ने DMK से 35 से 40 विधानसभा सीटें और सरकार में सम्मानजनक हिस्सेदारी की मांग रखी है।
पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने DMK गठबंधन के तहत 25 सीटों पर चुनाव लड़ा था, जिनमें से 18 सीटों पर जीत हासिल की थी। इसी आधार पर कांग्रेस अब अपने लिए ज्यादा सीटें चाहती है। वहीं DMK की तरफ से 27 से 32 सीटों का प्रस्ताव और साथ में एक राज्यसभा सीट देने की संभावना बताई जा रही है। लेकिन कांग्रेस इस ऑफर से संतुष्ट नहीं दिख रही।
कनिमोझी-राहुल गांधी मुलाकात, लेकिन हल नहीं निकला
इसी सियासी तनातनी के बीच DMK की सांसद और पार्टी की प्रमुख नेता कनिमोझी ने बुधवार को दिल्ली में राहुल गांधी से मुलाकात की। यह बैठक सोनिया गांधी के 10 जनपथ आवास पर करीब एक घंटे तक चली।
बैठक की अहम बातें:
बातचीत का फोकस कांग्रेस के प्रति सम्मान और समन्वय रहा। राहुल गांधी ने DMK से खरगे द्वारा गठित 5 सदस्यीय टीम से बातचीत करने का आग्रह किया। कनिमोझी ने कांग्रेस नेताओं के कुछ सार्वजनिक बयानों पर नाराज़गी जताई, जो गठबंधन की एकता को नुकसान पहुंचा सकते हैं। हालांकि बैठक का माहौल सौहार्दपूर्ण रहा, लेकिन अहम मुद्दे अभी भी अधर में हैं।
कोऑर्डिनेशन कमिटी ठप, कांग्रेस में बढ़ी नाराज़गी
सूत्रों के मुताबिक पिछले दो महीनों से गठबंधन की कोऑर्डिनेशन कमिटी की बैठक नहीं हुई। DMK की ओर से कांग्रेस की मांगों पर कोई आधिकारिक जवाब नहीं आया है। कांग्रेस ने बातचीत के लिए वरिष्ठ पर्यवेक्षक (जैसे मुकुल वासनिक) को आगे करने की मांग की। DMK, AICC प्रभारी गिरीश चोडंकर की कार्यशैली से असहज बताई जा रही है। कांग्रेस का आरोप है कि जिला स्तर पर पार्टी को अपेक्षित सम्मान नहीं मिल रहा, जिससे कार्यकर्ताओं में नाराज़गी बढ़ रही है।
आगे क्या? गठबंधन बचेगा या बदलेगा समीकरण?
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि एमके स्टालिन और राहुल गांधी के अच्छे रिश्तों के चलते मामला सुलझ सकता है। गठबंधन टूटने की संभावना फिलहाल कम है। हालांकि, कांग्रेस के कुछ नेता विजय की पार्टी (TVK) के साथ संभावित गठबंधन के विकल्प पर भी चर्चा कर रहे हैं। फिलहाल DMK-कांग्रेस साथ हैं, लेकिन सीट शेयरिंग का फॉर्मूला तय होना अभी बाकी है। आने वाले हफ्ते तमिलनाडु की राजनीति के लिए बेहद अहम रहने वाले हैं।