Edited By Tanuja,Updated: 24 Oct, 2026 06:08 PM

नेविल रॉय सिंघम से जुड़े संगठनों की फंडिंग को लेकर फॉक्स न्यूज की रिपोर्ट ने भारत और विदेशों में बहस तेज कर दी है। भाजपा ने कांग्रेस से राजनीतिक संपर्कों पर सवाल पूछे हैं। हालांकि, संगठनात्मक संबंध, साझा विचारधारा और विदेशी फंडिंग अलग-अलग बातें हैं।...
Washington: भारत में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के विरोध से लेकर फ्रांस और यूरोप में चल रहे आंदोलनों तक, अलग-अलग देशों के प्रदर्शनों को लेकर अमेरिकी पत्रकार असरा क्यू. नोमानी की 20 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट में 101 संगठनों का जिक्र है जो यूरोप और एशिया में जेन जी को मोहरा बना कर दंगों की आग भड़का रहे हैं।इनमें से कुछ के तार नेविल रॉय सिंघम से जुड़े बताए गए हैं। नेविल रॉय सिंघम वही नाम है जो भारत समेत 13 देशों में हुए प्रदर्शनों से जुड़े नेटवर्क को लेकर चर्चा में है। भारत में जब भी किसी बड़े मुद्दे पर सड़कें प्रदर्शनकारियों से भरती हैं, तो सवाल सिर्फ नारों का नहीं, उनके पीछे काम कर रहे संगठनों और फंडिंग के स्रोतों का भी पता लगाया जाता है। नेविल रॉय सिंघम का नाम इसी बहस के केंद्र में है। विदेशी फंडिंग और वामपंथी संगठनों के अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क पर पहले भी सवाल उठ चुके हैं। अब फॉक्स न्यूज डिजिटल की नई रिपोर्ट ने भारत से लेकर फ्रांस तक सक्रिय संगठनों के आपसी संबंधों पर बहस तेज कर दी है।
क्या है पूरा मामला?
20 अक्टूबर को प्रकाशित रिपोर्ट में उन संगठनों पर सवाल उठाए गए हैं, जो विभिन्न देशों में राजनीतिक आंदोलनों और प्रदर्शनों से जुड़े रहे हैं। रिपोर्ट में फ्रांस, भारत सहित 13 देशों में एक ही स्टाइल में हिंसा और दंगों को लेकर और अन्य देशों में सक्रिय समूहों के बीच संपर्कों और साझा राजनीतिक अभियानों का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट में प्रोग्रेसिव इंटरनेशनल सहित कुछ ऐसे संगठनों का भी जिक्र है, जिनके संबंध सिंघम के नेटवर्क से बताए जाते हैं। आलोचकों का आरोप है कि इस तरह के अंतर्राष्ट्रीय संपर्कों के जरिए अलग-अलग देशों में राजनीतिक मुद्दों को एक साझा अभियान का रूप दिया जा सकता है।
भाजपा के कांग्रेस पर तीखे सवाल
रिपोर्ट सामने आने के बाद भाजपा ने कांग्रेस को घेरते हुए सवाल उठाए हैं। पार्टी प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने दावा किया कि राहुल गांधी और सोनिया गांधी ने 10 अप्रैल 2025 को 10 जनपथ में प्रोग्रेसिव इंटरनेशनल के प्रतिनिधियों से मुलाकात की थी। भाजपा ने सवाल किया कि क्या इस संगठन और कांग्रेस के बीच मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के विरोध प्रदर्शनों को लेकर कोई समन्वय था। राहुल गांधी की वियतनाम यात्रा और नवंबर में प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर भी सवाल उठाए गए। भाजपा का आरोप है कि राहुलगांधी की विदेशी संगठनों के साथ राजनीतिक संपर्कों की जांच होनी चाहिए।
