Edited By Parveen Kumar,Updated: 04 Jun, 2026 12:21 AM

मालवीय नगर के हौज रानी इलाका स्थित एक होटली में लगी भीषण आग में जान गंवाने वाले विवेक अग्रवाल के आखिरी शब्द थे, ''भाई, शायद हम बच न पाएं।'' यह बात उनके करीबी रिश्तेदार पुनीत गुप्ता ने बताई। गुप्ता ने इस घटना में अपने परिवार के आठ सदस्यों को खो दिया।...
नेशनल डेस्क : मालवीय नगर के हौज रानी इलाका स्थित एक होटली में लगी भीषण आग में जान गंवाने वाले विवेक अग्रवाल के आखिरी शब्द थे, ''भाई, शायद हम बच न पाएं।'' यह बात उनके करीबी रिश्तेदार पुनीत गुप्ता ने बताई। गुप्ता ने इस घटना में अपने परिवार के आठ सदस्यों को खो दिया। आग लगने की घटना में बुधवार को कुल 21 लोगों की जान चली गई।
गुप्ता ने अपनी आखिरी बातचीत का जिक्र करते हुए बताया कि गुरुग्राम के सेक्टर-46 के चार्टर्ड अकाउंटेंट विवेक ने आग लगने के दौरान उन्हें फोन किया था। उन्होंने बताया, "मैंने उनसे कहा कि वह एक रुमाल गीला करके अपना चेहरा उससे ढक लें, लेकिन उससे भी कोई फायदा नहीं हुआ। अब वह दुनिया से चले गए हैं।"
उन्होंने कहा, "हम तुरंत वहां पहुंचे, लेकिन तब तक उन सभी की मौत हो चुकी थी।'' विवेक अग्रवाल के परिवार के आठ सदस्य उनके पिता राधे श्याम अग्रवाल से मिलने दिल्ली आए थे, जिनका कई दिनों से साकेत के मैक्स अस्पताल में इलाज चल रहा था। रिश्तेदारों के अनुसार, विवेक ने फ्लोरिश स्टे बेड एंड ब्रेकफास्ट में दो कमरे बुक किए थे। मृतकों में विवेक अग्रवाल (48), उनकी पत्नी तरजिनी अग्रवाल (47), मां प्रेम लता अग्रवाल, बेटियां जीविसा और वारिया अग्रवाल, मामा और मामी अशोक और कमला गोयल (राजस्थान के किशनगढ़ निवासी) और एक अन्य रिश्तेदार झुमरी लाल गोयल शामिल हैं।
एक रिश्तेदार ने बताया कि पीड़ितों में सबसे छोटी जिविसा अपने दादा से मिलने के लिए एक दिन पहले ही बेंगलुरु से लौटी थी। रिश्तेदारों ने घटनास्थल के सुरक्षा उपायों पर सवाल उठाते हुए कहा कि हालांकि यह होटल मुख्य सड़क पर स्थित है, लेकिन वहां तक पहुंचने का रास्ता संकरी, भीड़भाड़ वाली गलियों से होकर गुजरता है और वहां आग से सुरक्षा के लिए उचित बुनियादी ढांचे का अभाव था।
एक अन्य रिश्तेदार ने बताया कि चचेरे भाई का फोन आने के बाद वह तुरंत साकेत स्थित मैक्स अस्पताल पहुंचे और कहा कि उन्होंने कभी ऐसी घटना की कल्पना भी नहीं की थी। रिश्तेदार ने कहा, "तस्वीरों को देखकर हम उन्हें पहचान नहीं पा रहे हैं। सभी बुरी तरह झुलस गए हैं।" परिवार के आठ सदस्यों की मृत्यु के बाद, विवेक के बीमार पिता राधे श्याम अग्रवाल ही परिवार में एकमात्र जीवित सदस्य हैं।