Edited By Mehak,Updated: 23 Mar, 2026 01:24 PM

मिडिल ईस्ट में जारी ईरान युद्ध के बीच सोना और चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट देखी जा रही है। MCX पर चांदी करीब ₹15,000 गिरकर ₹2.11 लाख प्रति किलो पर पहुंच गई, जबकि सोना ₹8,000 सस्ता हुआ। मजबूत डॉलर, ऊंची ब्याज दरें और महंगे कच्चे तेल के कारण कीमती...
नेशनल डेस्क : मिडिल ईस्ट में बढ़ते युद्ध और वैश्विक तनाव के बावजूद सोना और चांदी की कीमतों में लगातार गिरावट देखने को मिल रही है। आमतौर पर ऐसी परिस्थितियों में कीमती धातुओं की मांग बढ़ती है, लेकिन इस बार उल्टा रुख देखने को मिल रहा है। सोमवार को Multi Commodity Exchange (MCX) पर दोनों धातुओं के दाम में तेज गिरावट दर्ज की गई।
चांदी की कीमत में भारी गिरावट
सप्ताह के पहले कारोबारी दिन चांदी की कीमत में अचानक बड़ी गिरावट आई। MCX पर चांदी का भाव करीब ₹15,000 तक गिरकर ₹2,11,729 प्रति किलोग्राम पर पहुंच गया। यह गिरावट काफी अहम मानी जा रही है, क्योंकि चांदी अपने उच्चतम स्तर से अब तक 2 लाख रुपये से ज्यादा सस्ती हो चुकी है।
अगर पिछले रिकॉर्ड स्तर से तुलना करें, तो चांदी ने 29 जनवरी को लगभग ₹4.20 लाख प्रति किलो का उच्च स्तर छुआ था। इसके बाद से इसमें लगातार गिरावट जारी है। वहीं हाल के हफ्तों में भी इसमें बड़ी कमजोरी देखी गई है, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ी है।
सोने की कीमत भी फिसली
चांदी के साथ-साथ सोना भी गिरावट से नहीं बच पाया। सोमवार को MCX पर सोने का वायदा भाव खुलते ही ₹8,000 से ज्यादा गिर गया। 24 कैरेट सोने का भाव ₹1,44,000 प्रति 10 ग्राम के आसपास से गिरकर करीब ₹1,36,400 पर पहुंच गया। यह गिरावट दर्शाती है कि बाजार में सोने की मांग कमजोर हुई है और निवेशकों का रुख बदल रहा है। सोने में यह गिरावट अचानक और तेज मानी जा रही है।
हाई लेवल से काफी नीचे आए दाम
अगर सोने के उच्चतम स्तर की बात करें, तो इसने 29 जनवरी को करीब ₹1,93,000 प्रति 10 ग्राम का स्तर छुआ था। इसके मुकाबले अब तक सोना लगभग ₹56,000 तक सस्ता हो चुका है। वहीं, हाल के कुछ हफ्तों में भी इसमें लगातार गिरावट दर्ज की गई है। फरवरी के अंत में जो कीमतें थीं, उनसे तुलना करें तो भी सोने में काफी गिरावट देखी गई है।
गिरावट की बड़ी वजह क्या है?
आमतौर पर युद्ध या वैश्विक संकट के समय सोना-चांदी सुरक्षित निवेश माने जाते हैं और उनकी कीमत बढ़ती है। लेकिन इस बार कुछ अलग कारणों से इनकी कीमतों पर दबाव बना हुआ है।
- डॉलर की मजबूती : अमेरिकी डॉलर मजबूत होने से सोना-चांदी महंगे हो जाते हैं, जिससे उनकी मांग घटती है।
- ब्याज दरें ऊंची होना : उच्च ब्याज दरों के कारण निवेशक सोना-चांदी की बजाय अन्य विकल्पों की ओर रुख करते हैं।
- कच्चे तेल की कीमत में बढ़ोतरी : क्रूड ऑयल महंगा होने से महंगाई का दबाव बढ़ता है, जिससे बाजार में अस्थिरता आती है।
इन सभी कारणों का संयुक्त असर कीमती धातुओं की कीमतों पर साफ दिखाई दे रहा है।
आगे क्या रह सकता है रुख?
विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल बाजार में दबाव बना रह सकता है, लेकिन लंबी अवधि में सोना-चांदी फिर से मजबूती दिखा सकते हैं। वैश्विक हालात, डॉलर की चाल और ब्याज दरों में बदलाव आने वाले समय में इनके दाम तय करेंगे। निवेशकों के लिए यह समय सावधानी से फैसले लेने का है, क्योंकि बाजार में उतार-चढ़ाव तेज बना हुआ है।