Post office की इस स्कीम में ₹2,50,000 जमा करें और पाएं ₹1,16,062 का फिक्स रिटर्न

Edited By Updated: 05 Jan, 2026 08:38 AM

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अगर आप ऐसे निवेश विकल्प की तलाश में हैं जहां पूंजी पूरी तरह सुरक्षित रहे, रिटर्न पहले से तय हो और बाजार के उतार-चढ़ाव का कोई असर न पड़े, तो पोस्ट ऑफिस की नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट (NSC) योजना आपके लिए एक मजबूत विकल्प बन सकती है। भारत सरकार द्वारा...

नेशनल डेस्क: अगर आप ऐसे निवेश विकल्प की तलाश में हैं जहां पूंजी पूरी तरह सुरक्षित रहे, रिटर्न पहले से तय हो और बाजार के उतार-चढ़ाव का कोई असर न पड़े, तो पोस्ट ऑफिस की नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट (NSC) योजना आपके लिए एक मजबूत विकल्प बन सकती है। भारत सरकार द्वारा समर्थित यह स्कीम खासतौर पर उन निवेशकों के बीच लोकप्रिय है, जो जोखिम से दूर रहकर स्थिर कमाई चाहते हैं।

सुरक्षित निवेश के साथ टैक्स में राहत

नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें निवेश करने पर न सिर्फ रिटर्न की गारंटी मिलती है, बल्कि आयकर अधिनियम की धारा 80C के तहत टैक्स बचाने का भी मौका मिलता है। यानी एक ही निवेश से सुरक्षा, निश्चित रिटर्न और टैक्स छूट—तीनों फायदे मिलते हैं।

ब्याज दर और रिटर्न का पूरा गणित

वर्तमान में NSC पर 7.7 प्रतिशत सालाना ब्याज दिया जा रहा है। इस योजना में ब्याज की गणना सालाना आधार पर होती है, लेकिन निवेशक को इसका भुगतान पांच साल की मैच्योरिटी पूरी होने पर एक साथ मिलता है। निवेश के समय तय की गई ब्याज दर पूरी अवधि के लिए लॉक हो जाती है, जिससे भविष्य में किसी तरह की अनिश्चितता नहीं रहती।

NSC में हर साल मिलने वाला ब्याज दोबारा निवेश माना जाता है। इसी वजह से अंतिम वर्ष को छोड़कर हर साल का ब्याज भी 80C के तहत टैक्स छूट के दायरे में आता है, जिससे टैक्स प्लानिंग और बेहतर हो जाती है।

₹2.5 लाख निवेश पर कितना मिलेगा?

कंपाउंडिंग इंटरेस्ट के आधार पर NSC का रिटर्न तय किया जाता है। यदि कोई निवेशक एकमुश्त ₹2,50,000 इस स्कीम में लगाता है, तो 7.7 प्रतिशत सालाना ब्याज दर के हिसाब से पांच साल बाद उसे करीब ₹1,16,062 का फिक्स रिटर्न मिलता है। यानी मैच्योरिटी पर कुल रकम लगभग ₹3,66,062 हो जाती है।

कौन कर सकता है निवेश?

इस योजना में सभी भारतीय नागरिक निवेश कर सकते हैं। हालांकि, एनआरआई को इसमें निवेश की अनुमति नहीं है। अगर कोई व्यक्ति निवेश के बाद एनआरआई बन जाता है, तो वह मैच्योरिटी तक सर्टिफिकेट अपने पास रख सकता है।  वयस्क अपने नाम से, अभिभावक नाबालिग या मानसिक रूप से असमर्थ व्यक्ति के नाम पर और 10 वर्ष से अधिक उम्र के नाबालिग स्वयं भी NSC में निवेश कर सकते हैं। ध्यान देने वाली बात यह है कि ट्रस्ट और HUF इस स्कीम में सीधे निवेश नहीं कर सकते, हालांकि HUF का कर्ता अपने व्यक्तिगत नाम से निवेश कर सकता है।

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