रेलवे में तकनीकी बदलाव: अब आउटर पर ट्रेनों की अनावश्यक रुकावट होगी खत्म

Edited By Updated: 26 May, 2025 11:18 AM

now trains will not stop here and there indian

भारतीय रेलवे ने झांसी डिवीजन के महोबा–चितहरी खंड में एक अत्याधुनिक 48-फाइबर ऑप्टिकल फाइबर संचार प्रणाली को सफलतापूर्वक लागू किया है। इससे ट्रेनों की अनावश्यक रुकावटें कम होंगी और वैकल्पिक संचार माध्यम के कारण ट्रेन संचालन अधिक सुरक्षित और भरोसेमंद...

नेशनल डेस्क: भारतीय रेलवे ने झांसी डिवीजन के महोबा–चितहरी खंड में एक अत्याधुनिक 48-फाइबर ऑप्टिकल फाइबर संचार प्रणाली को सफलतापूर्वक लागू किया है। इससे ट्रेनों की अनावश्यक रुकावटें कम होंगी और वैकल्पिक संचार माध्यम के कारण ट्रेन संचालन अधिक सुरक्षित और भरोसेमंद होगा। इस नई तकनीक से यात्रियों को समयबद्ध यात्रा और कम लेट-लतीफी का लाभ मिलेगा।

ट्रेन संचालन में नई क्रांति
भारतीय रेलवे ने ट्रेनों के संचालन को सुचारु और अधिक भरोसेमंद बनाने के लिए नई तकनीक को अपनाया है। इससे अब ट्रेनों को आउटर या बीच रास्ते में अनावश्यक रूप से रुकना नहीं पड़ेगा।

कहां शुरू हुआ प्रयोग?
यह नई तकनीक झांसी डिवीजन के महोबा–चितहरी खंड में पहली बार लागू की गई है, जिसकी कुल लंबाई 11 किलोमीटर है। भविष्य में इसे देश के अन्य रेल मंडलों में भी विस्तारित किया जाएगा।

तकनीक की विशेषताएं
➤ 48-फाइबर ऑप्टिकल फाइबर केबल (OFC): तेज और सुरक्षित संचार के लिए डाली गई है।
➤ यूनिवर्सल फेल-सेफ ब्लॉक इंटरफेस (UFSBI): डार्क फाइबर्स पर मीडिया चेंजओवर के साथ स्थानांतरित किया गया है।
➤ डिजिटल एक्सल काउंटर तकनीक: डुअल OFC पर आधारित, उच्च रिडंडेंसी के लिए।


वैकल्पिक संचार प्रणाली
नई तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि किसी संचार माध्यम के फेल होने पर दूसरा विकल्प तुरंत सक्रिय हो जाता है, जिससे ट्रेन संचालन प्रभावित नहीं होता।

सुरक्षा में बढ़ोत्तरी
हाई अवेलबिलिटी डिजिटल एक्सल काउंटर सिस्टम ट्रेन की स्थिति को अधिक सटीकता से ट्रैक करता है, जिससे सुरक्षा मानकों में वृद्धि होती है।

ट्रेन संचालन में गति और भरोसा
स्टैंडबाय ब्लॉक वर्किंग और डुअल मीडिया चेंजओवर सिस्टम से रेलवे संचालन अधिक तेज और विश्वसनीय बन गया है।

यात्रियों को लाभ
अब यात्रियों को आउटर या सिग्नल पर ट्रेनों के रुकने की समस्या से काफी हद तक राहत मिलेगी। इससे समयबद्ध यात्रा सुनिश्चित होगी।

तकनीकी परीक्षण और टर्मिनेशन
सभी फाइबर्स का ट्रायल करके उन्हें महोबा और चितहरी के OFC रूम में सही तरीके से टर्मिनेट किया गया है। यह कार्य वरिष्ठ अधिकारियों और तकनीकी टीम द्वारा सफलता से किया गया।

रेल मंत्रालय की योजना
रेल मंत्रालय इस सफल प्रयोग को देखते हुए अन्य डिवीजनों में भी इस तकनीक को लागू करने की योजना बना रहा है।

 

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