PAK : पंजाब में 5 साल में जेंडर आधारित हिंसा के 82% मामले दर्ज, रिपोर्ट में सामने आए चौंकाने वाले आंकड़े

Edited By Updated: 02 Oct, 2026 05:46 PM

pak 82 of gender based violence cases in punjab recorded over 5 years report

पंजाब प्रांत में वर्ष 2021 से 2025 के बीच देश में दर्ज कुल जेंडर आधारित हिंसा के मामलों में करीब 82 प्रतिशत मामले सामने आए। ‘पीस एंड जस्टिस नेटवर्क पाकिस्तान’ की ‘नेशनल जेंडर-बेस्ड वायलेंस क्राइम रिपोर्ट 2021-25’ में यह जानकारी दी गई है।

पाकिस्तान : पंजाब प्रांत में वर्ष 2021 से 2025 के बीच देश में दर्ज कुल जेंडर आधारित हिंसा के मामलों में करीब 82 प्रतिशत मामले सामने आए। ‘पीस एंड जस्टिस नेटवर्क पाकिस्तान’ की ‘नेशनल जेंडर-बेस्ड वायलेंस क्राइम रिपोर्ट 2021-25’ में यह जानकारी दी गई है।

रिपोर्ट के अनुसार, इस पांच साल की अवधि में पंजाब में घरेलू हिंसा के 14,824 मामले दर्ज किए गए। इनमें 3,746 मामलों में महिलाओं की हत्या की गई। इसके अलावा 830 ‘ऑनर किलिंग’ और आग से जलाने के 442 मामले सामने आए। आग से जलाने की घटनाओं में 143 एसिड अटैक और 299 स्टोव से जलाने के मामले शामिल हैं।

यौन हिंसा के 20 हजार से ज्यादा मामले 

रिपोर्ट में यौन हिंसा को भी जेंडर आधारित हिंसा की प्रमुख श्रेणियों में शामिल किया गया है। पंजाब में 2021 से 2025 के बीच यौन हिंसा के 20,560 मामले दर्ज हुए। इनमें बलात्कार के 16,827, सामूहिक बलात्कार के 2,183, हिरासत में यौन हिंसा के 189 और परिवार के सदस्यों द्वारा यौन शोषण के 1,361 मामले शामिल हैं।

अपहरण के 90 हजार से ज्यादा मामले

रिपोर्ट के मुताबिक, पंजाब में इस अवधि के दौरान अपहरण और अगवा करने के मामले सबसे बड़ी श्रेणी रहे। कुल 90,965 मामले दर्ज किए गए। इसके अलावा जेंडर आधारित हिंसा के 68,165 ऐसे मामले सामने आए, जिन्हें रिपोर्ट में अलग-अलग सूचीबद्ध श्रेणियों में वर्गीकृत नहीं किया गया।

2021 से 2025 तक लगातार बढ़े मामले

आंकड़ों के अनुसार, पंजाब में 2021 में जेंडर आधारित हिंसा के 23,032 मामले दर्ज हुए थे। 2022 में यह संख्या बढ़कर 28,080, 2023 में 35,238 और 2024 में 52,824 हो गई। 2025 में दर्ज मामलों की संख्या बढ़कर 56,613 पहुंच गई।

अधिक मामले दर्ज होने की वजह सिर्फ ज्यादा हिंसा नहीं

रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि पंजाब में मामलों की अधिक संख्या का मतलब यह जरूरी नहीं है कि वहां हिंसा की घटनाएं अन्य क्षेत्रों की तुलना में अधिक हैं। बेहतर रिपोर्टिंग व्यवस्था, पुलिस और न्यायिक संस्थानों तक आसान पहुंच तथा लोगों में बढ़ती जागरूकता के कारण भी अधिक मामले दर्ज हो सकते हैं।

रिपोर्ट ने यह भी चेतावनी दी है कि पुलिस के आंकड़े केवल उन घटनाओं को दर्शाते हैं, जो औपचारिक रिपोर्टिंग व्यवस्था के तहत दर्ज होती हैं। इसलिए इन आंकड़ों से महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ होने वाली हिंसा की पूरी तस्वीर सामने नहीं आती।

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