रैपिडो पर 10 लाख रुपए का जुर्माना, ग्राहकों पर बनाया जा रहा था किराया बढ़ाने का दबाव, उबर-ओला को भी नोटिस जारी

Edited By Updated: 16 Sep, 2026 08:51 AM

rapido fined rs 10 lakh for pressuring customers to pay higher fares

राइड-हेलिंग प्लेटफॉर्म रैपिडो पर 10 लाख रुपए का जुर्माना लगाया है। एक आधिकारिक बयान का हवाला देते हुए समाचार एजेंसी PTI ने बताया कि सेंट्रल कंज्यूमर प्रोटेक्शन अथॉरिटी (CCPA) ने गलत व्यापार तौर-तरीकों, भ्रामक विज्ञापनों, अनुचित अनुबंध शर्तों और...

नई दिल्ली : राइड-हेलिंग प्लेटफॉर्म रैपिडो पर 10 लाख रुपए का जुर्माना लगाया है। एक आधिकारिक बयान का हवाला देते हुए समाचार एजेंसी PTI ने बताया कि सेंट्रल कंज्यूमर प्रोटेक्शन अथॉरिटी (CCPA) ने गलत व्यापार तौर-तरीकों, भ्रामक विज्ञापनों, अनुचित अनुबंध शर्तों और "राइड कन्फर्म होने से पहले राइडर्स को ज्यादा पैसे देने के लिए उकसाने वाले डार्क पैटर्न" के इस्तेमाल के लिए यह कार्रवाई की। 

रैपिडो चलाने वाली कंपनी रोपेन ट्रांसपोर्टेशन सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ यह कार्रवाई भारत में कैब और बाइक-टैक्सी एग्रीगेटर प्लेटफॉर्म्स की पूरे सेक्टर में की गई जांच के बाद की गई है। यह जांच प्री-राइड टिपिंग और डायनामिक प्राइसिंग से जुड़े तौर-तरीकों पर केंद्रित थी। रिपोर्ट के अनुसार CCPA ने उबर, ओला, रैपिडो और नम्मा यात्री को नोटिस भी जारी किए हैं जिनमें उन्हें 'डार्क पैटर्न की रोकथाम और विनियमन के लिए दिशानिर्देश, 2023' का पालन करने का निर्देश दिया गया है। 

डार्क पैटर्न का मतलब ऐसे भ्रामक यूजर-इंटरफेस डिजाइन से है जो उपभोक्ताओं को ऐसे विकल्प चुनने के लिए हेरफेर करते हैं या गुमराह करते हैं जो वे शायद नहीं चुनते। विभिन्न प्लेटफॉर्म्स की जांच के दौरान, अथॉरिटी ने पाया कि "रैपिडो ऐप राइडर की बुकिंग प्रोसेस होने के दौरान 'कीमत जितनी ज्यादा होगी, राइड मिलने की संभावना उतनी ही ज्यादा होगी' और 'कैप्टन 60 रुपए में राइड स्वीकार नहीं कर रहे हैं। +10, +20, +30 जोड़ने का प्रयास करें' जैसे प्रॉम्प्ट दिखाता था"।

रेगुलेटर ने कहा कि उसकी जांच में पाया गया कि रैपिडो का एल्गोरिदम पहले राइडर को किराया बताता था, जिसके बाद राइडर उस कीमत पर राइड बुक कर सकता था। इसके बाद ऐप राइडर को अतिरिक्त राशि का भुगतान करने के लिए कहता था, क्योंकि ड्राइवर मूल किराया स्वीकार नहीं कर रहे थे। CCPA ने कहा कि इस तरीके से यह गलत धारणा बनती थी कि राइडर को जल्दी कैब मिलने की संभावना ज्यादा पैसे देने पर निर्भर करती है। चूंकि राइडर पहले ही बुकिंग के लिए सहमत हो चुका होता था, इसलिए किराए पर बातचीत करने की गुंजाइश कम होती थी। 

अथॉरिटी ने इस तरीके को "कन्फर्म शेमिंग" के रूप में वर्गीकृत किया, जो 2023 के दिशानिर्देशों के तहत पहचाना गया एक डार्क पैटर्न है। अथॉरिटी ने कहा कि इससे जल्दबाजी और राइड खोने का डर पैदा होता था, अगर उपभोक्ता ज्यादा पैसे देने के लिए सहमत नहीं होता था। 

CCPA ने रैपिडो के 'अपनी कीमत तय करें' (सेट योर प्राइस) स्लाइडर की भी जांच की और पाया कि इसे इस तरह से कलर-कोडेड किया गया था जो राइडर्स के कीमत संबंधी फैसलों को प्रभावित कर सकता था। अथॉरिटी ने कहा कि बुकिंग के समय दिखाए गए किराए में दूरी, यात्रा का समय, ट्रैफिक, टोल और ड्राइवर को दिए जाने वाले पैसे जैसी चीजें पहले से ही शामिल होती हैं। उसे इस बात का कोई कारण नहीं मिला कि यात्रा शुरू होने से पहले उसी राइड के लिए यात्रियों से अतिरिक्त पैसे देने को कहा जाए।

CCPA ने यह भी कहा कि टिप आम तौर पर अपनी मर्जी से दिया जाने वाला पैसा होता है और इसे सर्विस देने की शर्त के तौर पर नहीं पेश किया जाना चाहिए। उसने कहा कि टिप के मामले में रैपिडो की दलीलें खारिज कर दी गईं। चीफ कमिश्नर निधि खरे और कमिश्नर अनुपम मिश्रा की अगुवाई वाली CCPA ने कहा कि इस मामले में उबर और ओला की जांच अभी चल रही है। 

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