प्रदर्शनकारियों की हिरासत पर SC सख्त, बोला- गैर-कानूनी हिरासत न हो, इंटरनेट और मेट्रो सेवाएं बहाल करें

Edited By Updated: 11 Oct, 2026 01:15 PM

sc stern on detention of protesters orders no illegal detentions and directs re

सुप्रीम कोर्ट ने रविवार को निर्देश दिया कि शांतिपूर्ण ढंग से इकट्ठा होने वाले लोगों को गैर-कानूनी रूप से हिरासत में न लिया जाए। कोर्ट ने केंद्र सरकार को एक याचिका पर नोटिस भी जारी किया। इस याचिका में कोर्ट के उस निर्देश के कथित उल्लंघन के लिए...

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने रविवार को निर्देश दिया कि शांतिपूर्ण ढंग से इकट्ठा होने वाले लोगों को गैर-कानूनी रूप से हिरासत में न लिया जाए। कोर्ट ने केंद्र सरकार को एक याचिका पर नोटिस भी जारी किया। इस याचिका में कोर्ट के उस निर्देश के कथित उल्लंघन के लिए अवमानना ​​की कार्यवाही की मांग की गई थी, जिसमें कहा गया था कि CJP विरोध-प्रदर्शन के कारण दिल्ली में मेट्रो और ट्रेन सेवाओं पर "पूरी तरह से रोक" नहीं लगनी चाहिए।

मेट्रो चले इंटरनेट सेवा बहार हो
एक विशेष सुनवाई में, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा कि वे यह सुनिश्चित करें कि दिल्ली मेट्रो अपने सामान्य शेड्यूल के अनुसार चले और कानून-व्यवस्था की स्थिति को ध्यान में रखते हुए इंटरनेट सेवाओं में कोई रुकावट न आए। "9 अक्टूबर, 2026 के हमारे पिछले आदेश के उल्लंघन और 10 अक्टूबर, 2026 को दिल्ली में बड़ी संख्या में लोगों को गैर-कानूनी तरीके से हिरासत में लेने के आरोपों वाली अर्जेंट याचिकाओं को देखते हुए, यह कोर्ट एक ज़रूरी सुनवाई के लिए इकट्ठा हुआ था।

सीनियर वकील बोले-  सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का खुलेआम उल्लंघन
बेंच ने कहा, "सीनियर वकीलों ने बताया कि निर्देशों का खुलेआम उल्लंघन हुआ -- मेट्रो रेलवे नहीं चल रही थी, नई दिल्ली और निज़ामुद्दीन रेलवे स्टेशन बंद थे, कोई ट्रैफ़िक एडवाइज़री जारी नहीं की गई थी और बड़ी संख्या में लोगों को बेवजह परेशान किया गया और गैर-कानूनी तरीके से हिरासत में लिया गया, यहाँ तक कि उन इलाकों में भी जहाँ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 163 के तहत रोक लगाने वाला आदेश लागू नहीं था।"

अवमानना ​​की कार्रवाई की मांग
सुप्रीम कोर्ट ने मेहता से यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि वकीलों, पत्रकारों और अन्य लोगों को उनके पेशेवर काम करने में कोई रुकावट न आए।सुनवाई के दौरान, मेहता ने बताया कि 10 अक्टूबर को मेट्रो नेटवर्क के 303 स्टेशनों में से सिर्फ़ 45 स्टेशनों पर एंट्री और एग्ज़िट पर रोक लगाई गई थी।जैसे ही सुनवाई शुरू हुई, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह सभी वकीलों की बात सुनेगा, क्योंकि वह इस मामले में कोर्ट के निर्देशों के खुलेआम उल्लंघन के लिए अधिकारियों के खिलाफ़ अवमानना ​​की कार्रवाई की मांग करने वाली याचिका पर सुनवाई कर रहा था।

नेताओं की हिरासत के खिलाफ़
सुप्रीम कोर्ट राजनीतिक नेताओं की हिरासत के खिलाफ़ सीनियर वकील मेनका गुरुस्वामी द्वारा दायर 'हेबियस कॉर्पस' (बंदी प्रत्यक्षीकरण) याचिका पर भी सुनवाई कर रहा था। वकील शैलेंद्र मणि त्रिपाठी द्वारा दायर अवमानना ​​याचिका में केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन, दिल्ली पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार और दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन की चेयरपर्सन डी. थारा को प्रतिवादी बनाया गया है।

57 मेट्रो स्टेशन बंद
याचिका में सुप्रीम कोर्ट के 9 अक्टूबर के आदेश का ज़िक्र किया गया था, जो विरोध प्रदर्शन के कारण 57 मेट्रो स्टेशनों को बंद करने और दिल्ली आने वाली ट्रेनों को रद्द करने के खिलाफ़ एक अलग याचिका पर सुनवाई के दौरान पारित किया गया था। यह विरोध प्रदर्शन CJP और कुछ छात्र संगठनों ने चुनाव आयोग के कामकाज में कथित अनियमितताओं को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञान कुमार के खिलाफ़ बुलाया था। सरकार ने शनिवार को जंतर-मंतर पर बड़े पैमाने पर होने वाले विरोध प्रदर्शन को नाकाम कर दिया। इसके लिए अभूतपूर्व सुरक्षा इंतज़ाम किए गए और 7,000 से ज़्यादा प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया, जिनमें CJP नेता अभिजीत भी शामिल थे।" डिपके, विपक्ष के कई नेता और यूट्यूबर ध्रुव राठी।

Related Story

Trending Topics

img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!