Edited By Mansa Devi,Updated: 05 Feb, 2026 12:50 PM

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में तेजी से बदलाव हो रहे हैं और इसी कड़ी में गूगल अपने Gemini AI को और सक्षम बनाने की दिशा में काम कर रहा है। कंपनी एक ऐसे नए फीचर पर परीक्षण कर रही है, जिसके जरिए यह एआई यूजर के निर्देश पर रोजमर्रा के कई काम खुद...
नेशनल डेस्क: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में तेजी से बदलाव हो रहे हैं और इसी कड़ी में गूगल अपने Gemini AI को और सक्षम बनाने की दिशा में काम कर रहा है। कंपनी एक ऐसे नए फीचर पर परीक्षण कर रही है, जिसके जरिए यह एआई यूजर के निर्देश पर रोजमर्रा के कई काम खुद पूरा कर सकेगा। इस तकनीक को फिलहाल “स्क्रीन ऑटोमेशन” के नाम से जाना जा रहा है।
यूजर की जगह ऐप्स से करेगा इंटरैक्शन
नए फीचर का उद्देश्य यह है कि यूजर को अलग-अलग ऐप खोलकर काम करने की जरूरत न पड़े। अगर यह फीचर सक्रिय होता है तो यूजर सिर्फ कमांड देगा और Gemini खुद ऐप खोलकर काम कर सकता है जैसे राइड बुक करना, ऑनलाइन ऑर्डर देना या अन्य डिजिटल टास्क पूरा करना। बताया जा रहा है कि गूगल ऐप के बीटा वर्जन 17.4 में इस फीचर से जुड़ा संकेत मिला है और इसका आंतरिक कोडनेम “bonobo” रखा गया है। यह सिस्टम स्क्रीन पर मौजूद समर्थित ऐप्स के साथ यूजर की ओर से काम कर सकेगा, जिससे समय और मेहनत दोनों बचेंगे।
यूजर को मिलेगा पूरा नियंत्रण
हालांकि कंपनी ने यह भी माना है कि नई तकनीक में त्रुटि की संभावना हो सकती है। इसलिए इसमें यूजर को पूरा कंट्रोल दिया जाएगा। अगर किसी समय यूजर को लगे कि एआई गलत कार्रवाई कर रहा है, तो वह तुरंत उसे रोककर खुद नियंत्रण संभाल सकता है।
प्राइवेसी को लेकर उठी चिंता
इस फीचर के साथ डेटा सुरक्षा को लेकर कुछ सवाल भी उठे हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, जब एआई ऐप्स के साथ इंटरैक्ट करेगा तो सिस्टम सुधार के लिए कुछ स्क्रीनशॉट मानवीय समीक्षा के लिए भेजे जा सकते हैं। यह प्रक्रिया तभी लागू होगी जब यूजर “कीप एक्टिविटी” विकल्प चालू रखेगा। गूगल ने यूजर्स को सलाह दी है कि वे एआई चैट में लॉग-इन डिटेल्स, बैंकिंग या पेमेंट से जुड़ी जानकारी साझा न करें और संवेदनशील या आपातकालीन परिस्थितियों में इस सुविधा का उपयोग करने से बचें।
तकनीक की दिशा में बड़ा कदम
कुल मिलाकर, यह फीचर एआई को सिर्फ बातचीत या कंटेंट जनरेशन तक सीमित रखने के बजाय उसे वास्तविक डिजिटल काम करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। हालांकि इसे व्यापक रूप से लागू करने से पहले सुरक्षा और भरोसे से जुड़े पहलुओं पर और काम किए जाने की संभावना है।