Edited By Anu Malhotra,Updated: 20 Jan, 2026 07:29 PM

भारतीय संस्कृति में सोना और चांदी खरीदना केवल निवेश नहीं, बल्कि एक परंपरा है। आपने अक्सर देखा होगा कि जब भी हम किसी ज्वेलरी शॉप या सुनार के पास जाते हैं, तो वह कीमती जेवरातों को हमेशा गुलाबी रंग के कागज में लपेटकर देता है। क्या आपने कभी सोचा है कि...
नेशनल डेस्क: भारतीय संस्कृति में सोना और चांदी खरीदना केवल निवेश नहीं, बल्कि एक परंपरा है। आपने अक्सर देखा होगा कि जब भी हम किसी ज्वेलरी शॉप या सुनार के पास जाते हैं, तो वह कीमती जेवरातों को हमेशा गुलाबी रंग के कागज में लपेटकर देता है। क्या आपने कभी सोचा है कि इसके पीछे का वैज्ञानिक या मनोवैज्ञानिक कारण क्या है?
चमक और आकर्षण का राज: क्यों सुनार चुनते हैं सिर्फ गुलाबी कागज?
सोने-चांदी की खरीदारी के दौरान गुलाबी कागज का इस्तेमाल केवल एक इत्तेफाक नहीं है, बल्कि इसके पीछे कई सोची-समझी वजहें हैं:
1. चमक को उभारना (Visual Enhancement)
गुलाबी रंग का कागज आभूषणों की चमक को बढ़ाने का काम करता है। विशेष रूप से जब चांदी को गुलाबी बैकग्राउंड पर रखा जाता है, तो इसकी सफेद चमक और भी ज्यादा निखर कर आती है। यह कंट्रास्ट ग्राहकों का ध्यान अपनी ओर खींचता है और जेवर पहले से ज्यादा आकर्षक लगने लगते हैं।
2. खरोंच और दाग से सुरक्षा
सोना और चांदी बहुत ही नरम धातुएं होती हैं, जिन पर बहुत जल्दी खरोंच (Scratches) लग सकते हैं। गुलाबी कागज एक सुरक्षा परत (Protective Layer) का काम करता है। चूंकि सुनार को जेवरों को धूल और घर्षण से बचाने के लिए किसी न किसी कागज का इस्तेमाल करना ही होता है, इसलिए वे ऐसे रंग का चुनाव करते हैं जो सुरक्षा के साथ-साथ खूबसूरती भी बढ़ाए।
3. शुभ और समृद्धि का प्रतीक
भारतीय परंपरा में गुलाबी और लाल जैसे रंगों को खुशी, सौभाग्य और लक्ष्मी (धन) का प्रतीक माना जाता है। चूंकि सोना-चांदी खरीदना एक शुभ अवसर होता है, इसलिए गुलाबी कागज का इस्तेमाल उस खुशी और सकारात्मकता को दर्शाता है।
4. ध्यान खींचने वाली पैकेजिंग
ज्वेलरी मार्केट में प्रजेंटेशन का बहुत महत्व है। गुलाबी कागज में लिपटे हुए गहने प्रीमियम और खास महसूस कराते हैं। यह ग्राहकों के मन में एक भरोसेमंद और पारंपरिक छवि बनाता है।