New Crypto Rules: भारत में Crypto निवेशकों के लिए नए सख्त नियम लागू, अब अकाउंट खोलने के लिए लाइव सेल्फी और लोकेशन जरूरी

Edited By Updated: 12 Jan, 2026 09:52 AM

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अगर आप क्रिप्टो में निवेश करने या किसी क्रिप्टो एक्सचेंज पर अकाउंट खोलने की सोच रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए अहम है। भारत सरकार ने क्रिप्टो सेक्टर में सुरक्षा और पहचान को लेकर सख्त नियम लागू कर दिए हैं। अब सिर्फ पैन कार्ड या किसी दस्तावेज़ के अपलोड...

नेशनल डेस्क: अगर आप क्रिप्टो में निवेश करने या किसी क्रिप्टो एक्सचेंज पर अकाउंट खोलने की सोच रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए अहम है। भारत सरकार ने क्रिप्टो सेक्टर में सुरक्षा और पहचान को लेकर सख्त नियम लागू कर दिए हैं। अब सिर्फ पैन कार्ड या किसी दस्तावेज़ के अपलोड करने से अकाउंट नहीं खुलेगा। सरकार का उद्देश्य है कि हर निवेशक की सही पहचान सुनिश्चित हो और क्रिप्टो के जरिए कोई अवैध गतिविधि न हो।

FIU ने जारी किए नए नियम
वित्तीय खुफिया इकाई (FIU) ने 8 जनवरी 2026 से प्रभावी होने वाले नए नियम जारी किए हैं। अब भारत में काम करने वाले सभी क्रिप्टो एक्सचेंज को वर्चुअल डिजिटल एसेट सर्विस प्रोवाइडर माना जाएगा। इसका मतलब है कि इन पर वही सख्ती लागू होगी, जो बैंकों और वित्तीय संस्थानों पर होती है।

अकाउंट बनाते समय लाइव सेल्फी अनिवार्य
नए नियमों के अनुसार, अकाउंट बनाने के समय लाइव सेल्फी देना होगा। यह कोई सामान्य फोटो नहीं होगी। इसमें सॉफ्टवेयर यह सुनिश्चित करेगा कि फोटो असली व्यक्ति की है। यूजर से आंख झपकाने या सिर हिलाने के लिए कहा जा सकता है, जिससे फर्जी फोटो या डीपफेक जैसी धोखाधड़ी रोकी जा सके।

लोकेशन और IP एड्रेस रिकॉर्ड
अब एक्सचेंज यह भी रिकॉर्ड करेंगे कि यूजर किस जगह और कब अकाउंट बना रहा है। इसमें लोकेशन, तारीख, समय और आईपी एड्रेस शामिल होंगे। इससे गलत गतिविधियों का पता लगाना आसान होगा।

बैंक अकाउंट वेरिफिकेशन
यूजर का बैंक अकाउंट सत्यापित करने के लिए 1 रुपये का टेस्ट ट्रांजेक्शन जरूरी होगा। इसे पेननी ड्रॉप विधि कहा जाता है। इससे यह सुनिश्चित होगा कि बैंक अकाउंट चालू है और वही व्यक्ति इसे चला रहा है जो क्रिप्टो अकाउंट खोल रहा है।

दो पहचान पत्र और OTP वेरिफिकेशन
अब सिर्फ पैन कार्ड से काम नहीं चलेगा। यूजर को पैन के साथ आधार, पासपोर्ट या वोटर आईडी में से कोई एक देना होगा। इसके अलावा मोबाइल और ईमेल OTP वेरिफिकेशन भी अनिवार्य होगा, ताकि फर्जी अकाउंट न बन पाए।

हाई रिस्क यूजर्स की सख्त निगरानी
जो यूजर उच्च जोखिम श्रेणी में आते हैं, जैसे विदेशों से जुड़े अकाउंट या राजनीतिक रूप से संवेदनशील लोग, उनकी केवाईसी हर छह महीने में अपडेट होगी। बाकी सामान्य यूजर्स की केवाईसी साल में एक बार होगी।

ICO और टोकन लॉन्च पर नियंत्रण
FIU ने कहा कि ICO और टोकन लॉन्च में धोखाधड़ी का खतरा ज्यादा है। ऐसे मामलों को नियंत्रित किया जाएगा और ऐसे क्रिप्टो टूल्स जिनसे लेन-देन छुपाया जा सकता है, उन्हें भी रोका जाएगा।

यूजर डेटा पांच साल तक रखना होगा
क्रिप्टो एक्सचेंज को यूजर की पहचान, पता और लेन-देन का पूरा डेटा कम से कम पांच साल तक सुरक्षित रखना होगा। अगर कोई जांच चल रही है, तो डेटा जांच पूरी होने तक सुरक्षित रहेगा।

आम निवेशकों के लिए असर
इन नए नियमों का उद्देश्य केवल गलत निवेशकों और धोखाधड़ी रोकना है। आम निवेशकों को घबराने की जरूरत नहीं है। लेकिन अब क्रिप्टो अकाउंट खोलने की प्रक्रिया अधिक प्रोसेस-ओरिएंटेड होगी, जिससे बाजार अधिक सुरक्षित और भरोसेमंद बनेगा।

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