Edited By Parveen Kumar,Updated: 15 Oct, 2026 07:35 PM

कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने बृहस्पतिवार को कहा कि सरकार मतदाताओं के नाम हटाकर चुनावी नतीजों को प्रभावित करने की कोशिश कर रही है, तथा 13 करोड़ से अधिक मतदाताओं के नाम हटाना अगर मिलीभगत नहीं है, तो और क्या है।
नेशनल डेस्क : कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने बृहस्पतिवार को कहा कि सरकार मतदाताओं के नाम हटाकर चुनावी नतीजों को प्रभावित करने की कोशिश कर रही है, तथा 13 करोड़ से अधिक मतदाताओं के नाम हटाना अगर मिलीभगत नहीं है, तो और क्या है। 'ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन' (आइसा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा, स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) की नेता आइशी घोष, ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष विराज देवांग और अभिनेता प्रकाश राज समेत अन्य लोगों के साथ एक प्रेसवार्ता में दीपके ने यह भी आरोप लगाया कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर हो रहे प्रदर्शनों में लोगों को शामिल होने से रोकने के लिए राजधानी में असाधारण प्रतिबंध लगाए गए हैं।
दीपके ने कहा कि अधिकारी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर उठने वाले विरोध को दबा रहे हैं। वर्ष 2024 के लोकसभा चुनावों के परिप्रेक्ष्य में मतदाताओं के नाम हटाए जाने पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा, ''वर्ष 2024 में जीत का अंतर सिर्फ दो प्रतिशत था। तेरह करोड़ से ज़्यादा मतदाताओं के नाम हटा दिए गए।'' उन्होंने कहा, ''जहां दो प्रतिशत वोट परिणाम तय कर रहे हों, वहां आप 13 करोड़ वोट हटा रहे हैं। अगर यह 'मिलीभगत' नहीं है, तो फिर क्या है?'' वर्ष 2024 में, भारतीय जनता पार्टी ने 36.56 प्रतिशत मतों के साथ लोकसभा की 543 में से 240 सीट जीती थीं, जबकि भाजपा-नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) ने 293 सीट हासिल कीं।
प्रदर्शनकारियों पर की गई कार्रवाई को लेकर दीपके ने कहा, ''पूर्व मुख्यमंत्रियों, सांसदों और विपक्ष के नेताओं, सभी को हिरासत में ले लिया गया। भारत के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ कि रेलवे और मेट्रो सेवाएं बंद कर दी गईं।'' उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार मुख्य निर्वाचन आयुक्त को क्यों बचा रही है। दीपके ने भाजपा के 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' के नारे को किसी अन्य राजनीतिक उद्देश्य को छिपाने का जरिया बताते हुए कहा, ''...'एक राष्ट्र, एक चुनाव' तो बस एक नारा है। असल इरादा 'एक राष्ट्र, एक पार्टी, एक नेता' का है।'' उन्होंने कहा, ''जिन्होंने कभी तिरंगे को नहीं अपनाया, वे ही अब उस पर हमला कर रहे हैं। हमारे साथी कनॉट प्लेस में तिरंगा लेकर चल रहे थे, और उन सभी को हिरासत में ले लिया गया। तिरंगा थामना कब से अपराध हो गया?'' कॉजपा ने शुक्रवार को दिल्ली में कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में ''लहरा दो तिरंगा'' मार्च की घोषणा की है।
दीपके ने नागरिकों से प्रदर्शन में शामिल होने का आग्रह किया और कहा कि राष्ट्रीय ध्वज फहराना एक लोकतांत्रिक अधिकार है। उन्होंने राजनीतिक दलों से भी इसमें शामिल होने की अपील की। उन्होंने कहा, ''(नरेंद्र) मोदी (महात्मा) गांधी और (जवाहरलाल) नेहरू से बड़े नहीं हो सकते।'' बोरा ने आरोप लगाया कि पुलिस ने विरोध प्रदर्शनों को कवर कर रहे पत्रकारों को निशाना बनाया; उनके पास प्रेस पहचान-पत्र होने के बावजूद उन्हें हिरासत में ले लिया और उनके कैमरे छीन लिये। उन्होंने एक पत्रकार से जुड़ी कथित यौन उत्पीड़न की घटना का भी जिक्र किया, जिसमें प्राथमिकी दर्ज की गई है। बोरा ने पुलिस पर आरोप लगाया कि वह चुनावी अधिकारों को लेकर चिंता जताने वाले लोगों के खिलाफ बल प्रयोग कर रही है। उन्होंने कहा, ''पुलिस कानून-व्यवस्था बनाए रखने के बजाय जनता पर सख्ती कर रही है। हमने जो देखा है, यह उसका एक बेहतरीन उदाहरण है।''
बोरा ने कहा, ''आप वोट देने के अधिकार का समर्थन करने वाली आवाज़ को जेल भेज देते हैं। जब आप आम लोगों को घसीटते हैं, तो आप उन 13 करोड़ लोगों को घसीट रहे होते हैं।'' वहीं, आइशी घोष ने नागरिकों से लोकतंत्र की रक्षा के लिए एकजुट होने का आग्रह किया और कहा कि उन्हें सत्ताधारी भाजपा के बजाय लोगों पर भरोसा है। उन्होंने आरोप लगाया, ''ज्ञानेश ने पूरा देश जीतने में उनकी (भाजपा की) मदद की है।'' घोष ने कहा, ''हमें भाजपा से कोई उम्मीद नहीं है, हमें अपने नागरिकों से उम्मीद है। अब हम सभी के लिए एकजुट होने का समय आ गया है। जिस देश के लिए भगत सिंह लड़े और गांधीजी ने बलिदान दिया, हमें उस देश को बचाना है।''
उन्होंने रिसॉर्ट रिसेप्शनिस्ट अंकिता भंडारी के माता-पिता के साथ हुए बर्ताव का भी जिक्र किया और आरोप लगाया कि उन्हें घसीटा गया तथा उनके साथ बेरहमी से पेश आया गया। भंडारी की 2022 में उत्तराखंड में हत्या कर दी गई थी। घोष ने कहा, ''बलात्कारियों को माला पहनाई जा रही है।'' प्रेसवार्ता में उस समय कुछ देर के लिए बाधा आई, जब एक रिपोर्टर ने कथित तौर पर बोरा की बात के बीच में दखल देने का प्रयास किया। इसके बाद उसे वहां से बाहर ले जाया गया।