Edited By jyoti choudhary,Updated: 31 Jan, 2026 12:30 PM

कमोडिटी बाजार में शुक्रवार, 30 जनवरी को भारी उथल-पुथल देखने को मिली। पिछले कुछ हफ्तों से रॉकेट की रफ्तार से भाग रही चांदी में अचानक भारी गिरावट आई। रिकॉर्ड हाई से लुढ़ककर सोने-चांदी ने निवेशकों को चौंका दिया।
बिजनेस डेस्कः कमोडिटी बाजार में शुक्रवार, 30 जनवरी को भारी उथल-पुथल देखने को मिली। पिछले कुछ हफ्तों से रॉकेट की रफ्तार से भाग रही चांदी में अचानक भारी गिरावट आई। रिकॉर्ड हाई से लुढ़ककर सोने-चांदी ने निवेशकों को चौंका दिया।
पिछले कुछ हफ्तों में तेजी दिखाने वाली चांदी ने अचानक निवेशकों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। एक्सपर्ट्स का कहना है कि मुनाफावसूली और डॉलर में मजबूती इस गिरावट की मुख्य वजह रही। सोने के भाव में भी दबाव बना रहा। एक दिन में चांदी में 107,971 रुपए की गिरावट आई है।
1980 की ‘हंट ब्रदर्स’ घटना
मार्केट विश्लेषकों ने मौजूदा गिरावट की तुलना 1980 के 'सिल्वर थर्सडे' से की है, जिसने उस दौर की ग्लोबल अर्थव्यवस्था को हिला दिया था। उस समय चांदी के असामान्य उछाल और अचानक गिरावट के पीछे अमेरिका के अरबपति हर्बर्ट और बंकर हंट का हाथ था।
हंट ब्रदर्स का ‘सिल्वर गेम’
1970 के दशक की शुरुआत में, जब अमेरिकी डॉलर का गोल्ड स्टैंडर्ड खत्म हुआ, महंगाई और आर्थिक अस्थिरता बढ़ गई। इस बीच हंट भाइयों ने चांदी को ‘सुरक्षित निवेश’ मानकर बड़े पैमाने पर खरीदना शुरू किया।
1973 से 1979 के बीच उन्होंने इतना फिजिकल सिल्वर और फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट खरीदा कि दुनिया की कुल चांदी का लगभग एक-तिहाई हिस्सा उनके नियंत्रण में आ गया। 1973 में 1.95 डॉलर प्रति औंस की चांदी जनवरी 1980 तक 25 गुना बढ़कर 50 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गई।
27 मार्च 1980: सिल्वर थर्सडे
अमेरिकी नियामकों ने इस ‘कॉर्नरिंग द मार्केट’ को रोकने के लिए नियम सख्त कर दिए। मार्जिन मनी की शर्तें इतनी कड़ी हो गईं कि हंट भाइयों ने नए सौदे नहीं कर पाए। परिणामस्वरूप, 27 मार्च 1980 को चांदी की कीमत एक ही दिन में 50% गिरकर 11 डॉलर के नीचे आ गई। इस दिन को आज भी ‘सिल्वर थर्सडे’ के नाम से याद किया जाता है।
गिरावट के पीछे कारण
- चांदी हमेशा 'हाई-बीटा' कमोडिटी रही है, यानी इसमें उतार-चढ़ाव तेज होता है।
- अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा फेड के नए चेयरमैन के नाम की घोषणा के बाद डॉलर मजबूत हुआ।
- डॉलर की मजबूती से सोने और चांदी जैसी कीमती धातुओं की कीमतें दबाव में आईं।
विशेषज्ञों का मानना है कि अभी बाजार में अस्थिरता बनी रहेगी और निवेशकों को सतर्क रहने की जरूरत है।