सिंघम का नाम भारत में पहली बार नहीं उछला है। 2023 में द न्यूयॉर्क टाइम्स की एक जांच रिपोर्ट में उनके वित्तीय नेटवर्क और वामपंथी संगठनों को दी गई आर्थिक मदद का उल्लेख किया गया था। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया था कि उनके नेटवर्क से जुड़े कुछ संगठन चीन समर्थक विचारों को बढ़ावा देते हैं। इसके बाद न्यूजक्लिक की विदेशी फंडिंग को लेकर जांच तेज हुई। दिल्ली पुलिस ने अक्टूबर 2023 में पोर्टल के संस्थापक-संपादक प्रबीर पुरकायस्थ और मानव संसाधन विभाग के प्रमुख अमित चक्रवर्ती को गिरफ्तार किया था। पुलिस ने विदेशी धन के इस्तेमाल और चीन समर्थक प्रचार से जुड़े आरोप लगाए थे।हालांकि न्यूजक्लिक ने भी अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों से इनकार किया था।
यूक्रेन से चीन तक, पुराने आरोपों की फेहरिस्त
सिंघम से जुड़े नेटवर्क पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी रिपोर्टें प्रकाशित हुई हैं। नवंबर 2022 में इंटेलिजेंस ऑनलाइन ने यूक्रेन को पश्चिमी समर्थन का विरोध करने वाले समूहों को आर्थिक मदद दिए जाने से संबंधित आरोपों पर रिपोर्ट की थी। जनवरी 2022 में न्यू लाइन्स मैगजीन की एक जांच में सिंघम से जुड़े नेटवर्क के माध्यम से गैर-लाभकारी संगठनों तक बड़ी रकम पहुंचने का दावा किया गया था। रिपोर्ट में कुछ संगठनों पर चीन के पक्ष में प्रचार करने और शिनजियांग में उइगर मुस्लिमों के साथ हुए कथित मानवाधिकार उल्लंघनों को कम करके दिखाने के आरोप लगाए गए थे।
पैसा कहां से आया और कहां गया ?
इस पूरे विवाद में सबसे बड़ा मुद्दा वामपंथी विचारधारा के साथ-साथ फंडिंग की पारदर्शिता और राजनीतिक गतिविधियों पर संभावित विदेशी प्रभाव का भी है। यदि किसी विदेशी व्यक्ति या संस्था ने भारत में राजनीतिक गतिविधियों को प्रभावित करने के लिए धन दिया है, तो उसके स्रोत, लेनदेन और इस्तेमाल की जांच होनी चाहिए।
कौन है नेविल रॉय सिंघम?
अमेरिकी बिजनसमेन नेविल रॉय सिंघम आईटी कंसल्टिंग कंपनी थॉटवर्क्स (ThoughWorks) का फाउंडर और पूर्व चेयरमैन हैं। सिंघम पर ऐसी संस्थाओं को फंड देने का आरोप है जो चीनी प्रोपेगेंडा को बढ़ावा देते हैं। इनमें भारत की न्यूज वेबसाइट न्यूजक्लिक भी शामिल है। न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक सिंघम के नेटवर्क ने न्यूजक्लिक को फंड किया था। 1954 में अमेरिका में में जन्मे सिंघम ने हावर्ड यूनिवर्सिटी से इकनॉमिक्स में डिग्री लेने के बाद सॉफ्टवेयर इंजीनियर के तौर पर अपना करियर शुरू किया। 1993 में उन्होंने थॉटवर्क्स की स्थापना की जो थोड़े समय में ही अपने सेक्टर में ग्लोबल लीडर बन गई। सिंघम को 2009 में फॉरेन पॉलिसी मैगजीन ने टॉप 50 ग्लोबल थिंकर्स में शामिल किया।
आरोप है कि सिंघम ने चीन के सरकारी मीडिया के प्रोपेगेंडा को बढ़ावा देने वाले ग्रुपों को करोड़ों डॉलर का फंड दिया है। सिंघम पर दिल्ली की न्यूज वेबसाइट न्यूजक्लिक को भी फंड देने का आरोप है। यह वेबसाइट चीन सरकार के प्रोपेगेंडा को बढ़ावा देने वाले कंटेट देती है। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट में कहा गया है कि सिंघम चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के तथाकथित स्मोकलेस वॉर के मुख्य किरदार हैं। शी जिनपिंग के कार्यकाल में चीन ने अपने सरकारी मीडिया के प्रभाव को बढ़ाया है। इंटरनेशनल मीडिया संस्थानों के साथ अलायंस बनाया है और अपने प्रोपेगेंडा को आगे बढ़ाने के लिए विदेशी इनफ्लूएंसर्स की मदद ली है।