Edited By Anu Malhotra,Updated: 09 Jan, 2026 10:45 AM

केरल के स्कूलों में पढ़ाई का अनुभव अब और अधिक बच्चों के अनुकूल और स्वस्थ बनने जा रहा है। राज्य सरकार ने हाल ही में ऐसी पहल की घोषणा की है, जिससे छात्रों के कंधों पर भारी-भरकम बैग का बोझ कम होगा और कक्षा में अलग-अलग बैठने की प्रथा—जैसे कि ‘बैक...
नेशनल डेस्क: केरल के स्कूलों में पढ़ाई का अनुभव अब और अधिक बच्चों के अनुकूल और स्वस्थ बनने जा रहा है। राज्य सरकार ने हाल ही में ऐसी पहल की घोषणा की है, जिससे छात्रों के कंधों पर भारी-भरकम बैग का बोझ कम होगा और कक्षा में अलग-अलग बैठने की प्रथा—जैसे कि ‘बैक बेंचर्स’—को समाप्त किया जाएगा।
यह जानकारी केरल के जनरल एजुकेशन और लेबर मंत्री वी शिवनकुट्टी ने दी। सरकार का कहना है कि यह कदम राज्य के शिक्षा क्षेत्र में गुणवत्ता सुधार और बच्चों की भौतिक एवं मानसिक सेहत को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
क्या हैं प्रमुख बदलाव?
स्टेट करिकुलम स्टीयरिंग कमेटी ने ड्राफ्ट रिपोर्ट को मंजूरी दी है, जिसमें दो बड़े सुधार प्रस्तावित किए गए हैं:
स्कूल बैग का वजन कम करना – ताकि बच्चों की पीठ और कंधों पर अनावश्यक दबाव न पड़े।
‘बैक बेंचर्स’ को हटाना – कक्षा को अधिक लोकतांत्रिक और समान बनाना, ताकि सभी बच्चों को समान अवसर मिलें और क्लास का माहौल बेहतर हो।
इन बदलावों को लागू करने से क्लासरूम का माहौल न केवल अधिक सहभागी और सहयोगी बनेगा, बल्कि छात्रों की मानसिक और शारीरिक भलाई भी सुनिश्चित होगी।
प्रक्रिया और सार्वजनिक भागीदारी
इन प्रस्तावों का प्रारंभिक अध्ययन स्टेट काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (SCERT) ने किया था। इसके बाद कमेटी की बैठक में विस्तार से चर्चा की गई और ड्राफ्ट रिपोर्ट को मंजूरी दे दी गई।
सरकार ने इसे सार्वजनिक परामर्श (Public Consultation) के लिए खोल दिया है। टीचर्स, माता-पिता, छात्र और आम जनता 20 जनवरी तक अपने सुझाव और राय SCERT की वेबसाइट पर दे सकते हैं। सार्वजनिक प्रतिक्रिया को ध्यान में रखते हुए, ये बदलाव अगले अकादमिक वर्ष से स्कूलों में लागू किए जाने का लक्ष्य है।
बदलाव से होगा स्कूल का माहौल और बच्चों का विकास
मंत्री वी शिवनकुट्टी ने कहा कि ये सुधार स्कूलों को ज्यादा बच्चों के लिए फ्रेंडली और लोकतांत्रिक बनाएंगे। कक्षा में समान बैठने की व्यवस्था और हल्का बैग बच्चों की पढ़ाई में ध्यान केंद्रित करने में मदद करेगा।
अन्य राज्य और केंद्र के नियमों की स्थिति
वहीं, राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 और RTE एक्ट 2009 के अनुसार, पहली कक्षा में प्रवेश के लिए न्यूनतम उम्र 6 साल निर्धारित है। देश के 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने इसे लागू कर लिया है। हालांकि, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, पुडुचेरी, केरल और छत्तीसगढ़ अभी तक इस नियम को पूरी तरह अपनाए नहीं हैं।