Edited By Sahil Kumar,Updated: 20 Jan, 2026 07:50 PM
चांदी की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के बाद अब बड़ी गिरावट के खतरे में हैं। एक्सपर्ट्स के मुताबिक चांदी ओवरवैल्यूड हो चुकी है और पीक से 30 फीसदी तक टूट सकती है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 100 डॉलर और घरेलू बाजार में 3.25–3.30 लाख रुपये के बाद करेक्शन...
नेशनल डेस्कः चांदी की कीमतें जहां एक ओर रिकॉर्ड ऊंचाई पर हैं, वहीं दूसरी ओर बाजार में बड़ी गिरावट की आशंका भी तेज हो गई है। जानकारों का कहना है कि मौजूदा तेजी के बाद चांदी में 1 लाख रुपये या उससे ज्यादा की गिरावट देखने को मिल सकती है। एक्सपर्ट्स यहां तक मान रहे हैं कि चांदी करीब 45 साल पुराना इतिहास दोहरा सकती है, जब 1980 में पीक पर पहुंचने के बाद इसके दाम महज दो महीनों में 70 फीसदी तक टूट गए थे। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या मौजूदा स्तरों पर चांदी में निवेश सुरक्षित है या निवेशकों को किसी बड़े झटके के लिए तैयार रहना चाहिए।
इंटरनेशनल और घरेलू टारगेट के बाद गिरावट की आशंका
बाजार जानकारों के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी का अगला टारगेट 100 डॉलर प्रति औंस का है, जबकि फिलहाल यह करीब 93 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रही है। वहीं, घरेलू वायदा बाजार (MCX) में चांदी का टारगेट 3.25 से 3.30 लाख रुपये प्रति किलोग्राम बताया जा रहा है। मौजूदा समय में चांदी 3.20 लाख रुपये से नीचे है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इन टारगेट स्तरों तक पहुंचने के बाद चांदी में तेज गिरावट देखने को मिल सकती है।
क्यों आ सकती है चांदी में बड़ी गिरावट?
टैरिफ टेंशन में कमी की संभावना:
हालिया तेजी की बड़ी वजह अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से जुड़ी टैरिफ टेंशन रही है, जिसके चलते निवेशकों ने सेफ हेवन के तौर पर सोना-चांदी खरीदी। हालांकि, जानकारों का कहना है कि यूरोप और मिडिल ईस्ट पर लगाए गए टैरिफ अमेरिका के लिए भी नुकसानदेह हो सकते हैं। ऐसे में टैरिफ में राहत मिलने की संभावना है, जिससे कीमती धातुओं पर दबाव आ सकता है।
डॉलर इंडेक्स में मजबूती:
बीते एक महीने में डॉलर इंडेक्स में करीब 1 फीसदी की मजबूती देखने को मिली है। अगर डॉलर इंडेक्स में आगे और रिकवरी आती है, तो इसका सीधा असर चांदी की कीमतों पर नकारात्मक पड़ सकता है।
मेटल्स रिप्लेसमेंट थ्योरी:
सोना और चांदी दोनों ही रिकॉर्ड ऊंचाई पर हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इतनी ऊंची कीमतों पर चांदी से आगे रिटर्न की गुंजाइश सीमित हो जाती है। ऐसे में निवेशकों का रुझान कॉपर और एल्यूमीनियम जैसे दूसरे मेटल्स की ओर बढ़ सकता है, जिससे चांदी की मांग और कीमत दोनों पर असर पड़ेगा।
गोल्ड-सिल्वर रेश्यो:
फिलहाल गोल्ड-सिल्वर रेश्यो करीब 50 के स्तर पर है, जो 14 साल का निचला स्तर माना जा रहा है। इसका मतलब है कि चांदी की तुलना में सोना महंगा है। जानकारों का मानना है कि यह रेश्यो आगे बढ़ सकता है, जो चांदी की कीमतों में गिरावट का संकेत देता है।
फेड रेट कट पहले से डिस्काउंट:
महंगाई और रोजगार से जुड़े आंकड़ों के बाद फेडरल रिजर्व की संभावित रेट कट को बाजार पहले ही डिस्काउंट कर चुका है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, अब फेड की टिप्पणी ज्यादा अहम होगी। ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि जनवरी के बाद मई तक किसी बड़े रेट कट की संभावना कम है, जिससे कीमती धातुओं पर दबाव बढ़ सकता है।
बीते एक महीने में 54 फीसदी की तेजी
आंकड़ों पर नजर डालें तो बीते एक महीने में चांदी की कीमतों में करीब 54 फीसदी का उछाल देखने को मिला है। 17 दिसंबर को चांदी पहली बार 2 लाख रुपये प्रति किलो पर बंद हुई थी, जबकि 19 जनवरी को यह 3 लाख रुपये के स्तर को पार कर गई। यानी महज एक महीने में चांदी करीब 1 लाख रुपये महंगी हो चुकी है।
30 फीसदी तक गिर सकती हैं कीमतें
जानकारों का कहना है कि चांदी पीक से 30 फीसदी या उससे ज्यादा टूट सकती है। अगर कीमतें 3.25–3.30 लाख रुपये तक जाती हैं, तो वहां से 1 लाख रुपये या उससे ज्यादा की गिरावट संभव है। ऐसे में चांदी के दाम 2.30 लाख रुपये प्रति किलो तक आ सकते हैं।
केडिया एडवाइजरी के डायरेक्टर अजय केडिया के मुताबिक, “3 लाख रुपये से ऊपर चांदी में निवेश करके भविष्य में ज्यादा रिटर्न की उम्मीद करना मुश्किल है। इतनी महंगी चांदी की मांग घट सकती है।” उन्होंने यह भी कहा कि सोलर पैनल, ईवी और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में चांदी के विकल्प तलाशे जा रहे हैं। महंगी चांदी के इस्तेमाल से प्रोडक्ट्स की कीमतें बढ़ सकती हैं, जिसे मैन्युफैक्चरर्स शायद स्वीकार न करें।
क्या 1980 जैसा इतिहास दोहराएगी चांदी?
इतिहास पर नजर डालें तो 1980 में चांदी 50 डॉलर प्रति औंस के पीक पर पहुंची थी और इसके बाद सिर्फ दो महीनों में 70 फीसदी तक टूट गई थी। वहीं, 2011 में भी चांदी 50 डॉलर प्रति औंस तक पहुंचने के बाद अगले पांच महीनों में करीब 32 फीसदी गिर गई थी। एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर इस बार चांदी 3.25–3.30 लाख रुपये के स्तर पर पहुंचती है, तो उसके बाद इसी तरह का बड़ा करेक्शन देखने को मिल सकता है।